जय भवानी, जय शिवाजी!
मराठा, माटी के लाल हैं हम,
धर्म-रक्षक, वीर विशाल हैं हम।
एक तलवार थी, पर ममता थी,
हर वार में भी करुणा थी।
शिवाजी की छाया में,
धरती ने जन्मा राणा था।
धरती ने जन्मा राणा था।
गणिमी कावा, बुद्धि के बाण,
दुश्मन कांपे, नाम से जान।
गांव-गांव में शौर्य पला,
हर दिल में था भगवा जला।
Maratha Sanga Yoddha है,
ना झुकता, ना रुकता है।
देश के लिए जीता है,
धर्म पर ही मरता है।
तना था सीना, आंखों में आग,
मुग़ल भी कांपे, देखे जब भाग।
तानाजी बोला – "गढ़ आया है",
पर शेर गया, बलिदान लाया है।
बाजी प्रभु, एक सेना पूरा,
घाटी में लिखा विजय का सूरा।
रानी ताराबाई, चिंगारी बनी,
हर नारी भी रण में रानी बनी।
शिव की जयकार, भवानी का नाम,
इनके बिना अधूरा है हिंदुस्तान।
संस्कारों का कवच पहना,
मर्यादा में ही प्रेम बसा।
मर्यादा में ही प्रेम पहना।
ना तलवार भूले, ना ईमान भूले,
वीर, धर्म पर ही मरता है।
आज भी जो बोले सच्चाई से,
वो चलता है उसी परछाई से।
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