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Monday, 21 January 2013

युवती से शादी का हश्र भुगत रहा है वृद्ध

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सत्तर साल की आयु के एक वृद्ध को पत्नि मर जाने के बाद जब दुनिया नीरस और बेगानी दिखाई देने लगी तो उसने अपनी आयु से आधी आयु की एक विधवा महिला से शादी रचा ली। इस शादी को अब आठ साल हो गये। उसके लिए अब यह शादी एक अभिशाप बनकर रह गयी। गजरौला थाना क्षेत्र के गांव महमूदपुर सल्तानठेर का यह बूढ़ा जहां सौतेले बेटों की मार खा रहा है, वहीं कौड़ी-कौड़ी का मोहताज हो गया है। हालांकि जब उसने दूसरी शादी की थी तो उस समय वह पचास लाख रुपयों से अधिक की संपत्ति का स्वामी था। दूसरी शादी से जहां वह संपत्ति गंवा बैठा वहीं अब सौतेले बेटों से उसे बराबर जान का खतरा बना हुआ है। दूसरी बहू (43 वर्ष) उसके खिलाफ पुलिस में रिपोर्ट की तैयारी में है। अपने जीवन की सुरक्षा की गुहार को वृद्ध ने दिसंबर में थाने में तहरीर भी दी थी लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई बल्कि महिला और उसके दो बेटों ने वृद्ध पर और भी अत्याचार करने शुरु कर दिये।

  थाने में अपनी फरियाद लेकर आये 78 वर्षीय वृद्ध मुंशी पुत्र रामचंदर ने बताया,‘दस वर्ष पूर्व पत्नि की मौत हो गयी थी। मेरे कोई पुत्र नहीं था। केवल चार लड़कियां थीं जिनकी शादी हो चुकी। सभी अपने घर हैं।’

  पत्नि की मौत के एक साल बाद वृद्ध ने दूसरी शादी करने का पक्का इरादा किया। वृद्ध के अनुसार उसे किसी के माध्यम से किसी अन्य गांव की 35 वर्षीय एक विधवा महिला मिली। वह एक शर्त पर तैयार हो गयी। उसकी शर्त थी कि वृद्ध उसके नाम दस बीघा जमीन कराये। वृद्ध महिला के लिए बेचैन था। उसने भूमि लिखाकर महिला से पुनर्विवाह रचा लिया।

  वृद्ध का कहना है कि तीन साल उनके बीच बहुत मधुर प्रेम रहा। जिसके बाद उसने बताया कि उसके पहले पति से दो बेटे हैं। वह उन्हें यहां लाना चाहती है। वृद्ध के अनुसार उसने दोनों लड़के प्रेमदेव और भगवानदास जो छह वर्ष पूर्व क्रमश: 14 और 11 वर्ष के थे (आज 20 और 17 वर्ष के हैं) अपने पास बुला लिए। 

  वृद्ध का कहना है कि शादी के समय महिला ने उसे लड़कों के बारे में कुछ नहीं बताया था।

  गांव के लोग कहते हैं कि लड़कों के आने पर वृद्ध की बेटियों और दामादों ने समझा कि वृद्ध की कृषि भूमि (कुल 60 बीघा) कहीं दोनों लड़के न हथिया लें अत: उन्होंने वृद्ध से सारी भूमि बराबर-बराबर अपने नाम करा ली। वृद्ध का यह निर्णय उसके गले का फंदा बन गया।

  वृद्ध के पास ट्रैक्टर, टिलर, हैरो आदि कृषि यंत्र थे जिन्हें उसके पीछे आये बेटों प्रेमदेव और भगवानदास ने जबरन बेच दिया। वृद्ध मुंशी का कहना है कि उसे गत वर्ष से दोनों सौतेले बेटे इस लिए यातनायें दे रहे हैं कि उसने अपनी जमीन उनके बजाय अपनी बेटियों के नाम क्यों की।

  मुंशी (78) का कहना है कि उसका जीवन नारकीय बन गया है। वह पेट भर खाने के लिए भी अपनी बेटियों पर आश्रित है। कई बार प्रेमदेव और भगवानदास उसपर कातिलाना हमला कर चुके। उसका जीवन तार-तार हो चुका। वह उस दिन को कोस रहा है जिस दिन उसने राजवती से शादी रचाई थी।

  वृद्ध ने दुखी होकर गत वर्ष 18 दिसंबर को सौतेले बेटों और पत्नि के अत्याचारों से तंग आकर थाने में न्याय के लिए तहरीर दी थी। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। वृद्ध अपने एक दामाद को साथ लिए लोगों से अपने दर्द की दवा ढूंढ रहा है। और आठ वर्ष पूर्व किये अपने पुनविर्वाह की गलती का खामियाजा भी भुगत रहा है। जिस महिला को अपनी हमराह बनाकर खुशी-खुशी घर लाया था वही आज उसके लिए खतरा बन गयी है।