🌺 "फैशन नहीं, संस्कार ही असली पहचान है!"
आज के इस आधुनिक युग में,
जहाँ तकनीक ने तरक्की की है,
वहीं फैशन की आड़ में शर्म और मर्यादा को
छोड़ देना एक नया चलन बन गया है।
हर उम्र की महिलाएँ,
अक्सर तंग, कटे-फटे कपड़ों में,
बिना आँचल या चूनरी के,
अपने शरीर की हर रेखा को
सार्वजनिक स्थानों पर प्रदर्शित करती हुई नज़र आती हैं।
प्रश्न उठता है –
इसका उद्देश्य क्या है?
कौन-सी आज़ादी है जो शरीर के प्रदर्शन से जुड़ी है?
भारतीय संस्कृति ने कभी स्त्री को दबा कर नहीं रखा,
बल्कि उसे 'माँ', 'बहन', 'लक्ष्मी' और 'शक्ति' के रूप में पूजा है।
लेकिन जब वही स्त्री शालीनता की जगह अश्लीलता चुनती है,
तो समाज में कामुकता, अपराध और अव्यवस्था को जन्म देती है।
इतिहास गवाह है –
जब-जब सदाचार की सीमा टूटी है,
तब-तब कामुक भेड़ियों ने इंसानियत को नोच डाला है।
किसी को फ्रिज में बंद किया गया,
किसी को जला दिया गया,
किसी को टुकड़े-टुकड़े कर दिया गया।
👉 क्या यह सब उस स्त्री का दोष था?
नहीं!
लेकिन क्या हम यह नकार सकते हैं कि
कुछ हद तक उत्तेजक कपड़े, उकसावे और नजरों का कारण बनते हैं?
🚨 सिर्फ पुरुष ही नहीं – स्त्रियों को भी आत्ममंथन करना होगा।
शादी से पहले शील और मर्यादा में रहना,
भारतीय परंपरा का मूल रहा है।
यह पाबंदी नहीं, सुरक्षा है –
मान, सम्मान और भविष्य की रक्षा है।
बिना आँचल या मर्यादा के
अगर कोई स्त्री अपने शरीर को ‘प्रदर्शन’ बनाती है,
तो वह अनजाने में ही कई कमजोर मानसिकता वाले पुरुषों को भटकाती है।
फिर चाहे वह पुरुष हो या स्त्री –
दोष दोनों का है।
चरित्रहीनता स्त्री या पुरुष में नहीं –
चरित्र में होती है।
शादी से पहले "इच्छा",
शादी के बाद "असंतोष",
क्या यही आज़ादी है?
भगवान ने जो दिया,
उसमें संतुष्ट रहना ही सच्चा जीवन है।
पर जब हम वासनाओं के पीछे भागते हैं,
तो सिर्फ खुद नहीं,
पूरा परिवार, समाज और पीढ़ियाँ तबाह हो जाती हैं।
सुपर्णखा ने अपनी इच्छाओं में मर्यादा लांघी –
नाक कटी और कुटुंब खत्म हुआ।
विश्वामित्र जैसे तपस्वी भी मोहिनी रूप में बहके –
तो आम पुरुष कौन सा अपवाद है?
🌼 अब समय है – चरित्र और संस्कारों की ओर लौटने का।
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सशक्त बनो, लेकिन शालीन भी।
-
आज़ाद बनो, पर मर्यादा के भीतर।
-
फैशन ऐसा हो जो आत्मसम्मान बढ़ाए,
ना कि दूसरों की नीयत बिगाड़े।
स्त्री और पुरुष दोनों की ज़िम्मेदारी है –
कि वो चरित्रवान बनें,
समाज को बिगाड़ें नहीं।
👉 आधुनिकता में डूबकर संस्कृति को मत भूलो।
क्योंकि देश सभ्यता से बनता है, केवल विकास से नहीं।
🙏 आपका शुभचिंतक – एक सजग, संवेदनशील और संस्कारित नागरिक।
जय हिंद! 🚩
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