पानी पीने की सही विधि

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पानी पीने की सही विधि --
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"हर व्यक्ति को ऊषापान (सुबह उठने के बाद खाली पेट पानी पीने को कहते हैं ) ज़रूर करना चाहिए ..इससे मोटापा ..पेट सम्बंधित बीमारियाँ ,त्वचा सम्बंधित बीमारियाँ इत्यादि नियंत्रित होती हैं ..."

1--"पानी हमेशा घूँट घूँट करके पीना चाहिए क्योंकि इससे हमारे मुह में जो लार होती है वो पेट के अंदर जाती है|
2--हमारे पेट में भोजन को पकाने के लिए अम्ल होते हैं और मुह में जो लार होती है वो क्षार होता है
अम्ल+क्षार =न्यूट्रल (सामान्य) पानी हो जाता है |
3--इसलिए जितना घूँट घूँट करके पानी पियेंगे क्षार बनेगा और पेट में जाकर भोजन का पाचन होगा और पेट हमारा पानी की तरह रहेगा मतलब ढीला (स्वस्थ)रहेगा |पानी हमेशा बैठ कर ही पियें |
4--लार में medicinal property होती हैं ,जो की internal healing के भी काम आती हैं |
5--पानी हमेशा शरीर के temperature के अनुसार पीना चाहिए यानी की न ज्यादा गर्म और न ही chilled |क्योंकि ज्यादा ठंडा पानी पीने से पेट को अतिरिक्त कार्य करना पड़ता है और अंगों को कार्यशीलता (दिमाग ,ह्रदय etc.)धीरे- धीरे कम होने लगती है |
6--दिमाग का रक्त Gravity के कारन सबसे पहले कम होने लगता है और आगे चलकर Brain hemmorrhage इत्यादि रोगों के होने का डर रहता है |




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चिकनगुनिया का इलाज !

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मित्रो कुछ दिनो पहले चिकनगुनिया नाम की बीमारी बहुत तेजी से अपने देश मे फैली !! लाखो की संख्या मे लोग इससे प्रभावित हुये ! और हजारो लोग मरे ! हमेशा की तरह सरकार के हाथ खड़े रहे !

श्री राजीव दीक्षित जी ने 6 महीने गाँव -गाँव घूम-घूम कर आयुर्वेदिक दवा से सैंकड़ों लोगो को बचाया !!और ये दवा बनानी कितनी आसान है !

तुलसी का काढ़ा पी लो !

नीम की गिलोय होती है उसको भी उसमे डाल लो !

थोड़ी सोंठ(सुखी अदरक) डाल लो !

थोड़ी छोटी पीपर डाल लो !

और अंत थोड़ा गुड मिला लो ! क्यूंकि ज्यादा कड़वा हो जाता है तो कई बार पिया नहीं जाता !

मात्र इसकी 3 खुराक से राजीव भाई ने हजारो लोगो का चिकनगुनिया पूरा खत्म कर दिया !!
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और जो ये एलोपेथी वाले ने किया ! Boveron के 3 -3 इंजेक्शन ठोक दो ! diclofenac दे दो !
Paracetamol भी दे दो ! जो इनके पास है सब मरीज को ठोक दिया ! और लोग 20 -20 दिन से बिस्तर मे पड़े तड़पते रहे !!

और कुछ डाक्टर जिनको खुद चिकनगुनिया हो गया ! राजीव भाई के पास आए और बोलो कुछ बता दो ! राजीव भाई ने कहा अपना इंजेक्शन खुद क्यूँ नहीं ठोक लेते ! तो उन्होने ने कहा हमे मालूम है इसके side effects क्या हैं !

तो राजीव भाई ने कहा मरीज को क्यूँ नहीं बताते ???
क्या इतने हरामखोर हो ??

तुम जानते हो Boveron लगाएंगे मुंह मे छाले हो जाएँगे ! गले मे छालें हो जाएँगे ! अल्सर होने की भी संभावना है ! ये सब तुम जानते हो तो मरीज को क्यूँ नहीं बताते ???

ये हरामखोरी तुम मे कहाँ से आ गई ??

अपने को ये सब इंजेक्शन लगाओ नहीं ! और मरीज को ठोकते जाओ ठोकते जाओ ! और तुमके मालूम है मरीज इससे ठीक होने वाला नहीं ! फिर Paracetamol दे दो फिर novalgin दे दो !

और दुर्भाग्य से ये सारी दवाएं यूरोप के देशों मे पीछले 20 -20 से बंद है ! वो कहते है diclofenac खराब है !Paracetamol तो जहर है ! novaljin तो 1984 से बैन हैं अमेरिका मे ! और वही इंजेक्शन ठोक रहें बार बार ! और मरीज जो है ठीक ही नहीं हो रहा !!

राजीव भाई बताते है होमेओपेथी की तो बहुत सी दवा तो आयुर्वेद से हीं गाई ! आप मे से कुछ होमेओपेथी डाक्टर होंगे तो वो जानते होंगे ! तुलसी से ही ocimum बनी हैं ! तो ocimum की तीन तीन खुराक देकर राजीव भाई ने कर्नाटक राज्य मे 70 हजार लोगो को चलता कर दिया ! और वो 20 -20 दिन से एलोपेथी खा रहे थे result नहीं आ रहा था ! बुखार रुक नहीं रहा था उल्टी पे उल्टी हो रही थी ! नींद आ नहीं रही थी और ocimum 200 की तीन तीन खुराक से
सब ठीक कर दिया !

और अंत कर्नाटक राज्य की सरकार ने इसके परिणाम देख अपने सारे डाएरेक्टर,जोयन डेरेक्टर ! लगा दिये कि जाओ देखो ये राजीव दीक्षित क्या दे रहा है !

राजीव भाई 70 हजार लोगो को दवा दी सिर्फ 6 मरे ! औए उन्होने 1 लाख 22 हजार लोगो की दी मुश्किल से 6 बचे !! ये कर्नाटक का हाल था ! राजीव भाई बोले मेरी मजबूरी ये थी की कार्यकर्ता कम पढ़ गए ! अगर 1 -2 हजार डाक्टरों की टीम साथ होती ! तो हम कर्नाटक के उन लाखो लोगो को बचा लेते जो मर गए !

तो मित्रो ये तुलसी ,नीम सोंठ ,पीपर सब आपके घर मे आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं ! इनके प्रयोग से आप रोगी की जान बचा सकते हैं ! और अगर पूरे शहर या गाँव मे फैल जाये ! एक एक को काढ़ा पिलाना मुश्किल हो तो होमेओपेथी की ocimum 200 की दो दो बुँदे 3 -3 बार मरीजो को दीजिये !!
उनका अनमोल जीवन और पैसा बचाइए !
http://www.youtube.com/watch?v=PmQnBJbq5X8
अपने पूरी post पढ़ी बहुत बहुत धन्यवाद !

एक बार यहाँ जरूर click कर देखे !


वन्देमातरम ! अमर शहीद राजीव दीक्षित जी की जय !
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god shiva

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सोचने वाली बाते

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ज्यादातर लोग आज की बनी रोटी कल खाना पसंद नहीं करेंगे, कुछ तो ऐसे भी है जो सुबह की बनी रोटी शाम को भी नही खाते, अब मैं अगर आपसे बोलूँ की आज रोटी बनाकर उसको पौलिथीन में पैक कर देता हूँ, उसको ४ दिन बाद खाने को कौन राजी होगा?
आप सोच रहे होंगे की क्या बेतुकी बातें कर रहा हूँ, अब जरा सोचो की आटे को सड़ाकर बनाई हुई ब्रेड और पाँव रोटी जो पता नही कितने दिन पहले की बनी हुई है, उसको इतना मजे ले कर क्यों खाते हो ? क्यों बर्गर और ब्रेड पकोड़ा खाते वक्त ये बातें दिमाग में नही आती हैं ?

अगर हम ताजा रोटी खाने की परम्परा को दकियानुसी मान कर ४-५ दिन पहले बनी बासी रोटी खाने को अपनी शान समझते है तो हम पढ़े लिखे मूर्खो के सिवा और कुछ नही है, यूरोप के गधों के पीछे आँख बंद कर चलने वाली भेड़ चाल को हमें छोड़ना ही होगा, यूरोप में ब्रेड खाना उनकी मज़बूरी है, वहाँ का तापमान इतना कम रहता है की रोटी बनाना संभव ही नही है, आटा गूँथने के लिए पानी चाहिए लेकीन वहाँ छः महीने तो बर्फ जमी रहती है, इसीलिए वहाँ ब्रेड बनाई जाती है जिसमें आटा गूँथने की जरुरत नहीं होती है, आटे को सड़ाकर ब्रेड बना दी जाती है, और अत्यंत कम तापमान की वजह से वो चार पांच दिनों तक खराब नही होती है, भारतीय जलवायु के हिसाब से ब्रेड उचित नहीं है, भारतीय जलवायु में ब्रेड जैसे नमीयुक्त खाद्य पदार्थ जल्दी खराब होते हैं, तापमान बहुत कम होने के कारण उनके शरीर में मैदे से बनी ब्रैड पच जाती है पर भारत में तापमान बहुत अधिक होता है जो भारतीयों के लिये सही नही, इससे कब्ज की शिकायत होती है और कब्ज होने से सैंकडों बीमारियां लगती है, हजारों सालों से भारत में ताजे आटे को गूंथकर ही रोटी बनाई और खाई जाती है, हमारे पूर्वज इतने तो समझदार थे जो उन्होने ब्रैड आदि खाना शुरू नही किया तो आप भी समझदार बनिये,
इसीलिए सभी राष्ट्रभक्त भाई बहनों से निवेदन है की ब्रेड, पाँव रोटी जैसी चीजों से बने खाद्य पदार्थ का पूरी तरह से बहिष्कार करें और अन्य को भी प्रेरित करें।
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ईश्वर का सन्देश

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हम मानव जाति लिए ईश्वर का सन्देश क्या है ? क्या अपेक्षा है परमपिता परमेश्वर की हम मानव से !

संत कहते हैं मानव जीवन मिला है इसे केवल ईश्वर- भक्ति में व्यतीत करना चाहिये! विद्वान् कहते हैं बड़े भाग्य से मानव शरीर मिला है इसका उपयोग भले कार्यों में करना चाहिये !

क्यों हम अपना सम्पूर्ण जीवन मात्र पिता की स्तुति में नष्ट करें ? कोई पिता भी ऐसा नहीं चाहेगा !

क्या ईश्वर अपनी स्तुति के लिए ही हमें जन्म देता है ??

भले कार्यों की परिभाषा कौन निश्चित करेगा ? ईश्वर या खुद मानव ??

हम मानव खुद को इतना समझदार बना डालने के बावजूद ईश्वर का सन्देश और जीवन को जीने के तरीके का संकेत समझ नहीं पाते ! हम उस अंधे की तरह समझदारी दिखाते हैं जो पूंछ को रस्सी और रस्सी को सांप समझने जैसा करता है !

ईश्वर का सन्देश बिलकुल स्पष्ट है कि मानव जीवन मिला है और मिली है एक खुशहाल मस्त प्रकृति - पेड़ -पहाड़ -नदियां -पक्षी -साग़र -फूलों आदि से लबालब ! बस हम मानव इन प्राकृतिक रचनाओं का आदर करते हुये इनके संग संग ख़ुशी-ख़ुशी जीवन व्यतीत करें और जीवन के समापन तक आनंदित रहें ! अगर कोई बीता हुआ क्षण व्यथित कर रहा है तो उसे भूल जायें और आगे बढ़े !
आप पूछेगें कि भूतकाल को क्यों और कैसे भूल कर आगे बढ़े ! मेरा मानना है ईश्वर का यही सन्देश है कि कल जो बीत गया अच्छा या बुरा उसे भूल जायें , आज जो हम जी रहें हैं उसे आनंदमय बनाये ! अगर ईश्वर ये नहीं चाहता तो व़ो हमसे पिछले जन्म की स्मृति क्यों छीन लेता ? पिछले जन्म की स्मृतियाँ इस जन्म में नहीं देने का प्रयोजन ही ईश्वर का हम मानव को स्पष्ट सन्देश है कि जो बीत जाता है उसे भूल कर रोज नया जीवन जीये तभी हम खुश रह पायेंगें ! 
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मन्दिर में घंटा क्यों बजाना चाहिए ?

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 मन्दिर में घंटा क्यों बजाना चाहिए ?
हमारे जितने भी रीति रिवाज है उन्हें बनाने के पीछे ऋषि मुनियों की मंशा यही थी की वैज्ञानिक बातों को सामान्य जन कैसे अपनी जीवन शैली में उतारे . समय के साथ साथ कुछ रूढ़ियाँ भी इसमें आ गयी . पर अब ये हमारे लिए चुनौती है की हम इन रीती रिवाजों के पीछे छुपा विज्ञान ढूंढे और जो उसमे कचरा या मिलावट आ गयी उसे अलग करें . ऐसा ही एक रिवाज हमारी पूजा पद्धति का है घंटी बजाना ....घंटा अष्ट धातु से बना होता है ! ये आठ धातुये है ........ सोना, चाँदी,पीतल, तांबा, रांगा, जस्ता, सीसा तथा लोहा .अष्ट धातु निर्मित घंटे की टंकार से उत्पन्न होने वाली धव्नि प्राणघातक सूक्ष्म जीवाणुओ को हवा में ही मारने की क्षमता रखती है अर्थात अनेक प्रकार के सूक्ष्म जीवाणु जो वातावरण में विद्यमान होते है एवं प्राण वायु के मध्यम से हमारे शरीर में पहुंचकर हानि पहुचाने की शक्ति रखते है ऐसे हानिकारक जीवाणुओ की घंटे की टंकार के साथ ही तत्काल मृत्यु हो जाती है जो शंख ध्वनी के सिवाय अन्य किसी साधन से संभव नहीं है .घंटे की आवाज़ ककर्श न होकर मनमोहक एवं कर्ण-पिर्य होती है जिस से किसी भी प्रकार हानि नहीं होती . मनमोहक एवं कर्ण प्रिय धव्नि मन मष्तिष्क को आध्यात्म भाव की और के जाने का सामर्थ्य रखती है बस आवश्कता है इस दिव्य ध्वनि को महसूस करने की..घंटियां देवालयों व मंदिरों में काफी प्राचीन समय से लगाई जाती रही हैं ! ऐसी मान्यता है कि जिन स्थानों पर घंटी बजने की आवाज नियमित आती है वहां का वातावरण हमेशा शुद्ध और पवित्र बना रहता है। ऐसे स्थानों पर नकारात्मक शक्तियां निष्क्रिय रहती हैं !!!!!!!!!


सुबह-शाम मंदिरों में जब पूजा-आरती की जाती है तो छोटी-बड़ी घंटियों की आवाज आती है ! घंटियां बजाने में एक विशेष लय होती है जिससे वहां मौजूद लोगों को शांति और दैवीय अनुभूति होती है !!


ऐसा माना जाता है कि घंटी बजाने से मंदिर में स्थापित देवी-देवताओं की प्रतिमाएं चेतन हो जाती हैं जिससे उनकी पूजा और अधिक प्रभावशाली तथा शीघ्र फल देने वाली होती है ! पुराणों के अनुसार मंदिर में घंटी बजाने से मानव के कई जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं ! जब सृष्टि का प्रारंभ हुआ तब जो नाद (आवाज) था, घंटी की ध्वनि से वही नाद निकलता है ! यही नाद ओंकार के उच्चारण से भी जाग्रत होता है !!


घंटी या घंटे को काल का प्रतीक भी माना गया है। ऐसा माना जाता है कि जब प्रलय काल आएगा तब भी इसी प्रकार का नाद यानि आवाज प्रकट होगी ! मंदिरों में घंटी लगाने का वैज्ञानिक कारण भी है। जब घंटी बजाई जाती है तो उससे वातावरण में कंपन उत्पन्न होता है जो वायुमंडल के कारण काफी दूर तक जाता है। इस कंपन की सीमा में आने वाले जीवाणु, विषाणु आदि सूक्ष्म जीव नष्ट हो जाते हैं। मंदिर का तथा उसके आस-पास का वातावरण शुद्ध बना रहता है। इसी वजह से जब भी मंदिर जाएं तो घंटी जरूर बजाएं !
जय बजरंगी..जय श्री राम
ॐ नमः शिवाय ..हर हर महादेव 



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