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Friday, 18 January 2013

आस्तिक भावना और ईश्वर में विश्वास

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श्रीहरि हज़ारों ऐब हैं मुझमें, नहीं कोई हुनर बेशक
मेरी ख़ामी को यूँ ख़ूबी में तू तब्दील कर देना
मेरी हस्ती है इक खारे समंदर-सी मेरे श्रीहरि!
तू अपनी रहमतों से इसको मीठी झील कर देना...मस्त ♥♥ आशु

एक बीज बढ़ते हुए कभी कोई आवाज नहीं करता,
मगर एक पेड़ जब गिरता है तो
जबरदस्त शोर और प्रचार के साथ,
विनाश में शोर है,
सृजन हमेशा मौन रहकर समृद्धि पाता है...मस्त ♥♥ आशु

आस्तिक भावना और ईश्वर में विश्वास
भारतीय संस्कृति का मुख्य अंग है,
हिंदू संस्कृति आध्यात्मिकता की
अमर आधारशिला पर आधारित है।
भारत की एकता का मुख्य आधार है एक संस्कृति,
जिसका उत्साह कभी नहीं टूटा।
यही इसकी विशेषता है। भारतीय संस्कृति अक्षुण्ण है,
क्योंकि भारतीय संस्कृति की धारा
निरंतर बहती रही है और बहेगी।
आधुनिकता की सबसे बड़ी समस्या यह है कि
हमारी संस्कृति विज्ञान
जितनी प्रगति नहीं कर पाई है ..