समय रहते शादी कर लेनी चाहिये

 पति की ज़रूरत सिर्फ़ संभोग सुख प्राप्त करने के लिए ही है, लेकिन आज के समय में उसके लिए भी उपाय बाज़ार में उपलब्ध है "मैं शादी नहीं करना चाहती। मैं पढ़ी-लिखी हूँ, आत्मनिर्भर हूँ, और मुझे किसी पति की ज़रूरत नहीं है। लेकिन मेरे माता-पिता बार-बार कहते हैं कि मुझे शादी करनी चाहिए। मुझे क्या करना चाहिए?" मैंने मनोचिकत्स्क से ये सवाल पूछा

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मनोचिकित्सक ने कहा, "तुम जीवन में बहुत कुछ करोगी। लेकिन कभी-कभी ऐसा भी होगा कि चीजें तुम्हारी सोच के मुताबिक़ नहीं होंगी, या कुछ गलत हो जाएगा। कभी तुम असफल हो जाओगी, या तुम्हारी इच्छाएँ पूरी नहीं होंगी। ऐसे समय में तुम किसे दोष दोगी? क्या तुम खुद को दोषी ठहराओगी?"

महिला ने कहा, "नहीं, कभी नहीं!"

मनोचिकित्सक ने हंसते हुए कहा, "इसीलिए तुम्हें एक पति की ज़रूरत है, ताकि जब भी तुम्हारा मन खराब हो, तुम उस पर सारा दोष डाल सको और खुद को अच्छा महसूस कर सको।"

इस मज़ेदार बातचीत में एक गंभीर बात छिपी है कि पति का जीवन में क्या महत्व होता है। पति और परिवार से जीवन पूरा होता है। शादी के बाद मातृत्व का आनंद मिलता है और परिवार बढ़ता है। बच्चों के साथ अगली पीढ़ी का निर्माण होता है, जो एक पारिवारिक और सामाजिक प्रक्रिया है।

जवानी में तुम्हारे शरीर की चाहत में बहुत से लोग तुम्हारे नख़रे उठा लेंगे, सेवा भी करेंगे लेकिन तब क्या जब तुम 50 साल की हो जाओगी और तुम्हारे आस पास कोई नहीं होगा, ऐसे समय में पति की ज़रूरत पड़ती है,

समय के साथ, सुंदरता और जवानी कम हो जाती है। उस समय तुम्हारा साथ देने वाला तुम्हारा पति और परिवार ही होता है। पति तुम्हारी रक्षा करता है और तुम्हें जीवन में हर सुविधा देता है। माता-पिता के बाद, पति और बच्चे ही वे रिश्ते होते हैं जिन पर तुम पूरी तरह से भरोसा कर सकती हो, इस उम्मीद के साथ की बुढ़ापे में तुम्हारा अपना कोई होगा,

असल में, पति सिर्फ दोष देने के लिए नहीं होता, बल्कि जीवनभर का साथी होता है, जो हमेशा तुम्हारा साथ देता है और तुम्हारी सुरक्षा और देखभाल करता है।

मुझे गहराई से बात समझ में आयी और कुछ समय बाद शादी की,

आप को किसी से प्यार हो या ना हो, लेकिन जब एक ही कमरे में किसी विपरीत लिंग के साथ आप एक बिस्तर पर सोते हैं, एक साथ खाना खाते है और एक घर में रहते हैं, तो आप को उससे प्रेम भी हो जाटा है

और ऐसे पुरुष के साथ संभोग का आनंद दसगुना हो जाता है,क्यों की आप को पता है कि ये वही इंसान है जिसके ऊपर आप कोई भी दोष डाल सकती है, और वो आप को छोड़ के कही नहीं जाएगा, पति पत्नी का रिश्ता ऐसा ही होता है

मेरी मित्रमंडली में कई ऐसी लड़किया थी, जिन्हें मेरी तरह शादी नहीं करनी थी, ऊपर से तो वो खुश और स्वतंत्र लगती है, लेकिन अंदर से उतनी ही दुखी

इस लिये समय रहते शादी कर लेनी चाहिये

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मानवता और राष्ट्र रक्षा: प्रेरणादायक कहानी II BEST MOTIVATIONAL STORY IN HINDI


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मानवता और राष्ट्र रक्षा: प्रेरणादायक कहानी - 
छोटे से गाँव सत्यपुर में लोग सादगी और प्रेम से भरा जीवन जीते थे। यह गाँव एकता और सद्भाव का प्रतीक था, जहाँ सभी एक बड़े परिवार की तरह रहते थे। लेकिन एक दिन, गाँव के बाहर कुछ अजनबी लोग आकर बस गए।

वे अजनबी मीठी बातें करते थे और दिखने में मित्रवत लगते थे, लेकिन उनके इरादे खतरनाक थे। उन्होंने धीरे-धीरे गाँव में नफरत, लालच और झूठ का जहर फैलाना शुरू कर दिया। वे धर्म, जाति और भाषा के नाम पर गाँववालों को बाँटने की साजिश रच रहे थे।

गाँव के बुजुर्ग, रामनाथ जी, एक समझदार और अनुभवी व्यक्ति थे। उन्होंने इस खतरे को भाँप लिया और देखा कि यह गाँव की एकता और मानवता को खत्म कर सकता है। उन्होंने गाँव के होशियार और साहसी युवक आर्यन को बुलाया।

रामनाथ जी ने आर्यन से कहा, "बेटा, हमारी सबसे बड़ी ताकत हमारी मानवता और हमारे देश के प्रति प्रेम है। अगर हम समय पर नहीं चेते, तो ये लोग हमारे गाँव को तबाह कर देंगे।"

आर्यन ने गाँव के युवाओं को इकट्ठा किया और कहा, "हमें इन लोगों की साजिशों को नाकाम करना होगा। मानवता और राष्ट्र प्रेम हमारी सबसे बड़ी ताकत है, और हमें इन्हीं के सहारे इन चुनौतियों का सामना करना होगा।"

युवाओं ने गाँव में जागरूकता अभियान चलाया। उन्होंने शिक्षा, सांस्कृतिक कार्यक्रम और सामुदायिक चर्चाओं का आयोजन किया। उन्होंने गाँववालों को समझाया कि बाहरी लोग उन्हें धर्म, जाति और भाषा के नाम पर बाँटने की कोशिश कर रहे हैं।

एक दिन, उन अजनबियों ने गाँव में दंगा भड़काने की कोशिश की। उन्होंने अफवाहें फैलाईं और गाँववालों को आपस में लड़ाने का प्रयास किया। लेकिन आर्यन और गाँववाले तैयार थे। उन्होंने संयम, सहयोग और समझदारी से समस्या का समाधान किया।

उनकी साजिश नाकाम हो गई, और अजनबी गाँव छोड़कर चले गए। सत्यपुर में फिर से शांति और प्रेम का वातावरण बन गया।

रामनाथ जी ने आर्यन और गाँववालों की प्रशंसा करते हुए कहा, "जब तक हमारी मानवता और राष्ट्र के प्रति प्रेम जीवित है, हमें कोई ताकत नहीं हरा सकती। हमारी एकता ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है।"

सत्यपुर की यह कहानी पूरे देश में फैल गई और मानवता तथा एकता का प्रतीक बन गई।

संदेश:
जब भी मानवता और राष्ट्र के प्रति संकट आए, हमें एकजुट होकर खड़ा होना चाहिए। प्रेम, समझदारी और सहयोग से हम किसी भी चुनौती का सामना कर सकते हैं और मानवता तथा राष्ट्र की रक्षा कर सकते हैं।

 

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