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लिखिए अपनी भाषा में

Saturday, 27 April 2013

www.goswamirishta.com

जीवन बचा हुआ है मेरा हे कपि तेरी कृपा नजर से 
तूने मग में ज्योति जगा कर .हमें बचाया सघन तिमिर से.

मैं कुछ जान न पाया ,तुमने निज इच्छा से अस्त्र सम्हाले 
आने वाले संकट मेरे ,आने से पहले ही टाले 

सच कहता हूँ , हे प्रभु मैं तो तुमको उसपल भूल गया था
अपनी बलबुद्धी के मद में तब मैं इतना फूल गया था

क्या होता ,मेराप्रभु ,यदितुम ,मुझपर तत्क्षण कृपा न करते
मेरी परछाईं से भी तब ,शायद मेरे परिजन डरते.

जीवन दान दिया क्यों मुझको हे प्रभु ह्म यह समझ न पाये ,
इक्यासी का हुआ,करूं क्या ,ऐसा जो तेरे मन भाये

यही प्रेरणा हुई ,क़ि प्यारे ,तुम अपना अनुभव लिख डालो
लाभान्वित हों सबजन ,ऎसी कथा कहो, हरि के गुन गा लो