सनातनी हिंदूओं को जागरूक करने के लिए संदेश

 

सनातनी हिंदूओं को जागरूक करने के लिए संदेश

सनातनी हिंदूओं को जागरूक करने के लिए संदेश

प्रिय सनातनी भाई और बहनों,

हम सब सनातन धर्म के अनुयायी हैं, जो केवल एक धर्म बल्कि जीवन जीने का तरीका है। हमारी संस्कृति, परंपराएँ, और जीवनशैली हमें सिखाती हैं कि हम केवल खुद को बल्कि समाज को भी सत्य, अहिंसा, प्रेम और ज्ञान से अभिभूत करें। आज जब समाज में विकृतियाँ और भ्रम फैलाए जा रहे हैं, हमें अपने धर्म की मूल बातें समझने और उसे अपनाने की आवश्यकता है। यही समय है जब हमें अपने समाज को एकजुट करने के लिए कदम उठाने होंगे, ताकि हम अपने राष्ट्र को सुरक्षित, समृद्ध और प्रगतिशील बना सकें।

1. जाति-पाती मुक्त समाज का महत्व

सनातन धर्म का मूल तत्व है "एकता में शक्ति" और यह संदेश हमें जाति, पाती, रंग या रूप के भेदभाव से ऊपर उठकर एकजुट होने की प्रेरणा देता है। हमारे समाज में जातिवाद की नींव बहुत पुरानी है, लेकिन हमें यह समझना होगा कि जातिवाद सनातन धर्म के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। जाति-पाती के भेदों ने समाज को कई हिस्सों में बाँट दिया है और यही कारण है कि हम अपने समाज में एकता और अखंडता नहीं देख पा रहे हैं।

यदि हम अपने समाज को वाकई में एकजुट और मजबूत बनाना चाहते हैं, तो हमें जातिवाद, संप्रदायवाद और भेदभाव को समाप्त करना होगा। हमें यह मानना होगा कि हम सभी भारतीय हैं, चाहे हमारी जाति कुछ भी हो, हमारा धर्म एक ही है, और हम सभी एक ईश्वर के भक्त हैं। एक जाति-पाती मुक्त समाज में ही सनातन हिंदू एकता का सपना पूरा हो सकता है। जब हम सब मिलकर एक लक्ष्य के लिए काम करेंगे, तभी हम अपने राष्ट्र को मजबूत बना सकेंगे।

2. धर्म और समाज का समन्वय

सनातन धर्म केवल व्यक्तिगत भक्ति और पूजा तक सीमित नहीं है, यह समाज के हर पहलू को प्रभावित करता है। हमें अपने धर्म को केवल मंदिरों और धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि हमें इसे अपने समाज के हर पहलू में लागू करना होगा। हम तब ही सफल होंगे, जब हम समाज में जाति-पाती के भेदभाव को समाप्त करेंगे और एक दूसरे के प्रति समान सम्मान और प्रेम दिखाएंगे। जब समाज में जातिवाद, असहमति और भेदभाव का कोई स्थान नहीं होगा, तभी हम अपने सामाजिक और धार्मिक एकता की असली ताकत को महसूस कर सकेंगे।

3. हमारी शक्ति एकजुटता में है

अगर हम सनातनी हिंदूओं को एकजुट कर लेते हैं तो केवल हमारी धार्मिकता मजबूत होगी, बल्कि हम समाज में भी सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। यह सच है कि अगर हम सभी एकजुट हो जाते हैं तो हमारी शक्ति कई गुना बढ़ जाती है। सनातन धर्म में कर्म, धर्म और भक्ति की जो शिक्षा दी गई है, यदि हम उसे अपनी जिंदगी में लागू करें, तो केवल हमारा व्यक्तिगत जीवन सफल होगा, बल्कि समाज भी सशक्त बनेगा। हमें यह समझने की आवश्यकता है कि हम सभी का उद्देश्य एक ही हैपरमात्मा के प्रति श्रद्धा और समाज की सेवा।

4. आध्यात्मिक और सामाजिक उन्नति की दिशा

हमारे समाज में आज भी बहुत से लोग गरीब हैं, अशिक्षित हैं और समाज के मुख्यधारा से बाहर हैं। हमें यह समझना होगा कि किसी की जाति, पाती, धर्म या आर्थिक स्थिति को देखकर किसी को भी नीचा नहीं समझना चाहिए। हमारा धर्म हमें सर्वजन सुखाय, सर्वजन हिताय का संदेश देता है। हमें अपनी शक्ति का उपयोग समाज के कमजोर वर्गों की मदद करने के लिए करना चाहिए, ताकि हम एक सशक्त और समान समाज का निर्माण कर सकें।

धर्म का पालन करते हुए हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हम सभी अपने परिवारों और समुदायों में समानता और भ्रातृत्व की भावना का प्रचार करें। जातिवाद को समाप्त करने के लिए हम अपने बच्चों को बचपन से यह सिखाएं कि सभी इंसान समान हैं और किसी भी प्रकार का भेदभाव हमारी संस्कृति के खिलाफ है। जब हम जातिवाद को समाप्त करेंगे, तब ही हमारी धार्मिक और सामाजिक एकता का सही अर्थ समझ में आएगा।

5. देश की सुरक्षा और समृद्धि के लिए एकता आवश्यक है

सनातन धर्म का पालन करना और जातिवाद से मुक्त समाज की स्थापना करना केवल हमारे व्यक्तिगत विकास के लिए नहीं है, बल्कि इससे देश की सुरक्षा और समृद्धि भी सुनिश्चित होगी। जब हम एकजुट होंगे और किसी प्रकार के भेदभाव को समाप्त करेंगे, तो हमारी एकता हमें हर संकट का सामना करने के लिए मजबूती देगी। एकता में ही राष्ट्र की शक्ति निहित है। अगर हम सभी सनातनी भाई-बहन एकजुट होकर अपने धर्म, समाज और राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का पालन करेंगे, तो हम केवल अपने व्यक्तिगत जीवन में बल्कि राष्ट्र की सुरक्षा में भी योगदान दे सकेंगे।

6. क्या हमें तैयार रहना चाहिए?

आज के समय में समाज में बढ़ते असहमति और भेदभाव को समाप्त करने के लिए हमें अपने आप को तैयार करना होगा। हमें समझना होगा कि अगर हम एक जाति-पाती मुक्त समाज का निर्माण करते हैं तो यह हमारे देश के लिए भी बेहतर होगा। हमें अपने धर्म, अपने समाज और अपने राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी निभानी होगी। हम हर कदम पर एकता का संदेश फैलाने के लिए काम कर सकते हैं, चाहे वह हमारे परिवार में हो या समाज में।

निष्कर्ष

प्रिय सनातनी भाई-बहनों, यह समय है जब हमें जातिवाद और भेदभाव को समाप्त करके एकजुट होने का संकल्प लेना होगा। केवल तब ही हम सनातन हिंदू एकता को मजबूत कर सकते हैं और अपने समाज तथा राष्ट्र को एक नई दिशा दे सकते हैं। जब हम एकजुट होंगे, तब हम सभी के साथ मिलकर अपने देश को एक शक्तिशाली और सुरक्षित स्थान बना सकते हैं। हमारे लिए यह समय जागरूक होने का है और अपने धर्म की सच्चाई को केवल अपने जीवन में अपनाने का, बल्कि समाज में फैलाने का भी है।

जय श्रीराम! जय हिंद!

 

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रिश्तों और जिम्मेदारियों का सम्मान करना चाहिए

 पत्नी को अगर उसकी जरूरत जितना सम्भोग का सुख ना मिले तो रिश्ते में दरार आने में देर नहीं लगती 


रिश्तों और जिम्मेदारियों का सम्मान करना चाहिए


नंदिनी, जो पहले से शादीशुदा थी, अक्सर अमन के पास अपनी बातों को साझा करने आती थी। शुरुआत में उनकी बातचीत सामान्य थी, लेकिन धीरे-धीरे नंदिनी के व्यवहार में बदलाव आने लगा। उसने अमन से अपनी निजी जिंदगी के बारे में बातें करना शुरू कर दिया।

एक दिन, नंदिनी ने अमन से कहा, "मुझे ऐसा लगता है कि मेरी शादीशुदा जिंदगी अब पहले जैसी नहीं रही। मैं अपने पति के साथ वह जुड़ाव महसूस नहीं करती जो पहले करती थी।"

अमन को नंदिनी की बातों से थोड़ी चिंता हुई, लेकिन उसने इसे दोस्ती के नाते समझा और उसकी भावनाओं का सम्मान किया। नंदिनी अक्सर अमन के पास बैठकर अपनी परेशानियों को साझा करती, और अमन एक अच्छे दोस्त की तरह उसे सुनता। लेकिन कुछ समय बाद, नंदिनी के इशारे बदलने लगे।

अब, नंदिनी ने अमन की ओर एक अलग नजरिए से देखना शुरू किया। उसकी नजरों में एक अनकहा आकर्षण झलकने लगा था। वह अमन के साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताने की कोशिश करने लगी। अमन इस बदलाव को महसूस कर रहा था, लेकिन वह इसे अनदेखा करने की कोशिश कर रहा था।

एक दिन, जब दोनों काम के बाद अकेले में थे, नंदिनी ने अमन से कहा, "तुम्हारे साथ वक्त बिताकर मुझे बहुत सुकून मिलता है। मैं अपने पति के साथ अब वह जुड़ाव महसूस नहीं करती।"

उसकी आँखों में एक अनकही चाहत थी, और अमन को समझते देर नहीं लगी कि नंदिनी उससे क्या चाह रही थी।

अमन के दिल और दिमाग में एक संघर्ष शुरू हो गया। नंदिनी की भावनाओं को देखकर वह असहज हो गया। उसने खुद से सवाल किया, "क्या मैं इस स्थिति में सही हूँ? नंदिनी तो शादीशुदा है, और मैं उसके रिश्ते में दखल क्यों दूँ?"

अमन ने नंदिनी से सीधे बात की। उसने कहा, "नंदिनी, मैं तुम्हारी भावनाओं की कद्र करता हूँ, लेकिन हमें अपने रिश्ते की सीमाओं को समझना होगा। तुम्हारा पति और तुम्हारी शादीशुदा जिंदगी का सम्मान करना बहुत जरूरी है। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि हमारे किसी भी गलत कदम से तुम्हारे परिवार पर गहरा असर पड़ सकता है।"

नंदिनी ने अमन की बात ध्यान से सुनी। उसकी आँखों में निराशा थी, लेकिन उसने महसूस किया कि अमन सही कह रहा था। वह जानती थी कि इस रास्ते पर चलने से न केवल उसके परिवार को चोट पहुँच सकती है, बल्कि अमन के साथ उसकी दोस्ती भी बर्बाद हो सकती है।

उस दिन के बाद, नंदिनी ने अमन से दूरियां बनाना शुरू कर दीं। दोनों ने यह समझ लिया कि उनके बीच जो कुछ भी था, वह केवल एक अनकहा आकर्षण था। लेकिन उस आकर्षण को सही दिशा में ले जाना जरूरी था।

इस अनुभव ने अमन को सिखाया कि भावनाओं पर काबू पाना कितना जरूरी है। चाहे दिल की चाहत कितनी भी गहरी क्यों न हो, सही और गलत का फर्क समझना अनिवार्य है।

यह कहानी हमें यह सिखाती है कि हमें दूसरों के रिश्तों और जिम्मेदारियों का सम्मान करना चाहिए। हमारे किसी भी गलत कदम से किसी की शादीशुदा जिंदगी या परिवार पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है। सही फैसले और नैतिकता को प्राथमिकता देना ही सच्ची समझदारी है। 🌹

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कैंसर कोई खतरनाक बीमारी नहीं है! Cancer is not a dangerous disease!

 कैंसर कोई खतरनाक बीमारी नहीं है!  डॉ. गुप्ता कहते हैं, लापरवाही के अलावा कैंसर से किसी की मौत नहीं होनी चाहिए। (1). पहला कदम चीनी का सेवन बंद करना है। आपके शरीर में चीनी के बिना, कैंसर कोशिकाएं स्वाभाविक रूप से मर जाती हैं।  (2). दूसरा कदम यह है कि एक कप गर्म पानी में नींबू का रस मिलाएं और इसे सुबह भोजन से पहले 1-3 महीने तक पिएं और कैंसर खत्म हो जाएगा। मैरीलैंड मेडिकल रिसर्च के अनुसार, गर्म नींबू पानी कीमोथेरेपी से 1000 गुना बेहतर, मजबूत और सुरक्षित है। (3). तीसरा कदम है सुबह और रात को 3 बड़े चम्मच ऑर्गेनिक नारियल तेल पिएं, कैंसर गायब हो जाएगा, आप चीनी से परहेज सहित अन्य दो उपचारों में से कोई भी चुन सकते हैं। अज्ञानता एक बहाना नहीं है। अपने आस-पास के सभी लोगों को बताएं, कैंसर से मरना किसी के लिए भी अपमान है; जीवन बचाने के लिए व्यापक रूप से साझा करें।

Cancer is not a dangerous disease!


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कंजूसी और बचत को आप किस तरह देखते हैं

 चाची बहुत समझदार महिला थी। पूरे घर का संचालन चाची ही करती थी। घर खर्च का पूरा हिसाब चाची ही रखती थी।

लेकिन चाची को सब कंजूस चाची कहा करते। पैसे खर्च करने में बहुत कंजूसाई करती। चप्पल टूट गई तो कील ठोक कर चलाती रहती। घर खर्च में भी हमेशा ख्याल रखती कि पैसे कहाँ और कैसे बचें।

एकदिन भतीजे अनुज ने पूछ ही लिया-" चाची! सब आपको कंजूस कहते हैं आपको बुरा नहीं लगता?"

चाची बोली-" नहीं बुरा क्यों लगेगा? मैं हूँ ही कंजूस। लेकिन क्यों हूँ यह कभी समय आया तो मालूम होगा।"

एकदिन सास की तबीयत अचानक बिगड़ गई। उन्हें अस्पताल ले गए। डाक्टर ने कहा-" हृदय रोग है। ओपरेशन करना होगा। हम टेस्ट और ओपरेशन की तैयारी करते हैं, आपलोग काउंटर पर पैसे जमा करवा दीजिए।"

सब आपस में चर्चा करने लगे की पैसे की व्यवस्था कैसे होगी? कहां से होगी? कौन करेगा ?

काउंटर से बार बार आवाज लगाई जा रही थी जल्दी पैसे जमा कराए ताकि ऑपरेशन जल्दी शुरू किया जा सके।

सब घबराए हुए थे किसी को कुछ समझ नहीं आ रहा था। बात हो ही रही थी कि चाची का फोन अनुज के पास आया और चाची ने पूछा-" डाक्टर ने क्या कहा?"

अनुज ने कहा-" ओपरेशन करना होगा। अभी तत्काल पैसे जमा करवाने होंगे। पापा पैसों के इन्तजाम के लिए निकल रहे हैं।"

चाची ने कहा-" उन्हें वहीं रोको, मैं आ रही हूँ।"

कुछ ही देर में चाची वहाँ अस्पताल पहुँच गई और अपने पर्स से नोटों का बँडल निकालकर पूछा-" बतलाओ कितने पैसे भरने हैं?" इतने पैसे देखकर सब आश्चर्यचकित हो गए।

चाची ने अनुज को बुलाकर कहा-" बेटा! इन्हीं दिनों के लिए मैं कंजूसाई करती थी। जीवन है, न जाने कब जरुरत पड़ जाए। तुम जिसे कंजूसाई कहते हो मैं उसे बचत कहती हूँ।"

चाची ने पुनः कहा-" बेटा! जिसने बचत करना सीख लिया उसे मुसीबत में हाथ नहीं फैलाने पड़ते।"

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