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Sunday, 22 January 2012

सद्कर्मों और पुरुषार्थ से जीवन को सुखी बनाने की प्रेरणा

ज्योतिष शास्त्रों के मुताबिक न्यायाधीश शनि सद्कर्मों और पुरुषार्थ से जीवन को सुखी बनाने की प्रेरणा देते हैं। शनि का कठोर स्वभाव दरअसल अनुशासन, संयम, पवित्रता और संकल्प के साथ लक्ष्यों को पाने की सीख देता है। किंतु जब इंसान के विचार, कर्म और व्यवहार में दोष आते हैं तो शनि दण्ड के जरिए एहसास कराने से भी नहीं चूकते।

यही कारण है कि शनि कृपा जहां भाग्य संवारने वाली तो दण्ड पीड़ादायी होता है। शनि कृपा से लाभ पाने और साढ़े साती, ढैय्या या शनि के अशुभ प्रभाव को रोकने के लिये शास्त्रों में हर दिन कुछ सरल उपाय भी बताए गए हैं। जिनको अपनाकर शनि के साथ अन्य देवताओं की कृपा भी सुख-संपत्ति देने वाली साबित हो सकती है। जानिए, ये छोटे-छोटे उपाय-

- जल में काले तिल डाल स्नान करें। देववृक्ष पीपल की जड़ में दूध व काली तिल चढ़ाएं।

- शनिवार को शनि को सरसों का तेल, काले वस्त्र, काली उड़द, काले तिल चढ़ाएं। शनि मंत्रों का जप करें। तेल के पकवान का भोग लगाएं। भैंसे को अन्ऩ, चारा खिलाएं।

- सोमवार को शिव पूजा व मंत्र जप करें।

- गुरुवार को इष्ट या गुरु मंत्रों का ध्यान करें।

- मंगलवार, शनिवार को श्री हनुमान या भैरवनाथ को सिंदूर का चोला चढ़ाएं। कुत्तों को तेल की पुरियां खिलाएं।

- बुधवार को श्री गणेश को दूर्वा व मोदक का भोग लगाएं।

- शुक्रवार को नवदुर्गा की उपासना कर घर में बनी खीर का भोग लगाएं।