🎵 उतनी दूर मत ब्याहना, मम्मी-पापा 🎵
[अंतरा 1]
उतनी दूर मत ब्याहना, मम्मी-पापा,
जहाँ से मैं लौट न पाऊँ।
छोटी-सी गुड़िया हूँ अभी तक,
पराए घर का डर सताए।
[अंतरा 2]
आँगन की मिट्टी छोड़कर,
कैसे नई दुनिया अपनाऊँ?
जहाँ न माँ के हाथों का प्यार हो,
न पापा की बाहों का सहारा।
[मुखड़ा]
उतनी दूर मत ब्याहना, मम्मी-पापा,
जहाँ मेरी यादों का रास्ता भी थक जाए।
मैं रो लूँ बस थोड़ी देर,
तेरे सीने से लगकर...
फिर छोड़ देना हाथ मेरा,
धीरे-धीरे, हौले-हौले।
[अंतरा 3]
पापा के कंधे पर सोते-सोते,
सपनों की दुनिया रची थी।
और माँ की ममता की छाया में,
हर डर को हँसकर सहा था।
[ब्रिज]
जिस घर में मेरे रंग थे,
अब वो रंग किसी और के होंगे।
बस एक वादा कर लो, मम्मी-पापा,
कि लौट आऊँ तो गले लगोगे।
[मुखड़ा – पुनरावृत्ति]
उतनी दूर मत ब्याहना, मम्मी-पापा,
जहाँ से तुम मुझे देख न पाओ।
मैं हर मोड़ पर तुम्हें याद करूँ,
और तुम हर दुआ में मेरा नाम ले आओ।
[आउट्रो]
उतनी दूर मत ब्याहना, मम्मी-पापा,
मैं वही नन्ही-सी बिटिया हूँ अब भी।
तुम्हारे दिल में जो कोना है मेरा,
बस वहीं हमेशा ज़िंदा रहूँ…