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Thursday, 7 February 2013

कर्पूरगौरं करुणावतारं

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कर्पूरगौरं करुणावतारं
संसारसारं भुजगेन्द्रहारम् |
सदा वसन्तं हृदयारविन्दे
भवं भवानीसहितं नमामि ||
भावार्थ:- उन परमेश्वर स्वरूपी शिव संग भवानीको मेरा नमन है जिनका वर्ण कर्पूर समान गौर है, जो करुणाके प्रतिमूर्ति हैं, जो सारे जगतके सार हैं, जिन्होने गलेमें सर्पके हार धारण कर रखे हैं और जो हमारे हृदय रूपी कमलमें सदैव विद्यमान रहते हैं |
Karpoor gauram karunaawataram
sansar saaram bhujgendra haaram
sadavasantam hrudayaaravinde
bhawam bahawani sahitam namami
I salute to that Shiv form of Almighty along with Bhavani (Shiva and Parvati), who is as white as camphor, an incarnation of compassion,
the essence of this world, who wears a serpant around
his neck and is ever present in the lotus abode of our hearts.