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Friday, 9 September 2011

तीखी लौंग के लाभकारी प्रयोग


ND
चार लौंग कूट कर एक कप पानी में डाल कर उबालें। 

आधा पानी रहने पर छान कर स्वाद के अनुसार मीठा मिला कर पी कर करवट लेकर सो जाएं। दिन भर में ऐसी चार मात्रा लें। उल्टियां बंद हो जाएंगी। 

चार लौंग पीस कर पानी में घोल कर पिलाने में तेज ज्वर कम हो जाता है। आंत्र ज्वर में लौंग का पानी पिलाएं। 

पांच लौंग दो किलो पानी में उबालकर आधा पानी रहने पर छान लें। इस पानी को नित्य बार-बार पिलाएं। केवल पानी भी उबाल कर ठंडा करके पिलाएं। 

एक लौंग पीस कर गर्म पानी से फंकी लें। इस प्रकार तीन बार लेने से सामान्य ज्वर दूर हो जाएगा। 

लौंग अग्नि को जगाने वाली, पाचक है। नेत्रों के लिए हितकारी, क्षय रोग का नाश करने वाली है। लौंग और हल्दी पीस कर लगाने से नासूर मिटता है। 

खाना खाने के बाद 1-1 लौंग सुबह, शाम खाने से या शर्बत में लेने से अम्लपित्त से होने वाले सभी रोगों में लाभ होता है और अम्लपित्त ठीक हो जाता है। 

15 ग्राम हरे आंवलों का रस, पांच पिसी हुई लौंग, एक चम्मच शहद और एक चम्मच चीनी मिलाकर रोगी को पिलाएं। 

ऐसी तीन मात्रा सुबह, दोपहर, रात को सोते समय पिलाएं। कुछ ही दिनों में आशातीत लाभ होगा। 

ND
दो लौंग पीस कर उबलते हुए आधा कप पानी में डालें, फिर कुछ ठंडा होने पर पी जाएं। इस प्रकार तीन बार नित्य करें।

लौंग में अर्क निकाली हुई लौंग मिला देते हैं। यदि लौंग में झुर्रियाँ पड़ी हों तो समझें कि यह अर्क निकाली हुई लौंग है। अच्छी लौंग में झुर्रियां नहीं होतीं। 


सावधानी : लौंग की प्रवृत्ति बेहद गर्म होती है अत: अपने शरीर की प्रकृति को समझते हुए ही इसका सेवन करना चाहिए। अधिक मात्रा में लौंग का सेवन हानिकारक होता है।