अज्ञात unknown

यदि आप मानसिक शांति के बदले में साम्राज्य भी प्राप्त करते हैं तो भी आप पराजित ही हैं। - अज्ञात
यदि आपने अपने जीवन की महानतम सफलता को प्राप्त करने की प्रक्रिया में किसी के दिल को ठेस पहुंचाई हैं तो आपको स्वयं को सर्वाधिक असफल व्यक्ति मानना चाहिए। - अज्ञात
यदि आवश्यकता आविष्कार की जननी (माता) है, तो असन्तोष विकास का जनक (पिता) है। — अज्ञात
यदि बुद्धिमान हो, तो हँसो। — अज्ञात
यदि आपके जीवन में असफलताएं नहीं हैं, तो आप पर्याप्त जोखिम नहीं उठा रहे हैं। - अज्ञात
पुरुष से नारी अधिक बुद्धिमती होती है, क्योंकि वह जानती कम है पर समझती अधिक है। - अज्ञात
प्रतिध्वनि से किसी मौलिकता की आशा मत करो। - अज्ञात
प्रकृति, समय और धैर्य ये तीन हर दर्द की दवा हैं। - अज्ञात
प्रसिद्ध होने का यह एक दंड है कि मनुष्य को निरंतर उन्नतिशील बने रहना पड़ता है। - अज्ञात
वास्तविक महानता की उत्पत्ति स्वयं पर खामोश विजय से होती है। - अज्ञात
विश्वास हृदय की वह कलम है जो स्वर्गीय वस्तुओं को चित्रित करती है। - अज्ञात
वे ही विजयी हो सकते हैं जिनमें विश्वास है कि वे विजयी होंगे। - अज्ञात
विवेक जीवन का नमक है और कल्पना उसकी मिठास। एक जीवन को सुरक्षित रखता है और दूसरा उसे मधुर बनाता है। - अज्ञात
विफलता नहीं, बल्कि दोयम दर्जे का लक्ष्य एक अपराध है। - अज्ञात
शरीर के मामले में जो स्‍थान साबुन का है, वही आत्‍मा के सन्‍दर्भ में आंसू का है। - अज्ञात
शेष ऋण, शेष अग्नि, तथा शेष रोग पुन: पुन: बढ़ते हैं, अत: इन्‍हें शेष नहीं छोड़ना चाहिये। - अज्ञात
शुभारम्भ, आधा खतम। - अज्ञात
शारीरिक वीरता एक पाशविक प्रवृत्ति है। मनुष्य की असली वीरता तो मानसिक और नैतिक होती है। - अज्ञात
शब्द पत्तियों की तरह हैं जब वे ज़्यादा होते हैं तो अर्थ के फल दिखाई नहीं देते। - अज्ञात
डर में जीना आधा जीवित रहने जैसा है। - अज्ञात
डूबते को तारना ही अच्छे इंसान का कर्तव्य होता है। - अज्ञात
डर से भागने की बजाय अपने सपनों को साकार करने के लिए हमेशा प्रतिबद्ध रहें। - अज्ञात
धमनियों की कठोरता की तुलना में दिलों की कठोरता से लोग जल्दी बूढ़े होते हैं। - अज्ञात
धैर्यवान व्‍यक्ति ही समय पर विजय पाता है और असंयमी व्‍यक्ति अपने स्‍वभाव के कारण सब कुछ खो देता है। - अज्ञात
दरिद्र व्यक्ति कुछ वस्तुएँ चाहता है, विलासी बहुत-सी और लालची सभी वस्तुएँ चाहता है। - अज्ञात
दिमाग जब बडे-बडे विचार सोचने के अनुरूप बडा हो जाता है, तो पुनः अपने मूल आकार में नहीं लौटता। — अज्ञात
एकता का किला सबसे सुरक्षित होता है। न वह टूटता है और न उसमें रहने वाला कभी दुखी होता है। - अज्ञात
एकता का किला सबसे सुदृढ़ होता है। उसके भीतर रह कर कोई भी प्राणी असुरक्षा अनुभव नहीं करता। - अज्ञात
ऐसी अनेक घटनाएं हैं जो हम नहीं चाहते कि हों, लेकिन वे घटित होती हैं, ऐसी चीज़ें हैँ जो हम नहीं जानना चाहते, लेकिन वह सीखनी पड़ती हैं, तथा ऐसे लोग होते हैं जिनके बिना हम ज़िन्दा नहीं रहना चाहते, लेकिन वह हम से बिछुड़ जाते हैं. यह प्रकृति का स्वभाव है। - अज्ञात
ख़ाली बैठना दुनिया में सबसे थकाने वाला काम है क्योंकि सर्वस्व त्याग देना और आराम करना असंभव है। - अज्ञात
खुशी केवल उन्हीं लोगों को प्राप्त होती है जो दूसरों को खुश करने में प्रयासरत रहते हैं। - अज्ञात
भाग्य के भरोसे बैठे रहने पर भाग्य सोया रहता है पर हिम्मत बाँध कर खड़े होने पर भाग्य भी उठ खड़ा होता है। - अज्ञात
भगवान में विश्वास न रखने वाले व्यक्ति के लिए, मृत्यु एक अंत हैं; लेकिन विश्वास करने वाले के लिए यह शुरुआत है। - अज्ञात
निरंहकारिता से सेवा की कीमत बढ़ती है और अहंकार से घटती है। - अज्ञात
निडरता से डर को भी डर लगता है। - अज्ञात
बिना ग्रंथ के ईश्वर मौन है, न्याय निद्रित है, विज्ञान स्तब्ध है और सभी वस्तुएँ पूर्ण अंधकार में हैं। - अज्ञात
चींटी से परिश्रम करना सीखें। — अज्ञात
फल के आने से वृक्ष झुक जाते हैं, वर्षा के समय बादल झुक जाते हैं, सम्‍पत्ति रहकर भी सज्‍जन झुक जाते हैं, परोपकारी का यही स्‍वभाव होता है। - अज्ञात
उड़ने की अपेक्षा जब हम झुकते हैं तब विवेक के अधिक निकट होते हैं। - अज्ञात
रुकावटें वे भयावह वस्तुएं हैं जो आप उस समय देखते हैं जब आप अपने लक्ष्य से ध्यान हटा लेते हैं। - अज्ञात


आपके पास जितना समय अभी है उससे अधिक समय कभी नहीं होगा। - अज्ञात

आपको लोग देखते पहले, और सुनते बाद में हैं। - अज्ञात
अगर आप को सफर आसान लगने लगे तो हो सकता है आप उतार में जा रहे हों। - अज्ञात
आपकी मनोवृत्ति ही आपकी महानता को निर्धारित करती है। - अज्ञात
अपनी ख़राब आदतों पर जीत हासिल करने के समान जीवन में कोई और आनन्द नहीं होता है। - अज्ञात
आप अपने भगवान के सामर्थ्य को अपनी चिंताओं की सूची के आकार को देखकर बता सकते हैं। जितनी लंबी सूची होगी, उतना ही आपके भगवान का सामर्थ्य कम होगा। - अज्ञात
अपनी सोच को कैसे बेहतर बनाया जाए, यह सीखने से उत्कृष्ट कुछ नहीं है। - अज्ञात
आपकी प्रतिभा भगवान का आपको दिया हुआ उपहार है, आप जो कुछ इसके साथ करते हैं, वह आप भगवान को उपहार स्वरूप लौटाते हैं। - अज्ञात
अपने सकारात्मक विचारों को ईमानदारी और बिना थके हुए कार्यों में लगाए और आपको सफलता के लिए प्रयास नहीं करना पड़ेगा, अपितु अपरिमित सफलता आपके कदमों में होंगी। - अज्ञात
अपनी वाणी को जितना हो सके निर्मल और पवित्र रखें, क्योंकि संभव है कि कल आपको उन्हें वापस लेना पड़ सकता है। - अज्ञात
आपके जीवन का नियंत्रण केन्द्र आपका अपना रवैय्या है। - अज्ञात
आपकी कड़ी मेहनत बेकार नहीं जाती है। - अज्ञात
आपको कुव्यसनों की कीमत दो बार चुकानी पड़ती है - एक बार जब आप उनके प्रभाव में आते हैं, तथा दूसरी जब वह आपको प्रभावित करती हैं। - अज्ञात
आप खेत में बुवाई केवल सोचने भर से नहीं कर सकते हैं. (केवल सोचने से कुछ उपलब्धि प्राप्त नहीं होती है)। - अज्ञात
अनुभव की पाठशाला में जो पाठ सीखे जाते हैं, वे पुस्तकों और विश्वविद्यालयों में नहीं मिलते। - अज्ञात
अनुभव-प्राप्ति के लिए काफ़ी मूल्य चुकाना पड़ सकता है पर उससे जो शिक्षा मिलती है वह और कहीं नहीं मिलती। - अज्ञात
अधिकतर लोग नए साल की प्रतीक्षा केवल इसलिए करते हैं कि पुरानी आदतें नए सिरे से फिर शुरू की जा सकें। - अज्ञात
अधिक अनुभव, अधिक सहनशीलता और अधिक अध्ययन यही विद्वत्ता के तीन महास्तंभ हैं। - अज्ञात
आत्महत्या, एक अस्थायी समस्या का स्थायी समाधान है। — अज्ञात
आंतरिक सौन्‍दर्य का आ‍ह्वान करना कठिन काम है, सौन्‍दर्य की अपनी भाषा होती है, ऐसी भाषा जिसमें न शब्‍द होते हैं न आवाज। - अज्ञात
जीवन निर्वाह के लिए कमाने में इतने व्यस्त न हो जाएँ कि जीवन जीना भूल जाएँ। - अज्ञात
जब तक अपनी हार को दब्बूपने से स्वीकार नहीं कर लेते, आप हारने के लिए नहीं बने हैं। - अज्ञात
जीवन में बुरी आदत पर विजय प्राप्त करने की तुलना में कोई इससे बड़ा आनन्द नहीं हो सकता है। - अज्ञात
जिस प्रकार थोड़ी-सी वायु से आग भड़क उठती है, उसी प्रकार थोड़ी-सी मेहनत से किस्मत चमक उठती है। - अज्ञात
जिस काम की तुम कल्पना करते हो उसमें जुट जाओ। साहस में प्रतिभा, शक्ति और जादू है। साहस से काम शुरू करो पूरा अवश्य होगा। - अज्ञात
जो मनुष्य एक पाठशाला खोलता है वह एक जेलखाना बंद करता है। - अज्ञात
जिसने अकेले रह कर अकेलेपन को जीता उसने सबकुछ जीता। - अज्ञात
जिस काम की तुम कल्‍पना करते हो, उसमें जुट जाओ, साहस में प्रतिभा, शक्ति और जादू है, साहस से काम शुरू करो पूरा अवश्‍य होगा। - अज्ञात
जब भगवान आपकी समस्‍याएं हल करते हैं, तब आपको उन पर विश्‍वास रहता है और जब, भगवान आपकी समस्‍याएं हल नहीं करते तब, उन्‍हें आप पर विश्‍वास रहता है। - अज्ञात
जो भारी कोलाहल में संगीत को सुन सकता है, वह महान उपलब्धि को प्राप्‍त करता है। - अज्ञात
जाति, धर्म अलग-अलग हो सकते हैं, और इबादत करने के तरीके भी भिन्‍न हो सकते हैं, लेकिन ईश्‍वर एक है। - अज्ञात
जोखिम उठाएं: यदि आप जीत जाते हैं, तो आप प्रसन्न होंगे; यदि आप हार जाते हैं, तो आप समझदार बन जाएंगे। - अज्ञात
जब दुनिया यह कहती है कि हार मान लो, तो आशा धीरे से कान में कहती है कि एक बार फिर से प्रयास करो। - अज्ञात
हथोड़ा कभी कभी अपना निशाना चूक भी जाता है; लेकिन फूलों का गुलदस्ता कभी नहीं। - अज्ञात
हँसमुख व्यक्ति वह फुहार है जिसके छींटे सबके मन को ठंडा करते हैं। - अज्ञात
हँसते हुए जो समय आप व्यतीत करते हैं, वह ईश्वर के साथ व्यतीत किया समय है। — अज्ञात
हे भगवान! मुझे धैर्य दो, और ये काम अभी करो। — अज्ञात
हमेशा समग्र प्रयास करें, तब भी जब परिस्थितियां आपके अनुकूल न हों। - अज्ञात
ईश्वर बोझ देता है, और कंधे भी। - अज्ञात
इस राष्ट्र को ऐसे नेताओं की आवश्यकता है जो जानते हैं कि इस देश की क्या आवश्यकताएँ हैं। - अज्ञात
ईर्ष्‍या या घृणा के के विचार मन में प्रवेश होते ही खुशी गायब हो जाती है, प्रेम व शुभ-भावना युक्‍त विचारों से उदासी दूर हो जाती है। - अज्ञात
करुणा, एक भाषा जिसे बधिर सुन सकते हैं और नेत्रहीन देख सकते हैं। - अज्ञात
कुछ लोग सफलता के सपने देखते हैं, जबकि अन्य व्यक्ति जागते हैं और इसके लिए कड़ी मेहनत करते हैं। - अज्ञात
किताबें ऐसी शिक्षक हैं जो बिना कष्ट दिए, बिना आलोचना किए और बिना परीक्षा लिए हमें शिक्षा देती हैं। - अज्ञात
क्रोध ऐसी आँधी है जो विवेक को नष्ट कर देती है। - अज्ञात
किताबें समय के महासागर में जलदीप की तरह रास्ता दिखाती हैं। - अज्ञात
कविता का बाना पहन कर सत्य और भी चमक उठता है। - अज्ञात
किसी कृतज्ञता को तत्‍काल चुकाने, का प्रयत्‍न करना एक प्रकार की, कृतज्ञता ही है। - अज्ञात
क्रोध सदैव मूर्खता से प्रारंभ होता है और पश्चाताप पर समाप्त। — अज्ञात
काम करने में ज़्यादा श्रम नहीं लगता, लेकिन यह निर्णय करने में ज़्यादा श्रम करना पड़ता है कि क्या करना चाहिए। - अज्ञात
कुछ भी ऐसा न करें जिसे आप एक दिन भूलना चाहें. भगवान आपको माफ कर सकता है, लेकिन आप भूल जाएं, वह ऐसा नहीं कर सकते हैं। - अज्ञात
मुस्कुराहट, आपकी ख़ूबसूरती में सुधार करने का एक सस्ता तरीका है। - अज्ञात
मिलने पर मित्र का आदर करो, पीठ पीछे प्रशंसा करो और आवश्यकता के समय उसकी मदद करो। - अज्ञात
मुस्कान पाने वाला मालामाल हो जाता है पर देने वाला दरिद्र नहीं होता। - अज्ञात
मुस्कान थके हुए के लिए विश्राम है, उदास के लिए दिन का प्रकाश है तथा कष्ट के लिए प्रकृति का सर्वोत्तम उपहार है। - अज्ञात
मनुष्य मन की शक्तियों के बादशाह हैं। संसार की समस्त शक्तियाँ उनके सामने नतमस्तक हैं। - अज्ञात
महत्‍व इस बात का नहीं है आप अपने बच्‍चों के लिये क्‍या छोड़कर जाते हैं महत्‍व तो इस बात का है कि आप इन्‍हें कैसा बना कर जाते हैं। - अज्ञात
मिलने पर मित्र का आदर करो, पीठ पीछे प्रशंसा करो और आवश्‍यकता के समय उसकी मदद करो। - अज्ञात
मछली पकड़ने तो हर रोज जाया जा सकता है, लेकिन हर रोज मछली पकड़ में आ जाए ऐसा नहीं होता है। - अज्ञात
स्वयं पर मूक विजय से ही वास्तविक महानता का उदय होता है। - अज्ञात
स्व प्रेरित होकर कार्य करना किसी बुद्धिमान व्यक्ति का सबसे मज़बूत गुण होता है। - अज्ञात
साफ़ सुथरे सादे परिधान में ऐसा यौवन होता है जिसमें अधिक उम्र छिप जाती है। - अज्ञात
सबसे अधिक ज्ञानी वही है जो अपनी कमियों को समझकर उनका सुधार कर सकता हो। - अज्ञात
सौभाग्य वीर से डरता है और कायर को डराता है। - अज्ञात
समझौता एक अच्छा छाता भले बन सकता है लेकिन अच्छी छत नहीं।‍‍ - अज्ञात
सौ बरस जीने के लिए उन सभी सुखों को छोड़ना होता है जिन सुखों के लिए हम सौ बरस जीना चाहते हैं। - अज्ञात
सपना वो नह‍ीं जो नींद में आए, सपने वे हैं जिसे पूरा किए बिना नींद न आए। - अज्ञात
सांप के दांत में विष रहता है, मक्‍खी के सर में, बिच्‍छूं की पूंछ में, किन्‍तु दुर्जनों के पूरे शरीर में विष रहता है। - अज्ञात
समय और समुद्र की लहरें किसी का इंतज़ार नहीं करतीं। – अज्ञात
समय हमेशा कड़ी मेहनत करने वालों का मित्र रहा है। - अज्ञात
समय तब तक दुश्मन नहीं बनता जब तक आप इसे व्यर्थ गंवाने का प्रयास नहीं करते हैं। - अज्ञात
यदि आप अमीर होने की अनुभूति चाहते हैं तो उन वस्तुओं पर विचार करें जो जिन्हें पैसे से नहीं ख़रीदा जा सकता है। - अज्ञात

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मंदिर जाने से हमे बहुत लाभ We get many benefits from going to temple


मंदिर और उसमें स्थापित भगवान की मूर्ति हमारे लिए आस्था के केंद्र हैं। मंदिर हमारे धर्म का प्रतिनिधित्व करते हैं और हमारे भीतर आस्था जगाते हैं। किसी भी मंदिर को देखते ही हम श्रद्धा के साथ सिर झुकाकर भगवान के प्रति नतमस्तक हो जाते हैं। आमतौर पर हम मंदिर भगवान के दर्शन और इच्छाओं की पूर्ति के लिए जाते हैं लेकिन मंदिर जाने के और कई लाभ भी हैं
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मंदिर वह स्थान है जहां जाकर मन को शांति का अनुभव होता है। वहां हम अपने भीतर नई शक्ति का अहसास करते हैं। हमारा मन-मस्तिष्क प्रफुल्लित हो जाता है। शरीर उत्साह और उमंग से भर जाता है। मंत्रों के स्वर, घंटे-घडिय़ाल, शंख और नगाड़े की ध्वनियां सुनना मन को अच्छा लगता है। इन सभी के पीछे है, ऐसे वैज्ञानिक कारण जो हमें प्रभावित करते हैं।
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मंदिरों का निर्माण पूर्ण वैज्ञानिक विधि है। मंदिर का वास्तुशिल्प ऐसा बनाया जाता है, जिससे वहां शांति और दिव्यता उत्पन्न होती है। मंदिर की वह छत जिसके नीचे मूर्ति की स्थापना की जाती है। ध्वनि सिद्धांत को ध्यान में रखकर बनाई जाती है, जिसे गुंबद कहा जाता है। गुंबद के शिखर के केंद्र बिंदु के ठीक नीचे मूर्ति स्थापित होती है। गुंबद तथा मूर्ति का मध्य केंद्र एक रखा जाता है। गुंबद के कारण मंदिर में किए जाने वाले मंत्रोच्चारण के स्वर और अन्य ध्वनियां गूंजती है तथा वहां उपस्थित व्यक्ति को प्रभावित करती है। गुंबद और मूर्ति का मध्य केंद्र एक ही होने से मूर्ति में निरंतर ऊर्जा प्रवाहित होती है। जब हम उस मूर्ति को स्पर्श करते हैं, उसके आगे सिर टिकाते हैं, तो हमारे अंदर भी ऊर्जा प्रवाहित हो जाती है। इस ऊर्जा से हमारे अंदर शक्ति, उत्साह, प्रफुल्लता का संचार होता है।
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मंदिर की पवित्रता हमें प्रभावित करती है। हमें अपने अंदर और बाहर इसी तरह की शुद्धता रखने की प्रेरणा मिलती है। मंदिर में बजने वाले शंख और घंटों की ध्वनियां वहां के वातावरण में कीटाणुओं को नष्ट करते रहती हैं। घंटा बजाकर मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश करना हमें शिष्टाचार सिखाता है कि जब हम किसी के घर में प्रवेश करें तो पूर्व में सूचना दें। घंटे का स्वर देवमूर्ति को जाग्रत करता है, ताकि आपकी प्रार्थना सुनी जा सके। शंख और घंटे-घडिय़ाल की ध्वनि दूर-दूर तक सुनाई देती है, जिससे आसपास से आने-जाने वाले अंजान व्यक्ति को पता चल जाता है कि आसपास कहीं मंदिर है।
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मंदिर में स्थापित देव प्रतिमा में हमारी आस्था और विश्वास होता है। मूर्ति के सामने बैठने से हम एकाग्र होते हैं। यही एकाग्रता धीरे-धीरे हमें भगवान के साथ एकाकार करती है, तब हम अपने अंदर ईश्वर की उपस्थिति को महसूस करने लगते हैं। एकाग्र होकर चिंतन-मनन से हमें अपनी समस्याओं का समाधान जल्दी मिल जाता है।
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मंदिर में स्थापित देव प्रतिमाओं के सामने नतमस्तक होने की प्रक्रिया से हम अनजाने ही योग और व्यायाम की सामान्य विधियां पूरी कर लेते हैं। इससे हमारे मानसिक तनाव, शारीरिक थकावट, आलस्य दूर हो जाते हैं। मंदिर में परिक्रमा भी की जाती है, जिसमें पैदल चलना होता है। मंदिर परिसर में हम नंगे पैर पैदल ही घूमते हैं। यह भी एक व्यायाम है। नए शोध में साबित हुआ है नंगे पैर मंदिर जाने से पगतलों में एक्यूपे्रशर होता है। इससे पगतलों में शरीर के कई भीतरी संवेदनशील बिंदुओं पर अनुकूल दबाव पड़ता है जो स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है।
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इस तरह हम देखते हैं कि मंदिर जाने से हमे बहुत लाभ है। मंदिर को वैज्ञानिक शाला के रूप में विकसित करने के पीछे हमारे पूर्वज ऋषि-मुनियों का यही लक्ष्य था कि सुबह जब हम अपने काम पर जाएं उससे पहले मंदिर से ऊर्जा लेकर जाएं, ताकि अपने कर्तव्यों का पालन सफलता के साथ कर सकें और जब शाम को थककर वापस आएं तो नई ऊर्जा प्राप्त करें। इसलिए दिन में कम से कम एक या दो बार मंदिर अवश्य जाना चाहिए। इससे हमारी आध्यात्मिक उन्नति तो होती है, साथ ही हमें निरंतर ऊर्जा मिलती है और शरीर स्वस्थ रहता है।
Photo: मंदिर और उसमें स्थापित भगवान की मूर्ति हमारे लिए आस्था के केंद्र हैं। मंदिर हमारे धर्म का प्रतिनिधित्व करते हैं और हमारे भीतर आस्था जगाते हैं। किसी भी मंदिर को देखते ही हम श्रद्धा के साथ सिर झुकाकर भगवान के प्रति नतमस्तक हो जाते हैं। आमतौर पर हम मंदिर भगवान के दर्शन और इच्छाओं की पूर्ति के लिए जाते हैं लेकिन मंदिर जाने के और कई लाभ भी हैं
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मंदिर वह स्थान है जहां जाकर मन को शांति का अनुभव होता है। वहां हम अपने भीतर नई शक्ति का अहसास करते हैं। हमारा मन-मस्तिष्क प्रफुल्लित हो जाता है। शरीर उत्साह और उमंग से भर जाता है। मंत्रों के स्वर, घंटे-घडिय़ाल, शंख और नगाड़े की ध्वनियां सुनना मन को अच्छा लगता है। इन सभी के पीछे है, ऐसे वैज्ञानिक कारण जो हमें प्रभावित करते हैं।
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मंदिरों का निर्माण पूर्ण वैज्ञानिक विधि है। मंदिर का वास्तुशिल्प ऐसा बनाया जाता है, जिससे वहां शांति और दिव्यता उत्पन्न होती है। मंदिर की वह छत जिसके नीचे मूर्ति की स्थापना की जाती है। ध्वनि सिद्धांत को ध्यान में रखकर बनाई जाती है, जिसे गुंबद कहा जाता है। गुंबद के शिखर के केंद्र बिंदु के ठीक नीचे मूर्ति स्थापित होती है। गुंबद तथा मूर्ति का मध्य केंद्र एक रखा जाता है। गुंबद के कारण मंदिर में किए जाने वाले मंत्रोच्चारण के स्वर और अन्य ध्वनियां गूंजती है तथा वहां उपस्थित व्यक्ति को प्रभावित करती है। गुंबद और मूर्ति का मध्य केंद्र एक ही होने से मूर्ति में निरंतर ऊर्जा प्रवाहित होती है। जब हम उस मूर्ति को स्पर्श करते हैं, उसके आगे सिर टिकाते हैं, तो हमारे अंदर भी ऊर्जा प्रवाहित हो जाती है। इस ऊर्जा से हमारे अंदर शक्ति, उत्साह, प्रफुल्लता का संचार होता है।
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मंदिर की पवित्रता हमें प्रभावित करती है। हमें अपने अंदर और बाहर इसी तरह की शुद्धता रखने की प्रेरणा मिलती है। मंदिर में बजने वाले शंख और घंटों की ध्वनियां वहां के वातावरण में कीटाणुओं को नष्ट करते रहती हैं। घंटा बजाकर मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश करना हमें शिष्टाचार सिखाता है कि जब हम किसी के घर में प्रवेश करें तो पूर्व में सूचना दें। घंटे का स्वर देवमूर्ति को जाग्रत करता है, ताकि आपकी प्रार्थना सुनी जा सके। शंख और घंटे-घडिय़ाल की ध्वनि दूर-दूर तक सुनाई देती है, जिससे आसपास से आने-जाने वाले अंजान व्यक्ति को पता चल जाता है कि आसपास कहीं मंदिर है।
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मंदिर में स्थापित देव प्रतिमा में हमारी आस्था और विश्वास होता है। मूर्ति के सामने बैठने से हम एकाग्र होते हैं। यही एकाग्रता धीरे-धीरे हमें भगवान के साथ एकाकार करती है, तब हम अपने अंदर ईश्वर की उपस्थिति को महसूस करने लगते हैं। एकाग्र होकर चिंतन-मनन से हमें अपनी समस्याओं का समाधान जल्दी मिल जाता है।
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मंदिर में स्थापित देव प्रतिमाओं के सामने नतमस्तक होने की प्रक्रिया से हम अनजाने ही योग और व्यायाम की सामान्य विधियां पूरी कर लेते हैं। इससे हमारे मानसिक तनाव, शारीरिक थकावट, आलस्य दूर हो जाते हैं। मंदिर में परिक्रमा भी की जाती है, जिसमें पैदल चलना होता है। मंदिर परिसर में हम नंगे पैर पैदल ही घूमते हैं। यह भी एक व्यायाम है। नए शोध में साबित हुआ है नंगे पैर मंदिर जाने से पगतलों में एक्यूपे्रशर होता है। इससे पगतलों में शरीर के कई भीतरी संवेदनशील बिंदुओं पर अनुकूल दबाव पड़ता है जो स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है।
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इस तरह हम देखते हैं कि मंदिर जाने से हमे बहुत लाभ है। मंदिर को वैज्ञानिक शाला के रूप में विकसित करने के पीछे हमारे पूर्वज ऋषि-मुनियों का यही लक्ष्य था कि सुबह जब हम अपने काम पर जाएं उससे पहले मंदिर से ऊर्जा लेकर जाएं, ताकि अपने कर्तव्यों का पालन सफलता के साथ कर सकें और जब शाम को थककर वापस आएं तो नई ऊर्जा प्राप्त करें। इसलिए दिन में कम से कम एक या दो बार मंदिर अवश्य जाना चाहिए। इससे हमारी आध्यात्मिक उन्नति तो होती है, साथ ही हमें निरंतर ऊर्जा मिलती है और शरीर स्वस्थ रहता है।
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हे हनुमंते

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हे हनुमंते
परमेश्वर कर लो स्वीकार,
मेरा प्रणाम, चरणों में तेरे,
ये छल कपट और द्वेष मेरे,
जल जाए तेज़ में तेरे,

शुद्ध करो मन जैसे गंगाजल,
हो जाये अंतर्मन ये निर्मल,
नाश करो हर दुःख मेरे भगवन,
शांत रहे मेरा ये हृदय-भुवन,

तेरा भक्त करे पुकार,
लगा दे इस दीन की नय्या पार,
हे, हनुमंत हे हे मारुतिनंदन,
ये दास करे तेरा अभीनंदन,

महिरावण को हार दिखाई,
पंच्मुख्या में आग जलाई,
हे राम दूत हे भीम भात्र,
करो कृपा, रहूँ तेरे चरणों के पास,

बल, विद्या, बुधि के स्वामी,
नमन करे तुम्हे हे अन्तर्यामी,
शीश झुकाए, प्राण बिछाये,
भक्त ये तेरा अश्रु बहाए,
जय हो जय हो, हे केसरी नंदन,
करो निवास इस हृदय में भगवन।

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कर्मों की सजा punishment for deeds

जिंदगी में सभी के अपने कायदे या सिद्धांत होते हैं। हर व्यक्ति का जीवन जीने का अपना तरीका है। जो बात किसी के लिये उसका कर्तव्य और धर्म है वह किसी के लिये घोर पाप या नीच कृत्य हो सकता है। लेकिन शास्त्रों के अनुसार जिन कर्मों को पाप माना गया है उसकी सजा उसे अपनी मृत्यु के बाद मिलती है। किस पाप की क्या सजा मिलती है। इसका वर्णन गरूड़ पुराण में कुछ इस प्रकार दिया हुआ है। गरुड़ जी बोले- भगवान जीवों को उनके कौन से पाप कौन सी सजा मिलती है। वे किन अगला जन्म किस रूप में लेते हैं व भी बताइए।

भगवान कहते हैं गरूड़ ध्यान से सुनो-

- ब्रह्महत्या करने वाला क्षयरोगी।

- गाय की हत्या करने वाले कुबड़ा।

- कन्या की हत्या करने वाला कोढ़ी।

- स्त्री पर हाथ उठाने वाला रोगी।

- परस्त्री गमन करने वाला नपुंसक।

- गुरुपत्नी सेवन से खराब शरीर वाला।

- मांस खाने व मदिरा पीने वाले के दांत काले व अंग लाल होते हैं।

- दूसरे को न देकर अकेले मिठाई खाने वाले को गले का रोगी।

- घमंड से गुरु का अपमान करने वाले को मिरगी।

- झूठी गवाही देने वाला गूंगा।

- किताब चोरी करने वाला जन्मांध।

- झूठ बोलने वाला बहरा।

- जहर देने वाला पागल होता है।

- अन्न चोरी करने वाला चूहा।

- इत्र की चोरी करने वाले छछुंदर।

- जहर पीकर मरन वाले काले सांप।

- किसी की आज्ञा नहीं मानते वे निर्जन वन में हाथी होते हैं।

- ब्राह्मण गायत्री जप नहीं करते वे अगले जन्म में बगुला होते हैं।

- पति को बुरा-भला कहने वाली जूं बनती है।

- परपुरूष की कामना रखने वाली स्त्री चमगादड़ बनती है।

- मृतक के ग्यारहवे में भोजन करने वाला कुत्ता बनता है।

- मित्र की पत्नी से मोह रखने वाले गधा बनता है।
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मानव

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आज के वैज्ञानिक युग में मिलने वाला सुख और आनंद एक नशे के सामने है जो मनुष्य के लिया कुछ ही क्षणौ का मेहमान बन कर आता है | वह सुख और अननद झूठा है, बनावटी है | आज सेहत कि नहीं बुखार कि गर्मी है | आज नीद ना आने का रोग एक आम बात बन गई है | नीद का आनंद लेने के लिया नीद कि गोली खाई जाती है किंतु फिर भी वास्तविक आनंद नहीं प्राप्त होता| मोहदय इस से बढ़ कर और क्या बात हो सकती है कि आज मनुष्य कि नीद भी हराम गो गई है और वह चैन से सो भी नहीं सकता | आज मानवता सच्चे शुक और आनंद के लिया एक प्रकार से छटपटा रही है तड़प रही है |

कुछ लोगो का कहना है कि आज मानव मूल्य नहीं गिर रहे | में हो यह कहूगा कि आज मानव उस सभ्यता में रह्ता है | जहाँ असहनुभुती, भ्रस्टाचार, बेइमानी, अनुशासनहीनता, इत्यादि बुरी भावनाओ का ताण्डव नतर्न हो रहा है वह इस सभ्यता में रहता है जहाँ इन्सान को इन्सान से जायदा विश्वास मशीन पर है | वह मशीन जिसका सब कुछ लोहे का बना होता है| जिसमें सब कुछ होता है पर इन्सानियत नहीं |

एक तर्क यह भी दिया जाता है आज मानव ने विज्ञान द्वारा चाँद, श्रुक, और सितारों पर विजय पा ली है और अब वहा नगर बसाने की योजनायें बना रहा है ताकी पृथ्वी के लोगो को अधिक से अधिक शुक मिले | महोदय, जो विपक्षी दोस्त यह तर्क पेश करते हैं, वे तो सावन के अंधे है जिन्हें केवल हरा ही हरा दिखाई देता है | उन्हें यह नहीं मालूम की आज आधी दुनिया भूकी, नंगी, और प्यासी है | लाखो लोग ऐसा है जो ठीठुरते हुआ साड़को की पटरियों पर रात काटते है | असन्ख्य लोग ऐसे है जिन्हें दो जून रोटी भी नसीब नहीं होती | आज पहले की अपेशा गरीबी, भुकमरी तथा अज्ञान का अधिक बोलबाला है | इन समस्याओ को सुलझाने तथ उन पर लोगो की दशा सुधारने की बजाय इस धरती से ऊपर किसी दुसरे लोक में पहुच कर खोज कर रहे है, क्या इस बात का सबूत नहीं कि आज मानक मूल्य बिल्कुल समाप्त होते जा रहे है |

आज के वैज्ञानिक युग के प्रतिक है बडे- बडे नगर, जिनमे एक ही मकान में रहने वाले लोग एक दुसरे के लिए अजनबी है | ऊपर की मंजिल में लाश को घेरे व्यक्ति बिलख- बिलख कर रो रहे है और नीचे कि मंजिल में शादी कि ख़ुशी में नाच हो रहा है| जयादा दूर ना जाइए, घरो की हालत पर ज़रा नज़र डालिए, सगे सम्बन्धी ही एक दुसरे का सुख क्षीनने के लिए खून के प्यासे बने हुए है| खून के प्यासे लोगो के ही कारण आज कि वैज्ञानिक सभ्यता ने संसार में दो विश्वयुद करवाए है जिनके भयानक प्रभाव बरसो बीत जाने के बाद भी नहीं मिट सके है| आज संसार में कोई भी ऐसा इन्सान नहीं जो छ|ती ठोक कर कहा सके कि वह पूरी तरहे सुखी है| आधुनिक युक में सबसे अधिक वैज्ञानिक उन्ती के कारण सभी देशो में आत्म हत्यओ कि दिन-ब-दिन बढ़ती हुई संख्या से मेरे ही पक्ष का समर्थन होता है कि वैज्ञानिक उन्नति के इस युग में मानव मूल्य गिरते जा रहे है|
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भगवान सबको देखता है God sees everyone

एक किसान था | उसका एक बेटा था रामू | एक दिन को बात है, किसान अपने खेत में काम कर रहा था | रामू भी वही था | पड़ोंसी के खेत में गाजर उगी हुई थी | रामू ने वहा जाकर एक गाजर खींचकर निकल ली | गाजर खींचते देख किसान अपने बेटे से बोला – “बेटा | वह खेत दुसरे किसान का है | तुमने उसके खेत से गाजर क्यों निकाली ??
रामू बोला – “में जानता हु, यह हमारा नहीं है | यह खेत राधे काका का है, परंतु काका इस समय नहीं नहीं |” बेटे की बात सुन किसान बोला – “बेटा, राधे ने तुम्हे नहीं देखा, परंतु भगवान तो देख रहा है | वह सबको देखता है |” रामू को अपने पिता की कही बात समझ आ गई |
एक बार की बात है, बरसात नहीं हुई | बरसात न होने से सभी किसानो के खेत सुख गए | खाने के लिए भी किसी के घर में अनाज नहीं था | सभी किसान बहुत परेशान थे |
भूख से बेचेन ही रामू को पिता सोचने लगा – “क्या करू? अनाज कंहा से लाऊ?” गाँव में केवल पड़ोसी राधे के खलियान में ही अनाज था | पिछले साल उसके खेत में गेहू की खूब पैदावार हुई थी | रामू के पिता ने राधे के खलियान से अनाज चोरी करने जी योजना बनाई |
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खरगोश और कछुआ the hare and the Tortoise

बहुत पुरानी बात है | एक गाँव था | उस गाँव के समीप एक नदी बहती थी | नदी के दूसरी तरफ घना जंगल था | उस जंगल में खरगोश रहता था | एक दिन की बात है | नदी में कही से एक बड़ा खरगोश आकर रहने लगा | खरगोश और कछुआ दोनों में दोस्ती हो गई | एक दिन खरगोश से पूछा की तुम क्या क्या जानते हो? कछुए ने खरगोश से घमंड से कहा – में बहुत से विद्याये जनता हु | खरगोश ने मुंह लटकाकर कहा – “ में तो केवल एक ही विदया जानता हु |”
खरगोश और कछुआ दोनी हर रोज साथ-साथ खेलते थे | एक दिन किसी मछुआरे ने नदी में जाल डाला | उस जाल में कछुआ भी फंस गया | उस दिन वह खरगोश के पास नहीं पहुच सका | खरगोश को चिंता हुई | वह कछुए से मिलने नदी पर गया | खरगोश ने देखा कछुआ मछुआरे के जाल में फंसा हुआ चटपटा रहा है | यह देखकर खरगोश चुपके से छिपते-छिपाते कछुए के पास गया और उससे कहने लगा – “दोस्त, क्या हुआ तुम तो बहुत सारी विदया जानते हो, कोई उपाय का जाल से बाहर आ जाओ |”
कछुए ने बहुत कोशिश किम परन्तु वो जाल से बहार न निकल पाया | उसने खरगोश से मदद मागी –“ दोस्त अब तुम ही मेरी जान बचा सकते हो | दया करो, मुझे यहाँ से बाहर निकालो | खरगोश ने कछुए से कहा, जब मछुआरा यंहा आए, तो तुम मरने का नाटक करना | वह तुम्हे मरा हुआ जानकर जाल से निकलकर नदी के बाहर रख देगा | उसी समय तुम नदी में चले जाना | कछुए ने ऐसा ही किया | मछुआरे ने कछुए को मरा हुआ जानकर उसे जाल से निकलकर नदी के बाहर जमीन पर रख दिया | फिर रस्सी उठाने झाड़ी की और चला गया |
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आज्ञाकारी पति obedient husband

एक दिन बादशाह अकबर व बीरबल वेश बदलकर आगरे की सडको पर घूम रहे थे | तभी उन्होंने देखा की एक ओरत जोर – जोर से चिल्ला रही थी | वह आदमी से ख रही थी, “तुम एक पति होने के लायक नहीं हो | यहाँ से चले जाओ | मेरे दिए गए कम को पूरा किए बिना इस घर में कदम नहीं रखना |”
यह सब देखकर बादशाह ने बीरबल से पूछा, “ आदमी कोई  जवाब क्यों नहीं दे रहा| चुपचाप सबकुछ क्यों सुन रहा है? वाद शक्तिशाली है, ओरत पर पलट कर चिल्ला सकता है | वह ऐसा क्यों नहीं कर रहा है?” महाराज, सभी पति ऐसे ही होते है| सभी पति अपनी पत्नी की कहा मानते है और ऐसा ही उन्हें करना पड़ता है क्योकि यही शादी का सत्य है|”
अगले ही सुबह बादशाह ने शादीशुदा व्यक्तियों को महल में बुलाया | सभी के इकट्ठा होने पर वह बोले, “सभी पति जो अपनी पत्नियों की आज्ञा मानते है मेरे दायी तरफ खड़े हो जाए और जो मानते है वो बायीं  तरफ खड़े हो जाए |”
इस आदेश पर सभी पुरुष बादशाह के दायी तरफ खड़े हो गए | केवल एक ही व्यक्ति ही बादशाह की बायीं तरफ खड़ा था | यह देखकर की कम से कम एक व्यक्ति तो ऐसा है जो स्वयं की मर्जी का मालिक है, बादशाह अत्यंत प्रसन्न हुए | उन्होंने बीरबल से उसे इनाम देने को कहा, परन्तु बीरबल उस व्यक्ति से एक प्रशन पूछना चाहते थे |
उसने व्यक्ति से पूछा, “जब सभी व्यक्ति दायी और खड़े हुए है पर तुम अकेले ही बायीं तरफ खड़े हो | ऐसा क्यों?
“श्रीमान, दरसल मेरी पत्नी ने मुझसे कहा था, की तुम्हे भीड़ से अलग ही खड़े होना है, इसलिए में सभी से अलग खड़ा हुआ था |”
यह सुनकर सभी दरबारी, एकत्रित पति तथा बादशाह अकबर ठहाके मारकर हसने लगे | बादशाह ने बीरबल से कहा, “बीरबल, एक बार फिर तुम सही हो, तुमने साबित क्र दिया की सभी पति अपनी पत्नी की आज्ञा मानते है|”
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Quotes


  • क्रोध मस्तिष्क के दीपक को बुझा देता है |
                                                            इंगरसोल
  • क्रोध मुर्खता से शुरू होता है और पशचाताप पर खत्म होता है |
पेथागोरस
  • क्रोध के सिंहासन पर बैठते ही बुद्धि वंहा से खिसक जाती है
एम्.हेनरी
  • क्रोध से मूढता उत्पन्न होती है मूढता से स्म्रति भ्रांत हो जाती है, स्म्रति भ्रांत होने से बुद्धि का नाश हो जाता है, और बुद्धि के नष्ट होने पर प्राणी स्वंय नष्ट हो जाता है |
भगवान श्रीक्रष्ण
  • जब क्रोध आए, तो उसके परिणाम पर विचार करो |
क्न्फ्युश्स
  • यदि आप आत्मरक्षा करना चाहता है, तो अपने क्रोध को संभाल ले | ऐसा न करने पर क्रोध आपका नाश क्र देगा |
तिरुकुरल

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नासमझी foolishness

बहुत समय की बात है, जंगल में चार बेल रहते थे | उनका आपस में बहुत प्रेम था | वे आपस में घूमते, साथ खाते पीते और कभी भी झगड़ा नहीं करते थे | उसी जंगल में शेर भी रहता था | बेलो को देखकर वह उन्हें खाने के लिए नए नए उपाय करता, ताकि वह उन्हें खा सके | पर उन चारो को एक साथ देख कर निराश हो जाता था |
और एक दिन उसने चारो बेलो को लड़ाने का उपाय सोच लिया | वह उन चारो बेलो के पास जाकर इधर-उधर घुमने लगा | बेल उसे अपने इतने पास घूमता देखकर डर गए | घबराहट के कारण वे एक दुसरे से अलग हो गए | बस शेर को तो इसी मोके की तलाश में था | वह बारी-बारी से एक-एक बेल के पास गया और उनके कान में कुछ कहा – “कुछ नहीं” और फिर वहा से चला गया और दूर कही पेड़ के पीछे छिप गया | अब क्या था चारो बेल यह जानने को उसुक्त थे की शेर ने उनके कान में क्या कहा |
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