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Monday, 7 November 2011

इन शालग्राम शिलाओं को सिर्फ छूने से ही होता ये चमत्कार..!

आज देवउठनी एकादशी है। पौराणिक मान्यता के मुताबिक यह जगतपालक भगवान विष्णु के शयन से जागने की शुभ घड़ी है। इसी तरह यह तिथि विष्णु स्वरूप शालग्राम व तुलसी विवाह का मंगलकारी अवसर भी है।

पुराण प्रसंग के मुताबिक शंखचूड़ जैसी दानवी शक्तियों से मुक्ति और जगत कल्याण के लिए ही भगवान विष्णु को शालग्राम शिला का स्वरूप प्राप्त हुआ। यही नहीं दानव राज की पत्नी तुलसी ने श्री विष्णु कृपा के साथ देव वृक्ष तुलसी व गण्डकी नदी का रूप प्राप्त किया। इसलिए गण्डकी नदी और उसके आस-पास पाए जानी वाली शालग्राम शिलाएं बहुत ही पुण्यदायी मानी गई है। साथ ही विष्णु और तुलसी का किसी भी स्थान पर होना सुख-समृद्धि देने वाला माना जाता है।

नारायण स्वरूप यही शालग्राम शिलाएं इस पर बनने वाले चक्र के आधार पर विष्णु के अलग-अलग रूप व अवतारों के नाम वाली होती हैं, जो इतनी चमत्कारी भी मानी गई है कि इनकी पूजा ही नहीं बल्कि छूने मात्र से बड़े से बड़े पापों का अंत हो जाता है। जानते हैं कि ऐसी ही विलक्षण शालग्राम शिलाओं का स्वरूप कैसा होता है?

मत्स्य - कमल के आकार वाली शिला।

कूर्म - नीले रंग, तीन रेखा और बिन्दुओं से अंकित शिला।

ह्ययग्रीव शिला - जिस शिला पर पांच रेखाएं व अंकुश का आकार हो।

नृसिंह - जिस शिला के बीच गदा जैसी रेखा, नाभिचक्र और फैले हुए वक्षस्थल का आकार दिखाई दे।

वामन - छोटी और गोलाकार शिला।

वाराह - विषम आकार व बीच में दो चक्रों के चिन्ह वाली शिला।

कृष्ण - गोलाकार और पीछे की ओर का हिस्सा झुका हुआ हो।

दामोदर - नीले रंग व बीच में भी नीले रंग के च्रकवाली शिला।

अनन्तक - अनेक रंग, रूप व जिस पर नाग जैसे फण अंकित हो।

लक्ष्मीनारायण - दो चक्रों वाली शिला।

इसी प्रकार शंख, गदा, पद्म चिन्हों और चक्र अंकित शालग्राम शिलाएं विष्णु के अनेक नामों से जानी जाती है। जिनकी पूजा हर तरह से मंगल व कल्याण करने वाली मानी जाती है।