लक्ष्मी की सामान्य पूजा विधि व 8 सरल लक्ष्मी मंत्र

लाभ-हानि जीवन का हिस्सा है। जीवन के हर क्षेत्र में हार-जीत और खोने-पाने का सिलसिला चलता रहता है। यह सच जानते हुए भी हर व्यक्ति स्वाभाविक रूप से घाटे या नुकसान से बचने की तमाम कोशिशें करता है, किंतु कहीं न कहीं बुरे समय या किसी चूक से उसे मुश्किलों से दो-चार होना ही पड़ता है। शास्त्रों में ऐसे ही विपरीत हालात से बचने और बाहर आने के लिए देव उपासना का महत्व बताया गया है। मातृशक्ति लक्ष्मी को सभी संपत्ति, सिद्धि और ऐश्वर्य की देवी माना जाता है। इसलिए खासतौर पर जब व्यक्ति आर्थिक परेशानियों से घिर जाता है और परिवार तंगहाली या कारोबार में घाटे के दौर से गुजर रहा हो तो माता लक्ष्मी के आठ रूपों यानी अष्टलक्ष्मी की उपासना व मंत्र ध्यान आमदनी व बचत बढ़ाने वाले माने गए हैं। जानते हैं शुक्रवार के दिन लक्ष्मी की सामान्य पूजा विधि व 8 सरल लक्ष्मी मंत्र- - शुक्रवार के दिन शाम के समय स्नान कर घर के देवालय में एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर उस पर केसर मिले चन्दन से अष्टदल बनाकर उस एक मुट्ठी चावल रख जल कलश रखें। - कलश के पास हल्दी से कमल बनाकर उस पर माता लक्ष्मी की मूर्ति प्रतिष्ठित करें। - माता लक्ष्मी की मूर्ति के सामने श्रीयंत्र भी रखें। - इसके अलावा सोने-चांदी के सिक्के, मिठाई, फल भी रखें। - इसके बाद माता लक्ष्मी के आठ रूपों की इन मंत्रों के साथ कुंकुम, अक्षत और फूल चढ़ाते हुए पूजा करें- - ॐ आद्यलक्ष्म्यै नम:। - ॐ विद्यालक्ष्म्यै नम:। - ॐ सौभाग्यलक्ष्म्यै नम:। - ॐ अमृतलक्ष्म्यै नम:। - ॐ कामलक्ष्म्यै नम:। - ॐ सत्यलक्ष्म्यै नम:। - ॐ भोगलक्ष्म्यै नम:। - ॐ योगलक्ष्म्यै नम:। - इसके बाद धूप और घी के दीप से पूजा कर नैवेद्य या भोग लगाएं। - श्रद्धा भक्ति के साथ माता लक्ष्मी की आरती करें। - आरती के बाद जानकारी होने पर श्रीसूक्त का पाठ भी करें। - अंत में उपासना में हुई त्रुटि के लिए क्षमा मांग तन, मन और धन की परेशानियों को दूर करने की कामना करें।
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जूते-चप्पल काफी कम समय में ही टूट जाते हैं।

क्या आपके साथ यह समस्या होती है कि जूते-चप्पल काफी कम समय में ही टूट जाते हैं। ज्योतिष के अनुसार बार-बार जूते-चप्पल चोरी होना या खो जाना भी कुछ इशारा करता है। इनके खोने पर आर्थिक हानि तो होती है साथ ही यह शनि दोष की संभावना को भी व्यक्त करता है। क्या आप जानते हैं कि हमारे शरीर में शनि का वास पैरों में होता है। शनि ग्रह को क्रूर ग्रह माना गया है, इन्हें देवताओं में न्यायाधिश का पद प्राप्त है। सभी के अच्छे-बुरे कर्मों का फल शनिदेव ही देते हैं। ज्योतिष के अनुसार हमारे शरीर में भी सभी ग्रहों के अलग-अलग विशेष स्थान बताए गए हैं। जैसे शनि ग्रह हमारे पैरों का प्रतिनिधित्व करता है। यदि व्यक्ति के जूते-चप्पल का बार-बार टूट जाते हैं या गुम हो जाते हैं तो समझना चाहिए कि शनि उसके विपक्ष में है। कुंडली में जब शनि अशुभ स्थिति में होता है तो इस प्रकार जूते-चप्पल टूट जाते हैं। पैरों का प्रतिनिधित्व करने वाला शनि अपना अशुभ प्रभाव दिखाने के लिए ऐसा करवाता है। जब ज्यादातर ऐसा होने लगे तो समझ जाना चाहिए शनि देव आपकी बदकिस्मती की ओर इशारा कर रहे हैं। यानी समझें आपके परेशानियों भरे दिन आने वाले हैं। जब ऐसा बार-बार होने लगे तो शनि संबंधी दोषों को दूर करने के लिए विशेष उपाय करने चाहिए। साथ ही किसी ज्योतिष विशेषज्ञ को कुंडली दिखाकर आवश्यक पूजन आदि करने चाहिए। शनि से बचने के लिए सबसे सरल उपाय है कि प्रति शनिवार शनिदेव को तेल चढ़ाएं। एक कटोरी में तेल लेकर उसमें अपना चेहरा देखें और इस तेल को किसी गरीब व्यक्ति को दान करें।
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सज्जन या अच्छे लोग gentlemen or good people

हमारे आसपास दो प्रकार के लोग होते हैं एक तो सज्जन या अच्छे लोग और दूसरे हैं दुर्जन या बुरे लोग। सज्जन लोगों के साथ किसी को कोई परेशानी नहीं रहती है। जबकि दुर्जनों लोगों का साथ हमेशा ही दुख और परेशानियां देने वाला होता है। दुर्जन लोगों के लिए आचार्य चाणक्य ने कहा है कि- दुर्जनस्य च सर्पस्य वरं सर्पो न दुर्जन:। सर्पो दंशति काले तु दुर्जनस्तु पदे पदे।। अर्थात् दुर्जन और सांप दोनों ही जहरीले होते हैं फिर भी दुर्जनों की तुलना में सांप ज्यादा अच्छे होते हैं। क्योंकि सांप मौका मिलते ही केवल एक ही बार डंसता है जबकि दुर्जन लोग हर पल काटते हैं। आचार्य चाणक्य कहते हैं कि हमारे आसपास जो दुर्जन लोग हैं वे सांपों से अधिक जहरीले होते हैं और हानिकारक रहते हैं। जो लोग कपटी और नीच होते हैं उनसे दूर ही रहना चाहिए। सांप केवल तभी हमला करता है जब उसे स्वयं के प्राणों का संकट दिखाई देता है। सांप केवल एक ही बार डंसता है। इसके विपरित जो भी लोग कपटी, नीच और दुराचारी होते हैं वे सदैव दूसरों को कष्ट पहुंचाते रहते हैं। इन लोगों की वजह से कई बार निर्दोष व्यक्ति भी बड़ी परेशानियों में उलझ जाता है। कपटी इंसान हर पल समस्याएं खड़ी करते रहते हैं। इसी वजह से ऐसे लोगों सांपों से भी अधिक खतरनाक होते हैं। इन लोगों से दूर रहने में ही भलाई होती है।
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अंदर और बाहर की साफ-सफाई

अक्सर घर के अंदर और बाहर की साफ-सफाई पर तो ध्यान दिया जाता है लेकिन छत पर गंदगी पड़ी रहती है। वास्तु के अनुसार घर की छत पर पड़ी गंदगी का भी पैसों की तंगी को बढ़ा सकती है। परिवार की बरकत पर बुरा प्रभाव पड़ता है। यह जरूरी है कि घर की साफ-सफाई अंदर और बाहर अच्छी तरह से ही की जाना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि यदि घर की छत पर फालतू सामान, गंदगी पड़ी रहती है तो इसके दुष्प्रभाव परिवार की आर्थिक स्थिति पर पड़ते हैं। इसके साथ ही स्वास्थ्य की दृष्टि से भी हानिकारक ही है। किसी भी प्रकार की गंदगी का हमारे जीवन पर काफी गहरा प्रभाव पड़ता है। जिन लोगों के घरों की छत पर ऐसे अनुपयोगी सामान रखे होते हैं वहां नकारात्मक शक्तियां अधिक सक्रिय रहती हैं। उस घर में रहने वाले लोगों के विचार नेगेटिव अधिक रहते हैं। वे किसी भी कार्य में सकारात्मक रूप से सोच भी नहीं पाते हैं। इसी वजह से कार्यों में सफलता और तनाव मिलता है। परिवार में भी मन-मुटाव की स्थितियां निर्मित होती हैं। शास्त्रों के अनुसार धन की देवी महालक्ष्मी का वास ऐसे ही घरों में होता है जहां पूरी तरह से साफ-सफाई और स्वच्छता बनी रहती है। जहां गंदगी होती है वहां से लक्ष्मी चली जाती है और दरिद्रता का वास हो जाता है।
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सांप मोर पंख से डरते हैं सांप

सांप एक ऐसा जीव है जिसे सामने देखते ही साहसी इंसानों के भी पसीना आ जाता है। सांप का विष पलभर में ही किसी की भी जीवन लीला समाप्त कर देता है। इनके आने-जाने पर प्रतिबंध लगा पाना किसी के लिए भी काफी मुश्किल है। सांप आसानी से किसी के घर में प्रवेश कर सकते हैं। इनसे बचने के लिए शास्त्रों में ही सटीक उपाय बताया गया है। सांपों के डर को समाप्त करने के लिए सबसे अच्छा और सरल उपाय है घर में मोर पंख रखा जाए। मोर पंख घर में ऐसे स्थान पर रखें जहां से आसानी से दिखाई दे। मोर पंख की सुंदरता आपके घर की सजावट बढ़ाने का काम भी करेगी। इससे आपके घर में सांप नहीं आएंगे। मोर पंख सांपों को हमारे घर से दूर रखता है। इसके अतिरिक्त शास्त्रों में इसके कई अन्य महत्व भी बताए गए हैं। मोर पंख का संबंध भगवान श्रीकृष्ण से भी है। श्रीकृष्ण के चित्रों में देखा जा सकता है कि उनके मस्तष्क पर मोर पंख लगा रहता है। मोर पंख की उपयोगिता और पवित्रता इसी बात से बढ़ जाती है कि वह भगवान के मस्तष्क पर भी स्थान पाता है। घर में मोर पंख लगाने के बहुत सारे अन्य लाभ भी है। इसे घर में रखने से वातावरण में मौजूद नकारात्मक शक्तियां नष्ट हो जाती हैं और सकारात्मक ऊर्जा अधिक सक्रिय हो जाती है। इससे हमारी सोच पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ते हैं। सांप मोर पंख से डरते हैं क्योंकि मोर ही इसे मार कर खा जाता है। अत: सांप उस क्षेत्र में जाता है ही नहीं है जहां मोर या मोर पंख दिखाई देता है।
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कौन से पाप कौन सी सजा मिलती है। Which sins receive which punishment?

जिंदगी में सभी के अपने कायदे या सिद्धांत होते हैं। हर व्यक्ति का जीवन जीने का अपना तरीका है। जो बात किसी के लिये उसका कर्तव्य और धर्म है वह किसी के लिये घोर पाप या नीच कृत्य हो सकता है। लेकिन शास्त्रों के अनुसार जिन कर्मों को पाप माना गया है उसकी सजा उसे अपनी मृत्यु के बाद मिलती है। किस पाप की क्या सजा मिलती है। इसका वर्णन गरूड़ पुराण में कुछ इस प्रकार दिया हुआ है। गरुड़ जी बोले- भगवान जीवों को उनके कौन से पाप कौन सी सजा मिलती है। वे किन अगला जन्म किस रूप में लेते हैं व भी बताइए। भगवान कहते हैं गरूड़ ध्यान से सुनो- - ब्रह्महत्या करने वाला क्षयरोगी। - गाय की हत्या करने वाले कुबड़ा। - कन्या की हत्या करने वाला कोढ़ी। - स्त्री पर हाथ उठाने वाला रोगी। - परस्त्री गमन करने वाला नपुंसक। - गुरुपत्नी सेवन से खराब शरीर वाला। - मांस खाने व मदिरा पीने वाले के दांत काले व अंग लाल होते हैं। - दूसरे को न देकर अकेले मिठाई खाने वाले को गले का रोगी। - घमंड से गुरु का अपमान करने वाले को मिरगी। - झूठी गवाही देने वाला गूंगा। - किताब चोरी करने वाला जन्मांध। - झूठ बोलने वाला बहरा। - जहर देने वाला पागल होता है। - अन्न चोरी करने वाला चूहा। - इत्र की चोरी करने वाले छछुंदर। - जहर पीकर मरन वाले काले सांप। - किसी की आज्ञा नहीं मानते वे निर्जन वन में हाथी होते हैं। - ब्राह्मण गायत्री जप नहीं करते वे अगले जन्म में बगुला होते हैं। - पति को बुरा-भला कहने वाली जूं बनती है। - परपुरूष की कामना रखने वाली स्त्री चमगादड़ बनती है। - मृतक के ग्यारहवे में भोजन करने वाला कुत्ता बनता है। - मित्र की पत्नी से मोह रखने वाले गधा बनता है।
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जीवन की तीन मूलभूत आवश्यकताएं

जीवन की तीन मूलभूत आवश्यकताएं हैं, रोटी, कपड़ा और मकान। इन्हें पूरी करने के लिए ही सभी दिन-रात कड़ी मेहनत करते हैं लेकिन कुछ लोग इन तीनों जरूरतों को पूरा नहीं कर पाते हैं। इसी वजह से काफी लोग जो कुछ भी नहीं कर पाते हैं वे भीख मांगना शुरू कर देते हैं। आज लगभग सभी सार्वजनिक स्थानों पर बड़ी संख्या में भिखारी मौजूद रहते हैं। अक्सर ऐसा होता है कि आप किसी सार्वजनिक स्थान पर कुछ खा रहे होते हैं ठीक उसी समय कोई भिखारी आपके खाने को देखता रहता है। ऐसे में काफी लोग उसे अनदेखा करके खाना खाते रहते हैं लेकिन शास्त्रों के अनुसार ऐसी परिस्थिति में भिखारी को अनदेखा नहीं करना चाहिए। बल्कि हम जो भी खा रहे हो उसमें कुछ अंश निकालकर उसे दे देना चाहिए। यदि कोई भिखारी लगातार आपके खाने की ओर नजर लगाए खड़ा रहता है तो इससे आपको उसकी बुरी नजर लग सकती है। जिससे खाना ठीक से पचता नहीं है और पेट संबंधी बीमारी होने की संभावना रहती है। इससे बचने के लिए जब भी किसी सार्वजनिक स्थान कुछ खाए तो ध्यान रखें कि कोई भिखारी वहां न हो, या आप पर उसकी सीधी नजर न पड़े। यदि कोई भिक्षुक आपके सामने आ भी जाए तो अपने खाने में से उसे कुछ अंश अवश्य दे देना चाहिए। शास्त्रों में भिक्षुक का भी काफी महत्व बताया गया है। इन्हें खाना दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। वहीं मानवता का भी धर्म बताया गया है किसी भुखे व्यक्ति को खाना खिलाना चाहिए।
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good thoughts

माता पिता की आँखों में दो बार आंसू आते हैं. एक तब जब बिटिया पराई बनकर घर छोडती है और दूजा तब जब बेटा पत्निवश होकर घर छोड़ता है. जिनके पास धन नहीं वो गरीब नहीं हैं, गरीब तो वो है जिनके पास अथाह धन होते हुए भी उनकी इच्छाएं अतृप्त होती हैं. बिना कारण के किसी को कोई सूचन करना या किसी को सुधारने में लग जाना यह दर्शाता है की हमारे भीतर अहंकार ने जन्म ले लिया है. चंद सिक्कों के लिए.. तुम न करो काम बुरा.. हर बुराई का सदा होता है अंजाम बुरा.. जुर्म वालों की कहाँ उम्र बड़ी है यारों उनकी राहों में सदा मौत खड़ी है यारो जुल्म करने से सदा जुल्म ही हांसिल होगा जो न सच बात कहे वो कोई बुजदिल होगा सरफरोशों ने लहू देकर जिसे सींचा है ऐसे गुलशन को उजड़ने से बचा लो यारो देश के नाम अपनी जवानी लिखी यह जवानी है क्या.. जिंदगानी लिखी.. बस यहाँ तक की हमने कहानी लिखी अब लिखो.. इसके आगे की तुम दास्ताँ **************** अब लिखो.. इसके आगे की तुम दास्ताँ फ़र्ज़ कर दो अदा.. ताकि जीता रहे अपना हिंदुस्तान
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हर रिश्ता विश्वास की मजबूत नींव पर खड़ा रहता है

भक्त का भगवान से हो या इंसान का इंसान से हर रिश्ता विश्वास की मजबूत नींव पर खड़ा रहता है। किसी भी रूप में यह भरोसा कमजोर होते ही व्यक्तिगत जीवन के साथ-साथ पारिवारिक और सामाजिक रिश्तों में उथल-पुथल मच जाती है। यही कारण है कि रिश्तों में विश्वास को कायम रखने के लिए जिस सूत्र को जीवन में उतारने, अपनाने के लिए सबसे जरूरी माना गया है। वह सूत्र चरित्र, व्यक्तित्व, व्यवहार और विचार को इतना पावन बना देता है कि इंसान को शक्ति और आत्मविश्वास से भर हमेशा निर्भय रखता है। शास्त्रों में बताया यह बेजोड़ सूत्र है - सत्य को अपनाना। शास्त्रों के मुताबिक सत्य ही भगवान है। इसलिए आचरण, विचार, वाणी, कर्म, संकल्प सभी में सत्य का होना ईश्वर का जप ही है। फिर इंसान अगर देव उपासना के धार्मिक कर्मकाण्डों से चूक भी जाए तो भी वह भगवान का कृपा पात्र बना रहता है। हिन्दू धर्मग्रंथ श्रीमद्भगवद्गीता में भी सत्य की अहमियत बताते हुए लिखा गया है कि - नासतो विद्यते भावो नाभावो विद्यते सत:। सरल अर्थ है कि असत्य नाशवान होता है, बल्कि सत्य का कभी नाश नहीं होता, वह अपरिवर्तनशील है। फिर भी सांसारिक जीवन में नाशवान पदार्थोँ से इंसान मोह करता है, किंतु सत्य जैसे अमरत्व का सूत्र अपनाने में बहुत विचार और तर्क करता है। जबकि सत्य को संकल्प के साथ अपनाने की कोशिश क रे तो वह इंसान की ताकत बन जीवन में शांति व सुख लाकर प्रतिष्ठा और यश का कारण बनते हैं।
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लौंग को आयुर्वेद में बहुत उपयोगी औषधी

लौंग को आयुर्वेद में बहुत उपयोगी औषधी माना गया है। दादी और नानी के नुस्खों में इसे विशेष स्थान प्राप्त है। लौंग, जिसे कि लवांग के नाम से भी जाना जाता है, एक पेड़ की सूखी कली होती है। जो कि खुशबूदार होता है। दुनिया भर के व्यंजनों को बनाने में प्राय: लौंग का प्रयोग एक मसाले के रूप में किया जाता है। लौंग का अधिक मात्रा में उत्पादन जंजीबार और मलाक्का द्वीप में होता है। इसका उपयोग भारत और चीन में 2000 वर्षों से भी अधिक समय से हो रहा है। लौंग का उत्पादन मुख्य रूप से इंडोनेशिया, मेडागास्कर, भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका आदि देशों में होता है। आपको शायद यह जानकर आश्चर्य हो कि अठारहवीं शताब्दी में ब्रिटेन में लौंग का मूल्य उसके वजन के सोने के बराबर हुआ करता था। लौंग कार्बोहाइड्रेट, नमी, प्रोटीन, वाष्पशील तेल, वसा जैसे तत्वों से भरपूर होता है। इसके अलावा लौंग में खनिज पदार्थ, हाइड्रोक्लोरिक एसिड में न घुलने वाली राख, कैल्शियम, फास्फोरस, लोहा, सोडियम, पोटेशियम, विटामिन सी और ए भी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। आज हम आपको बताने जा रहे हैं तीखी लोंग के ऐसे ही कुछ प्रयोग जो आपके लिए लाभदायक सिद्ध हो सकते हैं। - खाना खाने के बाद 1-1 लौंग सुबह-शाम खाने से एसीडिटी ठीक हो जाती है। -15 ग्राम हरे आंवलों का रस, पांच पिसी हुई लौंग, एक चम्मच शहद और एक चम्मच चीनी मिलाकर रोगी को पिलाएं इससे एसीडिटी ठीक हो जाता है। - लौंग को गरम कर जल में घिसकर माथे पर लगाने से सिर दर्द गायब हो जाता है। - लौंग को पीसकर एक चम्मच शक्कर में थोड़ा-सा पानी मिलाकर उबाल लें व ठंडा कर लें। इसे पीने से उल्टी होना व जी मिचलाना बंद हो जाता है। - लौंग सेंककर मुंह में रखने से गले की सूजन व सूखे कफ का नाश होता है। - सिर दर्द, दांत दर्द व गठिया में लौंग के तेल का लेप करने से शीघ्र लाभ मिलता है। - गर्भवती स्त्री को अगर ज्यादा उल्टियां हो रही हों तो लौंग का चूर्ण शहद के साथ चटाने से लाभ होता है। - लौंग का तेल मिश्री पर डालकर सेवन करने से पेटदर्द में लाभ होता है। - एक लौंग पीस कर गर्म पानी से फांक लें। इस तरह तीन बार लेने से सामान्य बुखार दूर हो जाएगा। - लौंग दमा रोगियों के लिए विशेषरूप से लाभदायक है। लौंग नेत्रों के लिए हितकारी, क्षय रोग का नाश करने वाली है। - लौंग और हल्दी पीस कर लगाने से नासूर मिटता है। - चार लौंग पीस कर पानी में घोल कर पिलाने में तेज ज्वर बुखार हो जाता है। - पांच लौंग दो किलो पानी में उबालकर आधा पानी रहने पर छान लें। इस पानी को नित्य बार-बार पिलाएं। केवल पानी भी उबाल कर ठंडा करके पिलाएं। लौंग को आयुर्वेद में बहुत उपयोगी औषधी माना गया है। दादी और नानी के नुस्खों में इसे विशेष स्थान प्राप्त है। लौंग, जिसे कि लवांग के नाम से भी जाना जाता है, एक पेड़ की सूखी कली होती है। जो कि खुशबूदार होता है। दुनिया भर के व्यंजनों को बनाने में प्राय: लौंग का प्रयोग एक मसाले के रूप में किया जाता है। लौंग का अधिक मात्रा में उत्पादन जंजीबार और मलाक्का द्वीप में होता है। इसका उपयोग भारत और चीन में 2000 वर्षों से भी अधिक समय से हो रहा है। लौंग का उत्पादन मुख्य रूप से इंडोनेशिया, मेडागास्कर, भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका आदि देशों में होता है। आपको शायद यह जानकर आश्चर्य हो कि अठारहवीं शताब्दी में ब्रिटेन में लौंग का मूल्य उसके वजन के सोने के बराबर हुआ करता था। लौंग कार्बोहाइड्रेट, नमी, प्रोटीन, वाष्पशील तेल, वसा जैसे तत्वों से भरपूर होता है। इसके अलावा लौंग में खनिज पदार्थ, हाइड्रोक्लोरिक एसिड में न घुलने वाली राख, कैल्शियम, फास्फोरस, लोहा, सोडियम, पोटेशियम, विटामिन सी और ए भी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। आज हम आपको बताने जा रहे हैं तीखी लोंग के ऐसे ही कुछ प्रयोग जो आपके लिए लाभदायक सिद्ध हो सकते हैं। - खाना खाने के बाद 1-1 लौंग सुबह-शाम खाने से एसीडिटी ठीक हो जाती है। -15 ग्राम हरे आंवलों का रस, पांच पिसी हुई लौंग, एक चम्मच शहद और एक चम्मच चीनी मिलाकर रोगी को पिलाएं इससे एसीडिटी ठीक हो जाता है। - लौंग को गरम कर जल में घिसकर माथे पर लगाने से सिर दर्द गायब हो जाता है। - लौंग को पीसकर एक चम्मच शक्कर में थोड़ा-सा पानी मिलाकर उबाल लें व ठंडा कर लें। इसे पीने से उल्टी होना व जी मिचलाना बंद हो जाता है। - लौंग सेंककर मुंह में रखने से गले की सूजन व सूखे कफ का नाश होता है। - सिर दर्द, दांत दर्द व गठिया में लौंग के तेल का लेप करने से शीघ्र लाभ मिलता है। - गर्भवती स्त्री को अगर ज्यादा उल्टियां हो रही हों तो लौंग का चूर्ण शहद के साथ चटाने से लाभ होता है। - लौंग का तेल मिश्री पर डालकर सेवन करने से पेटदर्द में लाभ होता है। - एक लौंग पीस कर गर्म पानी से फांक लें। इस तरह तीन बार लेने से सामान्य बुखार दूर हो जाएगा। - लौंग दमा रोगियों के लिए विशेषरूप से लाभदायक है। लौंग नेत्रों के लिए हितकारी, क्षय रोग का नाश करने वाली है। - लौंग और हल्दी पीस कर लगाने से नासूर मिटता है। - चार लौंग पीस कर पानी में घोल कर पिलाने में तेज ज्वर बुखार हो जाता है। - पांच लौंग दो किलो पानी में उबालकर आधा पानी रहने पर छान लें। इस पानी को नित्य बार-बार पिलाएं। केवल पानी भी उबाल कर ठंडा करके पिलाएं।
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