मंगल पांडे ने पहला शंखनाद किया,
फाँसी पे चढ़कर विद्रोह का बिगुल बजा दिया।
तात्या टोपे ने रण में ज्वाला जलाई,
धरती माँ के लिए हँसते-हँसते जान गँवाई।
रानी लक्ष्मीबाई लड़ी दुश्मन की सेना से,
शेरनी बन भिड़ी अंग्रेजी सदी के घेरे से।
आज भी गूंजे झाँसी की तलवार,
"मैं अपनी झाँसी नहीं दूँगी" का अमर उद्घोष अपार।
ये मिट्टी शहीदों की पहचान है,
हर कण-कण में उनका बलिदान है।
जिनका नाम नहीं, वो भी महान हैं,
हम सबका शीश उनके चरणों में नत है।
**ये बलिदान की धरती है,
ये हिन्दुस्तान की धरती है।**
भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु की जोड़ी,
फाँसी पे हँसते गए, वीरता में ना कोई तोड़ी।
"इंकलाब ज़िंदाबाद" गूंजा हर गली,
उनके लहू से ही तो आज़ादी की मशाल जली।
चंद्रशेखर आज़ाद ने खुद को गोली मारी,
पर अंग्रेज़ों के हाथ कभी न आए हमारी।
नेताजी सुभाषचंद्र कहाँ खो गए,
"तुम मुझे खून दो…" कहकर अमर हो गए।
ये मिट्टी शहीदों की पहचान है,
हर कण-कण में उनका बलिदान है।
जिनका नाम नहीं, वो भी महान हैं,
हम सबका शीश उनके चरणों में नत है।
**ये बलिदान की धरती है,
ये हिन्दुस्तान की धरती है।**
भगवती चरण वोहरा बम के संग खो गए,
बिस्मिल, अशफ़ाक, रोशन सिंह भी फाँसी पे सो गए।
हिंदू-मुस्लिम साथ लड़े जब-जब,
देश रहा सर्वोपरि, बाकी सब रहा निष्प्रभ।
लाला लाजपत राय ने लाठियाँ झेली,
पर उनकी आत्मा कभी न डगमगायी, रही अकेली।
वीर सावरकर ने कालापानी सहा,
पर वंदेमातरम् से मन उनका सदा रहा गरमा।
चाफेकर बंधु, तीनों की कथा निराली,
पुणे की धरती आज भी गाता उनकी लाली।
मास्टर सूर्यसेन का साहस अद्वितीय,
उनका बलिदान भी अमर और पावन पवित्रतम था विशेष।
कितने नाम दब गए इतिहास की धूल में,
पर वो जिए हमारे रक्त के मूल में।
हर गाँव, हर कोने में बसी है कहानी,
जिसने दी जान, पर ना पाई पहचानी।
तो सुनो, ऐ भारत के लालों,
ये आज़ादी किसी की मेहरबानी नहीं।
ये खून से लिखी अमर कहानी है,
वीरों की गाथा, त्याग की निशानी है।
जो भूले उनको, वो खुद को खो देगा,
जो सीखे उनसे, वही भारत संजोएगा।
**ये बलिदान की धरती है,
ये हिन्दुस्तान की धरती है।**
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