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Friday, 18 January 2013

दशनामी अखाड़े

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दशनामी साधु समाज के ७ प्रमुख अखाडो का जो विवरण आगे दिया गया है... वह श्री यदुनाथ सरकार द्वारा लिखित पुस्तक "नागे संनासियों का इतिहास" पर आधारित है... इनमे से प्रत्यक अखाड़े का अपना स्वतंत्र संघठन है... जिसमे डंका, भगवा निशान, भाला, छडी, हाथी, घोड़े, पालकी आदि होते है | इन अखाडों की सम्पति का प्रबंध श्री पंच द्वारा निर्वाचित आठ थानापति महंतो तथा आठ प्रबंधक सचिवों के जिम्मे रहती है | इनकी संख्या घट बढ़ सकती है | इनके अखाडों का पृथक पृथक विवरण निम्नअनुसार है-

१. श्री पंच दशनाम जूना अखाडा... दशनामी साधु समाज के इस अखाड़े की स्थापना कार्तिक शुक्ल दशमी मंगलवार विक्रम संवत १२०२ को उत्तराखंड प्रदेश में कर्ण प्रयाग में हुई | स्थापना के समय इसे भैरव अखाड़े के नाम से नामंकित किया गया था | बहुत पहले स्थापित होने के कारण ही संभवत: इसे जूना अखाड़े के नाम से प्रसिद्ध मिली | इस अखाड़े में शैव नागा दशनामी साधूओ की जमात तो रहती ही है परंतु इसकी विशेषता भी है की इसके निचे अवधूतानियो का संघटन भी रहता है इसका मुख्य केंद्र बड़ा हनुमान घाट ,काशी (वाराणसी, बनारस) है | इस अखाड़े के इष्ट देव श्री गुरु दत्तात्रय भगवान है जो त्रिदेव के एक अवतार माने जाते है |

2. श्री पन्च्याती अखाडा महनिर्माणी... दशनामी साधुओ के श्री पन्च्याती महानिर्वाणी अखाड़े की स्थापना माह अघहन शुक्ल दशमी गुरुवार को गढ़कुंडा (झारखण्ड) स्थित श्री बैजनाथ धाम में हुई | इस अखाड़े का मुख्य केंद्र दारा गंज प्रयाग (इलाहाबाद ) में है | इस अखाड़े के इष्ट देव राजा सागर के पुत्रो को भस्म करने वाले श्री कपिल मुनि है | सूर्य प्रकाश एवं भैरव प्रकाश इस अखाड़े की ध्वजाए है... जिन्हें अखाडों के साधु संतो द्वारा देव स्वरुप माना जाता है | इस अखाड़े में बड़े बड़े सिद्ध महापुरुष हुए | दशनामी अखाडों में इस अखाड़े का प्रथम स्थान है |

३. तपो निधि श्री निरंजनी अखाडा पन्च्याती... दशनामी साधुओ के तपोनिधि श्री निरंजनी अखाडा पन्च्याती अखाडा की स्थापना कृष्ण पक्ष षष्टि सोमवार विक्रम सम्वत ९६० को कच्छ (गुजरात) के भांडवी नामक स्थान पर हुई | इस अखाड़े का मुख्य केंद्र मायापूरी हरिद्वार है | इस अखाड़े के इष्ट देव भगवान कार्तिकेय है |

४. पंचायति अटल अखाडा... इस अखाड़े की स्थापना माह मार्गशीर्ष शुक्ल ४ रविवार विक्रम संवत ७०३ को गोंडवाना में हुई | इस अखाडे के इष्टदेव श्री गणेश जी है |

५. तपोनिधि श्री पंचायती आनंद अखाडा... दशनामी तपोनिधि श्री पंचायती आनंद अखाड़े की स्थापना माह शुक्ल चतुर्थी रविवार विक्रम संवत ९१२ कोबरार प्रदेश में हुई | इस अखाड़े के इष्टदेव भगवान श्री सूर्यनारायण है... तथा इस अखाड़े का प्रमुख केंद्र कपिल धारा काशी (बनारस ) है |

६. श्री पंचदशनाम आह्वान अखाडा... इस अखाड़े की स्थापना माह ज्येष्ट कृष्णपक्ष नवमी शुक्रवार का विक्रम संवत ६०३ में हुई | इस अखाड़े के इष्टदेव सिद्धगणपति भगवान है | इसका मुख्य केंन्द्र दशाशवमेघ घाट काशी (बनारस) है|

७. श्री पंचअग्नि अखाडा... श्री पंच-अग्नि अखाड़े की स्थापना और उसके विकास की एक अपनी गतिशील परम्परा है |

* श्री उदासीन अखाडा... काम , क्रोध पर जीवन में विजय प्राप्त करने वाले माह्नुभाव निश्चय करके अंतरात्मा में ही सुख , आराम और ज्ञान धारण करते हुऐ पूर्ण , एकी भाव से ब्रह्म में लीन रहते है |

उल्लेखनीय यह है है की दशनामी साधु समाज के अखाडों की व्यवस्था में सख्त अनुशासन कायम रखने की दृष्टि से इलाहाबाद कुम्भ तथा अर्धकुम्भ एवं हरिद्वार कुम्भ’ में इन अखाडों में श्री महंतो का नया चुनाव होता है|