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Monday, 21 January 2013

राग रामकली

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राग रामकली
जाँचिये गिरिजापति कासी ।
जासु भवन अनिमादिक दासी ॥ १ ॥
औढर\-दानि द्रवत पुनि थोरें ।
सकत न देखि दीन करजोरे ॥ २ ॥
सुख\-संपति,मति\-सुगति सुहाई ।
सकल सुलभ संकर\-सेवकाई ॥ ३ ॥
गये सरन आरतिकै लीन्हे ।
निरखि निहाल निमिषमहँ कीन्हे ॥ ४ ॥
तुलसिदास जाचक जस गावै ।
बिमल भगति रघुपतिकी पावै ॥ ५ ॥
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