विचारों के अनुरूप ही मनुष्य की स्थिति और गति होती है। श्रेष्ठ विचार सौभाग्य का द्वार हैं, जबकि निकृष्ट विचार दुर्भाग्य का,आपको इस ब्लॉग पर प्रेरक कहानी,वीडियो, गीत,संगीत,शॉर्ट्स, गाना, भजन, प्रवचन, घरेलू उपचार इत्यादि मिलेगा । The state and movement of man depends on his thoughts. Good thoughts are the door to good fortune, while bad thoughts are the door to misfortune, you will find moral story, videos, songs, music, shorts, songs, bhajans, sermons, home remedies etc. in this blog.
ज्यादा टी.वी. देखने लगातार कम्प्यूटर स्क्रीन पर काम करने या अन्य कारणों से अक्सर देखने में आता है कि कम उम्र के लोगों को भी जल्दी ही मोटे नम्बर का चश्मा चढ़ जाता है। अगर आपको भी चश्मा लगा है तो आपका चश्मा उतर सकता है। नीचे बताए नुस्खों को चालीस दिनों तक प्रयोग में लाएं। निश्चित ही चश्मा उतर जाएगा साथ थी आंखों की रोशनी भी तेज होगी।
सुबह नंगे पैर घास पर मार्निंग वॉक करें।
नियमित रूप से अनुलोम-विलोम प्राणायाम करें।
बादाम की गिरी, बड़ी सौंफ और मिश्री तीनों का पावडर बनाकर रोज एक चम्मच एक गिलास दूध के साथ रात को सोते समय लें।
त्रिफला के पानी से आंखें धोने से आंखों की रोशनी तेज होती है।
पैर के तलवों में सरसों का तेल मालिश करने से आंखों की रोशनी तेज होती है।
सुबह उठते ही मुंह में ठण्डा पानी भरकर मुंह फुलाकर आंखों पर छींटे मारने से आंखों की रोशनी बढ़ती है।
आज कल सब्जियां उगाने की जगह और तरीका ऐसा होता है की सिर्फ्र उसकी मात्रा पर ध्यान जाता है। फिर वे नाले के पानी से सिंची जाए या उस पर ज़हर छिडका जाए इसकी कोई परवाह नहीं करता। ऑर्गेनिक सब्जियां महँगी होती है की आम आदमी उसे खरीद नहीं सकता। - देश के कृषि मंत्री ने भी इस बात को माना है कि भारत में 67 ऐसे पेस्टिसाइड्स का इस्तेमाल हो रहा है , जो दूसरे देशों में प्रतिबंधित हैं। लेकिन कई सब्जियां ऐसी हैं जिनमें इस जहर से डरने की जरूरत नहीं। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि घिया , तोरई , सीताफल , गाजर , शलगम जैसी कई सब्जियां ऐसी हैं , जिनमें पेस्टिसाइड्स का इस्तेमाल न के बराबर होता है। - सब्जी का सिर्फ रूप - रंग ना देखे। जिस सब्जी में अच्छी खुशबु है और स्वाद अच्छा है , वही ख़रीदे।अलग अलग सब्जी वाले से खरीद कर देखे और फिर एक को चुने और उसी से लेते रहे। - अगर गोभी का फूल एकदम सफेद और चमकदार न होकर थोड़ा पीला है तो उसे ही लें।गोभी के फूल में चमक लाने के लिए उसे मेलोथियन में डुबोया जाता है। इसी तरह भिंडी डार्क हरी नहीं हैं तो उसे खरीदें। - चमकदार फल और सब्जियों के इस्तेमाल से बचें , जैसे टमाटर , बैंगन , भिंडी , सेब। - कई बार बेबी कॉर्न या बीट रूट में दवाई की महक आती है , ऐसी सब्जी ना ख़रीदे। - हरी सब्जी को बिन कर पानी में डुबाकर रखे। थोड़ी देर में उसकी मिटटी नीचे बैठ जायेगी। ऊपर ऊपर से सब्जी निकाल ले। ऐसा 3-4 बार जब तक नीचे मिटटी बैठ तब तक धोये।हरी सब्जी की मिटटी रह जाए तो पेट के कीड़ों को जन्म देती है जो कई बार ब्रेन में जमा हो जाते है और मिर्गी जैसी बिमारी को जन्म देते है। - गाजर , मूली, आलू आदि को पहले धो कर मिटटी निकाल ले। फिर मोटा छिलका निकाल ले और फिर से पानी से धो ले। अब काटे। - प्याज , लहसून आदि भी धो कर काटे। इससे उनका छिलका भी आसानी से उतरता है। - हरी मिर्च को धो कर , डंडी निकाल कर रख ले। कभी भी तुरंत इस्तेमाल कर सकते है। - हरा धनिया हमेशा देशी ही इस्तेमाल करे। जिस धनिये में दूर से ही खुशबु आ रही है , वही अच्छा है।इसे भी बिन कर कई बार पानी से निकाल ले और एक पेपर पर फैला कर सुखा ले। अब ये कभी इस्तेमाल के लिए तैयार है। - पुदीना भी इसी तरह तैयार कर ले। ये छाया में सुखाकर रख ले।इसका चुरा बना कर कभी भी भेल पूरी या जलजीरा या पानी पूरी के पानी में डाला जा सकता है। - इसी तरह कढी पत्ते को भी धो कर सुखा के रख ले। - हरी सब्जी को धोने के बाद एक बड़े सूती दुपट्टे में रखे। पोटली बना कर गोल घुमाए। सारा पानी निकल जाएगा।अब यह सड़ेगा नहीं। - बर्तन धोने वाले डिटर्जेंट की कुछ बूंदे एक लीटर पानी में मिलाएं और उसमें फल व सब्जी धोने के बाद उन्हें हल्के गुनगुने पानी में धोएं। इससे उन पर लगा वैक्स और कलर हट जाएगा। - नमक मिले पानी से भी सब्जियों को धोया जा सकता है और कीटाणु मुक्त बनाया जा सकता है। - बंदगोभी और ऐसी ही दूसरी पत्तेदार सब्जियों के ऊपरी हिस्से के पत्ते जरूर उतार दें। - फूल गोभी को काटकर नमक और हल्दी के पानी में धो ले। - सीजनल चीजें खाने से भी नुकसान कम होता है , क्योंकि उनमें पेस्टिसाइड्स का इस्तेमाल न के बराबर होता है। - आजकल अधिकतर अधिकतर स्वीट कॉर्न जेनेटिकली मोडिफाईड होता है। यह पोषण ना दे कर खतरनाक बीमारियाँ देता है। इसलिए देशी कॉर्न का ही इस्तेमाल करे।
एक बार की बात है एक जंगल में सेब का एक बड़ा पेड़ था| एक बच्चा रोज उस पेड़ पर खेलने आया करता था| वह कभी पेड़ की डाली से लटकता कभी फल तोड़ता कभी उछल कूद करता था, सेब का पेड़ भी उस बच्चे से काफ़ी खुश रहता था| कई साल इस तरह बीत गये| अचानक एक दिन बच्चा कहीं चला गया और फिर लौट के नहीं आया, पेड़ ने उसका काफ़ी इंतज़ार किया पर वह नहीं आया| अब तो पेड़ उदास हो गया|
काफ़ी साल बाद वह बच्चा फिर से पेड़ के पास आया पर वह अब कुछ बड़ा हो गया था| पेड़ उसे देखकर काफ़ी खुश हुआ और उसे अपने साथ खेलने के लिए कहा| पर बच्चा उदास होते हुए बोला कि अब वह बड़ा हो गया है अब वह उसके साथ नहीं खेल सकता| बच्चा बोला की अब मुझे खिलोने से खेलना अच्छा लगता है पर मेरे पास खिलोने खरीदने के लिए पैसे नहीं है| पेड़ बोला उदास ना हो तुम मेरे फल तोड़ लो और उन्हें बेच कर खिलोने खरीद लो| बच्चा खुशी खुशी फल तोड़ के ले गया लेकिन वह फिर बहुत दिनों तक वापस नहीं आया| पेड़ बहुत दुखी हुआ|
अचानक बहुत दिनों बाद बच्चा जो अब जवान हो गया था वापस आया, पेड़ बहुत खुश हुआ और उसे अपने साथ खेलने के लिए कहा पर लड़के ने कहा कि वह पेड़ के साथ नहीं खेल सकता अब मुझे कुछ पैसे चाहिए क्यूंकी मुझे अपने बच्चों के लिए घर बनाना है| पेड़ बोला मेरी शाखाएँ बहुत मजबूत हैं तुम इन्हें काट कर ले जाओ और अपना घर बना लो| अब लड़के ने खुशी खुशी सारी शाखाएँ काट डालीं और लेकर चला गया| वह फिर कभी वापस नहीं आया|
बहुत दिनों बात जब वह वापिस आया तो बूढ़ा हो चुका था पेड़ बोला मेरे साथ खेलो पर वह बोला की अब में बूढ़ा हो गया हूँ अब नहीं खेल सकता| पेड़ उदास होते हुए बोला की अब मेरे पास ना फल हैं और ना ही लकड़ी अब में तुम्हारी मदद भी नहीं कर सकता| बूढ़ा बोला की अब उसे कोई सहायता नहीं चाहिए बस एक जगह चाहिए जहाँ वह बाकी जिंदगी आराम से गुजर सके| पेड़ ने उसे अपने जड़ मे पनाह दी और बूढ़ा हमेशा वहीं रहने लगा|
जब भी तुलसी में खूब फुल यानी मंजिरी लग जाए तो उन्हें पकने पर तोड़ लेना चाहिए वरना तुलसी के झाड में चीटियाँ और कीड़ें लग जाते है और उसे समाप्त कर देते है . इन पकी हुई मंजिरियों को रख ले . इनमे से काले काले बीज अलग होंगे उसे एकत्र कर ले . यही सब्जा है . अगर आपके घर में नही है तो बाजार में पंसारी या आयुर्वैदिक दवाईयो की दुकान पर मिल जाएंगे
शीघ्र पतन एवं वीर्य की कमी:: तुलसी के बीज 5 ग्राम रोजाना रात को गर्म दूध के साथ लेने से समस्या दूर होती है
नपुंसकता:: तुलसी के बीज 5 ग्राम रोजाना रात को गर्म दूध के साथ लेने से नपुंसकता दूर होती है और यौन-शक्ति में बढोतरि होती है।
यौन दुर्बलता : 15 ग्राम तुलसी के बीज और 30 ग्राम सफेद मुसली लेकर चूर्ण बनाएं, फिर उसमें 60 ग्राम मिश्री पीसकर मिला दें। और शीशी में भरकर रख दें। 5 ग्राम की मात्रा में यह चूर्ण सुबह-शाम गाय के दूध के साथ सेवन करें इससे यौन दुर्बलता दूर होती है।
मासिक धर्म में अनियमियता:: जिस दिन मासिक आए उस दिन से जब तक मासिक रहे उस दिन तक तुलसी के बीज 5-5 ग्राम सुबह और शाम पानी या दूध के साथ लेने से मासिक की समस्या ठीक होती है
गर्भधारण में समस्या:: जिन महिलाओ को गर्भधारण में समस्या है वो मासिक आने पर ५-५ ग्राम तुलसी बीज सुबह शाम पानी के साथ ले जब तक मासिक रहे , मासिक ख़त्म होने के बाद माजूफल का चूर्ण १० ग्राम सुबह शाम पानी के साथ ले ३ दिन तक
तुलसी के पत्ते गर्म तासीर के होते है पर सब्जा शीतल होता है . इसे फालूदा में इस्तेमाल किया जाता है . इसे भिगाने से यह जेली की तरह फुल जाता है . इसे हम दूध या लस्सी के साथ थोड़ी देशी गुलाब की पंखुड़ियां दाल कर ले तो गर्मी में बहुत ठंडक देता है .इसके अलावा यह पाचन सम्बन्धी गड़बड़ी को भी दूर करता है .यह पित्त घटाता है ये त्रीदोषनाशक , क्षुधावर्धक है .
नोट :: तुलसी के बीज,सफेद मुसली और माजूफल का चूर्ण आपको पंसारी की दूकान या आयुर्वैदिक दवाओ कि दूकान से मिल जायेंगे
- नारियल और जैतून के तेल की बराबर मात्रा लेकर इसमें कुछ बूंदे नींबू के रस की मिला ली जाएं और इस मिश्रण से बालों की मालिश लगभग 10 मिनिट तक की जाए और फिर गर्म तौलिए से सिर को 3 मिनिट के लिए ढक लिया जाए, बालों से जुडी समस्याओं में काफी फायदा करता है। - मेथी के बीजों में फॉस्फेट, लेसिथिन और न्यूक्लिओ-अलब्यूमिन होने से ये कॉड-लिवर ऑयल जैसे पोषक और बल प्रदान करने वाले होते हैं। इसमें फोलिक एसिड, मैग्नीशियम, सोडियम, जिंक, कॉपर, नियासिन, थियामिन, कैरोटीन आदि पोषक तत्व पाए जाते हैं जो बालों की बेहतर सेहत के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। बालों में रूसी होने पर मेथी दानों को कुचलकर या ग्राईंडर में पीसकर चूर्ण बनाया जाए। लगभग 3 ग्राम चूर्ण लेकर इसमें पानी मिलाया जाए ताकि पेस्ट तैयार हो जाए। इस पेस्ट को बालों में लगाएं और आधा घंटे बाद धो लें, सप्ताह में 2 से 3 बार ऐसा करने से डेंड्रफ की समस्या से छुटकारा मिल जाता है।
जिसका विवाह"जयद्रथ"सेहुआ था ) "श्री मद्-भगवत गीता" के बारे में-
किसको किसने सुनाई? उ.- श्रीकृष्ण ने अर्जुन को सुनाई।
कब सुनाई? उ.- आज से लगभग 7 हज़ार साल पहले सुनाई।
भगवान ने किस दिन गीता सुनाई? उ.- रविवार के दिन।
कोनसी तिथि को? उ.- एकादशी
कहा सुनाई? उ.- कुरुक्षेत्र की रणभूमि में।
कितनी देर में सुनाई? उ.- लगभग 45 मिनट में
क्यू सुनाई? उ.- कर्त्तव्य से भटके हुए अर्जुन को कर्त्तव्य सिखाने के लिए और आने वाली पीढियों को धर्म-ज्ञान सिखाने के लिए।
कितने अध्याय है? उ.- कुल 18 अध्याय
कितने श्लोक है? उ.- 700 श्लोक
गीता में क्या-क्या बताया गया है? उ.- ज्ञान-भक्ति-कर्म योग मार्गो की विस्तृत व्याख्या की गयी है, इन मार्गो पर चलने से व्यक्ति निश्चित ही परमपद का अधिकारी बन जाता है।
गीता को अर्जुन के अलावा और किन किन लोगो ने सुना? उ.- धृतराष्ट्र एवं संजय ने
अर्जुन से पहले गीता का पावन ज्ञान किन्हें मिला था? उ.- भगवान सूर्यदेव को
गीता की गिनती किन धर्म-ग्रंथो में आती है? उ.- उपनिषदों में
गीता किस महाग्रंथ का भाग है....? उ.- गीता महाभारत के एक अध्याय शांति-पर्व का एक हिस्सा है।
गीता का दूसरा नाम क्या है? उ.- गीतोपनिषद
गीता का सार क्या है? उ.- प्रभु श्रीकृष्ण की शरण लेना
- योग में नाड़ियों की संख्या बहत्तर हजार से ज्यादा बताई गई है और इसका मूल उदगम स्त्रोत नाभिस्थान है।
- आधुनिक जीवन-शैली इस प्रकार की है कि भाग-दौड़ के साथ तनाव-दबाव भरे प्रतिस्पर्धापूर्ण वातावरण में काम करते रहने से व्यक्ति का नाभि चक्र निरंतर क्षुब्ध बना रहता है। इससे नाभि अव्यवस्थित हो जाती है। इसके अलावा खेलने के दौरान उछलने-कूदने, असावधानी से दाएँ-बाएँ झुकने, दोनों हाथों से या एक हाथ से अचानक भारी बोझ उठाने, तेजी से सीढ़ियाँ चढ़ने-उतरने, सड़क पर चलते हुए गड्ढे, में अचानक पैर चले जाने या अन्य कारणों से किसी एक पैर पर भार पड़ने या झटका लगने से नाभि इधर-उधर हो जाती है। कुछ लोगों की नाभि अनेक कारणों से बचपन में ही विकारग्रस्त हो जाती है।
- प्रातः खाली पेट ज़मीन पर शवासन में लेतें . फिर अंगूठे के पोर से नाभि में स्पंदन को महसूस करे . अगर यह नाभि में ही है तो सही है . कई बार यह स्पंदन नाभि से थोड़ा हट कर महसूस होता है ; जिसे नाभि टलना या खिसकना कहते है .यह अनुभव है कि आमतौर पर पुरुषों की नाभि बाईं ओर तथा स्त्रियों की नाभि दाईं ओर टला करती है।
- नाभि में लंबे समय तक अव्यवस्था चलती रहती है तो उदर विकार के अलावा व्यक्ति के दाँतों, नेत्रों व बालों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने लगता है। दाँतों की स्वाभाविक चमक कम होने लगती है। यदाकदा दाँतों में पीड़ा होने लगती है। नेत्रों की सुंदरता व ज्योति क्षीण होने लगती है। बाल असमय सफेद होने लगते हैं।आलस्य, थकान, चिड़चिड़ाहट, काम में मन न लगना, दुश्चिंता, निराशा, अकारण भय जैसी नकारात्मक प्रवृत्तियों की उपस्थिति नाभि चक्र की अव्यवस्था की उपज होती है।
- नाभि स्पंदन से रोग की पहचान का उल्लेख हमें हमारे आयुर्वेद व प्राकृतिक उपचार चिकित्सा पद्धतियों में मिल जाता है। परंतु इसे दुर्भाग्य ही कहना चाहिए कि हम हमारी अमूल्य धरोहर को न संभाल सके। यदि नाभि का स्पंदन ऊपर की तरफ चल रहा है याने छाती की तरफ तो अग्न्याष्य खराब होने लगता है। इससे फेफड़ों पर गलत प्रभाव होता है। मधुमेह, अस्थमा, ब्रोंकाइटिस जैसी बीमारियाँ होने लगती हैं।
- यदि यह स्पंदन नीचे की तरफ चली जाए तो पतले दस्त होने लगते हैं।
- बाईं ओर खिसकने से शीतलता की कमी होने लगती है, सर्दी-जुकाम, खाँसी, कफजनित रोग जल्दी-जल्दी होते हैं।
- दाहिनी तरफ हटने पर लीवर खराब होकर मंदाग्नि हो सकती है। पित्ताधिक्य, एसिड, जलन आदि की शिकायतें होने लगती हैं। इससे सूर्य चक्र निष्प्रभावी हो जाता है। गर्मी-सर्दी का संतुलन शरीर में बिगड़ जाता है। मंदाग्नि, अपच, अफरा जैसी बीमारियाँ होने लगती हैं।
- यदि नाभि पेट के ऊपर की तरफ आ जाए यानी रीढ़ के विपरीत, तो मोटापा हो जाता है। वायु विकार हो जाता है। यदि नाभि नीचे की ओर (रीढ़ की हड्डी की तरफ) चली जाए तो व्यक्ति कुछ भी खाए, वह दुबला होता चला जाएगा। नाभि के खिसकने से मानसिक एवंआध्यात्मिक क्षमताएँ कम हो जाती हैं।
- नाभि को पाताल लोक भी कहा गया है। कहते हैं मृत्यु के बाद भी प्राण नाभि में छः मिनट तक रहते है।
- यदि नाभि ठीक मध्यमा स्तर के बीच में चलती है तब स्त्रियाँ गर्भधारण योग्य होती हैं। यदि यही मध्यमा स्तर से खिसककर नीचे रीढ़ की तरफ चली जाए तो ऐसी स्त्रियाँ गर्भ धारण नहीं कर सकतीं।
- अकसर यदि नाभि बिलकुल नीचे रीढ़ की तरफ चली जाती है तो फैलोपियन ट्यूब नहीं खुलती और इस कारण स्त्रियाँ गर्भधारण नहीं कर सकतीं। कई वंध्या स्त्रियों पर प्रयोग कर नाभि को मध्यमा स्तर पर लाया गया। इससे वंध्या स्त्रियाँ भी गर्भधारण योग्य हो गईं। कुछ मामलों में उपचार वर्षों से चल रहा था एवं चिकित्सकों ने यह कह दिया था कि यह गर्भधारण नहीं कर सकती किन्तु नाभि-चिकित्सा के जानकारों ने इलाज किया।
- दोनों हथेलियों को आपस में मिलाएं। हथेली के बीच की रेखा मिलने के बाद जो उंगली छोटी हो यानी कि बाएं हाथ की उंगली छोटी है तो बायीं हाथ को कोहनी से ऊपर दाएं हाथ से पकड़ लें। इसके बाद बाएं हाथ की मुट्ठि को कसकर बंद कर हाथ को झटके से कंधे की ओर लाएं। ऐसा ८-१० बार करें। इससे नाभि सेट हो जाएगी।
- पादांगुष्ठनासास्पर्शासन उत्तानपादासन , नौकासन , कन्धरासन , चक्रासन , धनुरासन आदि योगासनों से नाभि सही जगह आ सकती है .
- 15 से 25 मि .वायु मुद्रा करने से भी लाभ होता है .
- दो चम्मच पिसी सौंफ, ग़ुड में मिलाकर एक सप्ताह तक रोज खाने से नाभि का अपनी जगह से खिसकना रुक जाता है।
किशोरावस्था में आप अक्सर उस व्यक्ति की कल्पना करने लगते हैं जिन्हें आप पसंद करते हैं। यह कोई भी हो सकते हैं,एक लड़का या लड़की, एक मित्र, कोई जिन्हें आप जानते हों, या यहाँ तक की आपके स्कूल के शिक्षक या कोई फिल्म अभिनेता या कोई पॉपस्टार। और आप स्वयं को किसी ऐसे व्यक्ति के बारे में कल्पना करते हुए भी पा सकते हैं जो आपके ही लिंग के हों।
यदि आप अपने आप को किसी ऐसे व्यक्ति के प्यार में पाते हैं जो आपके ही लिंग के हैं और आपको लगता है की आप उनके साथ सेक्स करना चाहते हैं तो सम्भवतः आप समलैंगिक पुरुष या महिला या द्वीलैंगिक हैं।
यदि आप समलैंगिक हैं तो आप अपने ही लिंग के व्यक्ति की आकर्षित ओर होते हैं। समलैंगिक पुरुष अक्सर गे कहलाते हैं और समलैंगिक महिलाएं लेस्बियन। यदि आप पुरुष एवं महिलाओं दोनों की ओर आकर्षित होते हैं तो आप द्वीलैंगिक हैं। और यदि आप विपरीत लिंग वाले लोगों की ओर आकर्षित होते हैं तो आप विषमलैंगिक हैं।
कुछ लोगों के लिए - विशेषकर लड़कियों के लिए - यौनिकता इन सभी पहचानों में से कोई एक या दूसरी नहीं होती है बल्कि वह एक किस्म के पैमाने (स्केल) पर सरकती रहती है। आप अपने आप को समलैंगिक पुरुष या समलैंगिक महिला नहीं मानते हैं फिर भी आप अपने लिंग के व्यक्ति के प्रति आकर्षित हो सकते हैं।
यदि आपके बॉयफ्रेंड या गर्लफ्रेन्ड आपके प्रति ईमानदार नहीं हैं तो यह बात आपको सदमा पहुँचाने वाली हो सकती है। यदि एक साथी को यह पता चल जाता है की दूसरे साथी उनके प्रति ईमानदार नहीं हैं तो आमतौर पर यह एक बहुत ही तीव्र, भावनात्मक एवं गुस्से भरे विवाद की ओर अग्रसर होने लगता है।
आप इस रिश्ते का अन्त करने का निश्चय कर सकते हैं। पर आप इस बात पर भी सहमत हो सकते हैं की हालांकि, एक व्यक्ति ने गलती की है पर आप अपने रिश्ते को इतनी एहमियत देते हैं की आप इस रिश्ते में फिर भी रह सकते हैं। ऐसी स्थिति में यह उम्मीद न करें की चीज़ें तुरन्त पहले की तरह सामान्य हो जाएगीं। पुनः विश्वास हासिल करने में थोड़ा समय लगता है।
ईर्ष्या की भावना हर किसी को कभी न कभी ईर्ष्या की भावना होती है, विशेषकर तब जब आप किसी के प्यार में हैं। ईर्ष्या का मुख्य कारण असुरक्षा की भावना है। आप स्वयं के लिए एवं अपने रिश्ते के लिए असुरक्षित महसूस करते हैं। और ईर्ष्या से बर्ताव करते हुए आप दूसरे व्यक्ति को दिखाना चाहते हैं की आप अन्य किसी भी व्यक्ति से ज़्यादा महत्वपूर्ण हैं।
दूसरे व्यक्ति पर हक जताना या पज़ेसिव होना कभी कभी ईर्ष्या बहुत गम्भीर रुप ले लेती है। एक साथी इतनी ईर्ष्या करने लगते हैं की दूसरे साथी को लगता है की वे अब कुछ और कर ही नहीं सकते। केवल एक नज़र या एक शब्द या अन्य किसी व्यक्ति के लिए थोड़ा सा भी ध्यान, ईर्ष्या की चिंगारी को बढ़ा सकता है।
यदि आपको लगता है की आप ऐसा महसूस कर रहे हैं तो अपने साथी से इस बारे में बात करने की कोशिश करें और उन्हें समझाएं की आप ऐसा क्यों महसूस करते हैं। और यदि आपके साथी ईर्ष्या करते हैं तो याद रखें की यह सामान्यतः असुरक्षा की भावना के कारण होता है। पता लगाने की कोशिश करें की किस वज़ह से वे असुरक्षित महसूस करते हैं और उनके मानसिक तनाव को कम करने की कोशिश करें। इस समस्या का एक ही समाधान है, आपस में बात करना।
रिश्ते का अन्त करना कुछ लोग किसी एक व्यक्ति से रिश्ता बनाते हैं, उनसे शादी करते हैं और सारा जीवन साथ रहते हैं। पर वास्तव में यह एक अप्राकृतिक मानव व्यवहार है। ज़्यादातर रिश्ते एक समय पर आकर खत्म हो जाते हैं।
क्या आप रिश्ते का अन्त करना चाहते हैं ?
अपने साथी को बताने का समय चुनें। उन पर चिल्लाएं नहीं या उनका अपमान न करें। कोशिश करें की आप सारा दोष अपने साथी को न दें - आम तौर पर कहानी के दो पहलू होते हैं, यदि किसी रिश्ते में कोई समस्या होती है, तो और इसमें दोनों साथियों का योगदान होता है। सिर्फ अपने साथी पर उंगली उठाने की बजाय, यह समझाने की कोशिश करें की आपको इस रिश्ते में क्या समस्या है।
क्या किसी और ने आपसे रिश्ता खत्म किया है ?
यदि आप किसी से प्यार करते हैं और वे आपसे रिश्ता खत्म कर लेते हैं तो बहुत बुरा लगता है। आप यह स्वीकार नहीं करना चाहते हैं की सब खत्म हो गया है। आप को दुख लग सकता है या गुस्सा आ सकता है। अस्वीकृत किया जाना दुख देता है। पर यदि आपका रिश्ता खत्म हो जाता है तो इसका मतलब यह नहीं है की आप एक व्यक्ति के रुप में असफल हो गए हैं। यह विश्वास करना कठिन लग सकता है पर समय के साथ आप फिर से बेहतर महसूस करने लगेंगें।
प्यार से जुड़ी चिंताएँ
यदि आप अपने रिश्ते को लेकर चिंतित हैं तो इसे अपने तक न रखें। इसके बारे में बात करें, प्राथमिक रुप से अपने साथी से। यदि आप परेशानियों को दिल में बंद कर के रखेंगें, तो आम तौर पर ये और तकलीफ़ दे सकतीं हैं। यदि आपको अपने साथी से बात करने की हिम्मत नहीं पड़ रही है तो किसी ऐसे व्यक्ति को तलाषें जो आपके नज़दीकी हों और आप उन पर विश्वास करते हों - जैसे आपके कोई अच्छे दोस्त, आपके बहन या भाई, माता या पिता।