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Sunday, 22 January 2012

...तो मृत्यु भी मधुर हो जाए ! How to Live & How to Die ?

कैसे जियें और कैसे मरें ? 
कुछ लोग कहते है की ज़िन्दगी परछाई के सिवा कुछ नहीं है ! इन लोगो को अपने जीवन में निराशा, अंधकार और केवल मृत्यु के स्वप्न आते है ! दुनियादारी के बोझ तले दबे लोगो की यह प्रतिक्रिया है ! कुछ लोग कहते है की जीवन एक कला है ! ऐसे लोग प्रत्येक स्थिति में खुश रहना चाहते है ! ज़िन्दगी पतझड़ नहीं बसंत है ! ग़र जीने का सही ढंग जान गए तो अंत तक जीवन में बसंत ही रहेगी ! उसके लिए जीवन खिलते पुष्प सा होगा, पंछी की चहक सा होगा, झरने की तरह प्रसन्न होगा, संतो का जीवन ऐसा ही होता है १ देखिये सुखदेव जी भी कहते है- 
कृष्ण ही कला है और कला ही कृष्ण है ! कृष्ण का सम्पूर्ण जीवन कलकल बहता झरना है ! कृष्ण के स्मरण मात्र से ह्रदय मधुरता से भर जाता है !