विचारों के अनुरूप ही मनुष्य की स्थिति और गति होती है। श्रेष्ठ विचार सौभाग्य का द्वार हैं, जबकि निकृष्ट विचार दुर्भाग्य का,आपको इस ब्लॉग पर प्रेरक कहानी,वीडियो, गीत,संगीत,शॉर्ट्स, गाना, भजन, प्रवचन, घरेलू उपचार इत्यादि मिलेगा । The state and movement of man depends on his thoughts. Good thoughts are the door to good fortune, while bad thoughts are the door to misfortune, you will find moral story, videos, songs, music, shorts, songs, bhajans, sermons, home remedies etc. in this blog.
"मनुष्य की स्थिति और गति उसके विचारों पर निर्भर करती है। श्रेष्ठ विचार सौभाग्य के द्वार खोलते हैं, जबकि निकृष्ट विचार दुर्भाग्य का कारण बनते हैं। Goswami Rishta ब्लॉग पर आपको प्रेरणादायक कहानियाँ, वीडियो, भजन, गाने, शॉर्ट्स, प्रवचन, संगीत, घरेलू उपचार और जीवन को संवारने वाले विचार मिलेंगे। यह ब्लॉग जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, आध्यात्मिक जागरूकता और प्रेरणा लाने का एक श्रेष्ठ माध्यम है।"
"The state and progress of a person are determined by their thoughts. Good thoughts open the doors to fortune, while negative thoughts lead to misfortune. On the Goswami Rishta blog, you will find inspiring stories, videos, bhajans, songs, shorts, sermons, music, home remedies, and wisdom to enrich your life. This blog serves as a powerful platform for spreading positivity, spiritual awareness, and motivation."
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आज के इस आधुनिक युग में,
जहाँ तकनीक ने तरक्की की है,
वहीं फैशन की आड़ में शर्म और मर्यादा को
छोड़ देना एक नया चलन बन गया है।
हर उम्र की महिलाएँ,
अक्सर तंग, कटे-फटे कपड़ों में,
बिना आँचल या चूनरी के,
अपने शरीर की हर रेखा को
सार्वजनिक स्थानों पर प्रदर्शित करती हुई नज़र आती हैं।
प्रश्न उठता है –
इसका उद्देश्य क्या है?
कौन-सी आज़ादी है जो शरीर के प्रदर्शन से जुड़ी है?
भारतीय संस्कृति ने कभी स्त्री को दबा कर नहीं रखा,
बल्कि उसे 'माँ', 'बहन', 'लक्ष्मी' और 'शक्ति' के रूप में पूजा है।
लेकिन जब वही स्त्री शालीनता की जगह अश्लीलता चुनती है,
तो समाज में कामुकता, अपराध और अव्यवस्था को जन्म देती है।
इतिहास गवाह है –
जब-जब सदाचार की सीमा टूटी है,
तब-तब कामुक भेड़ियों ने इंसानियत को नोच डाला है।
किसी को फ्रिज में बंद किया गया,
किसी को जला दिया गया,
किसी को टुकड़े-टुकड़े कर दिया गया।
👉 क्या यह सब उस स्त्री का दोष था?
नहीं!
लेकिन क्या हम यह नकार सकते हैं कि कुछ हद तक उत्तेजक कपड़े, उकसावे और नजरों का कारण बनते हैं?
🚨 सिर्फ पुरुष ही नहीं – स्त्रियों को भी आत्ममंथन करना होगा।
शादी से पहले शील और मर्यादा में रहना,
भारतीय परंपरा का मूल रहा है।
यह पाबंदी नहीं, सुरक्षा है –
मान, सम्मान और भविष्य की रक्षा है।
बिना आँचल या मर्यादा के
अगर कोई स्त्री अपने शरीर को ‘प्रदर्शन’ बनाती है,
तो वह अनजाने में ही कई कमजोर मानसिकता वाले पुरुषों को भटकाती है।
फिर चाहे वह पुरुष हो या स्त्री – दोष दोनों का है।
चरित्रहीनता स्त्री या पुरुष में नहीं –
चरित्र में होती है।
शादी से पहले "इच्छा",
शादी के बाद "असंतोष",
क्या यही आज़ादी है?
भगवान ने जो दिया,
उसमें संतुष्ट रहना ही सच्चा जीवन है।
पर जब हम वासनाओं के पीछे भागते हैं,
तो सिर्फ खुद नहीं,
पूरा परिवार, समाज और पीढ़ियाँ तबाह हो जाती हैं।
सुपर्णखा ने अपनी इच्छाओं में मर्यादा लांघी –
नाक कटी और कुटुंब खत्म हुआ।
विश्वामित्र जैसे तपस्वी भी मोहिनी रूप में बहके –
तो आम पुरुष कौन सा अपवाद है?
🌼 अब समय है – चरित्र और संस्कारों की ओर लौटने का।
सशक्त बनो, लेकिन शालीन भी।
आज़ाद बनो, पर मर्यादा के भीतर।
फैशन ऐसा हो जो आत्मसम्मान बढ़ाए,
ना कि दूसरों की नीयत बिगाड़े।
स्त्री और पुरुष दोनों की ज़िम्मेदारी है –
कि वो चरित्रवान बनें,
समाज को बिगाड़ें नहीं।
👉 आधुनिकता में डूबकर संस्कृति को मत भूलो।
क्योंकि देश सभ्यता से बनता है, केवल विकास से नहीं।
🙏 आपका शुभचिंतक – एक सजग, संवेदनशील और संस्कारित नागरिक।
🚩 क्या माता-पिता अपनी बेटियों और बेटों को अनजाने में बर्बादी के रास्ते पर धकेल रहे हैं? 🚩
आजकल माता-पिता अपनी बेटियों को स्कूल-कॉलेज भेजने के नाम पर पूरी आज़ादी दे रहे हैं – सज-संवरकर, क्रीम-पाउडर, लिपस्टिक लगाकर और छोटे, तंग व शरीर दिखाने वाले फैशनेबल कपड़े पहनकर बाहर जाने की खुली छूट दी जा रही है। लेकिन क्या माता-पिता ने कभी यह सोचा कि बेटी की यह ‘मॉडर्न’ सोच उसे प्रेमजाल, लव जिहाद और अपराध के अंधेरे में धकेल रही है?
इसी के साथ लड़कों की भी बुरी आदतें बढ़ती जा रही हैं। माता-पिता यह सोचकर निश्चिंत हो जाते हैं कि "लड़का तो लड़का है, उसे कौन फंसा सकता है?" लेकिन क्या वे यह देख रहे हैं कि लड़के मोबाइल, शराब, सिगरेट, नशा, पॉर्न, आवारागर्दी और चरित्रहीनता की ओर बढ़ रहे हैं?
❗ माता-पिता ज़रा सोचिए ❗
🔴 क्या बेटी सच में स्कूल-कॉलेज जा रही है या किसी और बहाने से बाहर निकल रही है?
🔴 वह किसके साथ बाहर जा रही है और किसके साथ लौट रही है?
🔴 घर से बाहर या अकेले में मोबाइल पर किससे घंटों बात कर रही है?
🔴 क्या वह स्कूल-कॉलेज के नाम पर किसी और दिशा में तो नहीं जा रही?
🔴 जिसे आप गाड़ी चलाना सिखा रहे हैं, क्या वह इसका सही इस्तेमाल कर रही है या कोई और उसे प्रेमजाल में फंसा कर ‘ड्राइविंग सिखाने’ के बहाने कहीं और तो नहीं ले जा रहा?
🔴 क्या आपके सिखाए गए ‘आज़ादी’ और ‘विश्वास’ का कोई गलत फायदा उठा रहा है?
🔴 क्या बेटी संस्कारी और सादगीपूर्ण पहनावा अपना रही है, या छोटे, तंग और अंग प्रदर्शन करने वाले कपड़े पहनकर अनजान खतरों को बुलावा दे रही है?
🔴 क्या माता-पिता अपने कामों में इतने व्यस्त हैं कि बच्चों की परवरिश पर ध्यान ही नहीं दे पा रहे, या फिर लापरवाही में उन्हें ऐसी खुली छूट दे रहे हैं कि वे खुद को प्रेमजाल में फंसाने के लिए पूरी तरह तैयार कर रही हैं?
🚨 लड़कों की बुरी आदतें भी बना रही हैं उन्हें अपराधी!
⚠️ क्या आपका बेटा मोबाइल में गलत संगत में फंस रहा है?
⚠️ क्या वह सोशल मीडिया पर अश्लील कंटेंट देख रहा है और ग़लत संगत में पड़ रहा है?
⚠️ क्या वह दोस्तों के नाम पर बिगड़ रहा है और नशे का शिकार हो रहा है?
⚠️ क्या वह आवारागर्दी कर रहा है और घर पर झूठ बोलकर बाहर घूम रहा है?
⚠️ क्या वह लड़कियों को गलत नजर से देख रहा है और चरित्रहीन बनता जा रहा है?
⚠️ क्या माता-पिता उसे संस्कार नहीं दे रहे, बस उसकी गलतियों पर पर्दा डाल रहे हैं?
🚨 अगर अभी ध्यान नहीं दिया, तो इतिहास गवाह है कि:
✔️ घर के अंदर घुसकर बाबर लूटेगा।
✔️ देश में अपराध और महिला शोषण बढ़ेगा।
✔️ लव जिहाद के मामले बढ़ेंगे और बेटियों के 35 टुकड़े होने की खबरें आती रहेंगी।
✔️ लड़के नशे, पॉर्न, अपराध और गलत आदतों में फंसकर अपना भविष्य बर्बाद कर लेंगे।
✔️ हर दिन नई घटनाएं सामने आएंगी, और माता-पिता रोते रह जाएंगे।
⚠️ आज जो माता-पिता सोचते हैं कि "हमारा बच्चा समझदार है, उसे सब पता है," वे असल में सबसे ज्यादा खतरे में हैं!
🚩 समाधान क्या है? 🚩
✔️ बेटियों और बेटों दोनों को संस्कारों की शिक्षा दें, सादगी और मर्यादा का महत्व समझाएं।
✔️ उनकी गतिविधियों पर नजर रखें – वे किससे मिलते हैं, किससे बातें करते हैं, यह माता-पिता की जिम्मेदारी है।
✔️ आने-जाने के समय का अनुशासन तय करें, देर रात तक बाहर रहने की अनुमति न दें।
✔️ सोशल मीडिया पर उनकी गतिविधियों पर नजर रखें, गलत संगत से बचने के लिए उन्हें मार्गदर्शन दें।
✔️ बेटियों को आत्मरक्षा, शस्त्र-विद्या और सनातन संस्कृति की शिक्षा दें, ताकि वे किसी भी तरह के छल-कपट का सामना कर सकें।
✔️ बेटियों को अंग प्रदर्शन करने वाले, छोटे और तंग कपड़े पहनने से रोकें, ताकि वे अनचाहे खतरों से बच सकें।
✔️ लड़कों को नशा, मोबाइल की लत और गलत संगत से बचाएं, ताकि वे चरित्रवान बन सकें।
✔️ बच्चों को यह समझाएं कि सादगी और मर्यादा ही नारी और पुरुष दोनों का सबसे बड़ा आभूषण है।
🚩 अब भी समय है, अपनी बेटियों और बेटों को जागरूक करें, उन पर ध्यान दें, उनके संस्कार और दिनचर्या को नियंत्रित करें, वरना पछताने के अलावा कुछ नहीं बचेगा। 🚩
**होली: वास्तविक महत्व, वर्तमान स्थिति और समाज पर नकारात्मक प्रभाव**
होली केवल रंगों और उमंग का पर्व नहीं है, बल्कि यह आध्यात्मिकता, प्रेम, सामाजिक समरसता और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक भी है। यह त्योहार हमें भारतीय संस्कृति की गहराई से जोड़ता है और हमें जीवन में आनंद, त्याग और प्रेम के महत्व को समझने का अवसर प्रदान करता है। लेकिन वर्तमान समय में, होली का स्वरूप बदल रहा है और इसके कारण समाज में कई नकारात्मक प्रवृत्तियाँ जन्म ले रही हैं।
**होली का वास्तविक महत्व**
**1. आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व**
- **प्रह्लाद और होलिका की कथा** – बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश।
- **राधा-कृष्ण की होली** – प्रेम और माधुर्य का प्रतीक।
- **कामदेव की कथा** – त्याग और पुनर्जन्म की सीख।
**2. सामाजिक महत्व**
- जात-पात, ऊँच-नीच भेदभाव मिटाकर समानता का भाव उत्पन्न करना।
- परिवार, रिश्तेदार और दोस्तों के बीच प्रेम और एकता बढ़ाना।
**वर्तमान स्थिति में होली का स्वरूप और नकारात्मक प्रभाव**
आज के समय में होली का पारंपरिक और सांस्कृतिक महत्व कहीं पीछे छूटता जा रहा है। यह त्योहार अब भोगवाद, असंयमित व्यवहार और समाज में बढ़ती अनैतिक प्रवृत्तियों का माध्यम बनता जा रहा है।
**1. सामाजिक मूल्यों का पतन**
**(क) युवाओं का असामाजिक और संवेदनहीन होना**
- पहले लोग आपसी मेल-मिलाप और रिश्तों को मजबूत करने के लिए होली खेलते थे, लेकिन अब यह सिर्फ एक दिखावा बनकर रह गया है।
- सोशल मीडिया और वर्चुअल दुनिया में डूबे युवा असली होली की भावना से दूर होते जा रहे हैं।
- मोहल्लों और परिवारों में त्योहारों का जोश कम हो रहा है क्योंकि लोग अपने-अपने मोबाइल में व्यस्त रहते हैं।
**(ख) रिश्तों में दूरियाँ और संवेदनहीनता**
- पहले परिवार और समाज के लोग एक-दूसरे के घर जाकर होली की बधाई देते थे, लेकिन अब एक मैसेज भेजकर औपचारिकता पूरी कर ली जाती है।
- होली जैसे त्योहारों में भी लोग जातिवाद और सांप्रदायिक भेदभाव के कारण बंटने लगे हैं।
**2. नशे और असंयम का बढ़ता प्रभाव**
- होली के अवसर पर शराब, भांग और अन्य नशीले पदार्थों का अत्यधिक सेवन किया जाता है।
- युवा वर्ग नशे में धुत होकर बेकाबू हो जाता है, जिससे दुर्घटनाएँ और अपराध बढ़ते हैं।
- सड़क पर हुड़दंग और असामाजिक गतिविधियाँ सामान्य बात हो गई हैं।
**3. महिलाओं के प्रति अपराध और यौन विकृति**
**(क) छेड़छाड़ और दुर्व्यवहार**
- "बुरा न मानो होली है" का गलत अर्थ निकालकर लड़कियों और महिलाओं के साथ बदतमीजी की जाती है।
- कई बार महिलाएँ इस त्योहार में शामिल होने से डरती हैं क्योंकि कुछ लोग जबरदस्ती रंग लगाने, छूने और अश्लील हरकतें करने लगते हैं।
- भीड़ का फायदा उठाकर अपराधी महिलाओं के साथ छेड़छाड़ करते हैं।
**(ख) अश्लीलता और अनैतिक गतिविधियाँ**
- कुछ स्थानों पर होली के नाम पर अश्लील डांस, गंदे गाने और बेशर्मी भरे कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
- होली की रात कई जगहों पर लड़कियों और महिलाओं के साथ यौन शोषण और दुष्कर्म जैसी घटनाएँ होती हैं।
- नशे में धुत लोग अनैतिक और गैर-कानूनी हरकतें करते हैं।
**4. पर्यावरण और स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव**
**(क) जल संकट और बर्बादी**
- होली के दिन हजारों लीटर पानी व्यर्थ बहाया जाता है, जबकि देश के कई हिस्सों में लोग पानी के लिए तरसते हैं।
- वाटर बैलून और वाटर गन के अंधाधुंध इस्तेमाल से जल की बर्बादी होती है।
**(ख) रासायनिक रंगों से स्वास्थ्य पर खतरा**
- बाजार में बिकने वाले अधिकतर रंगों में हानिकारक केमिकल होते हैं, जो त्वचा, आँखों और बालों को नुकसान पहुँचाते हैं।
- कुछ रंगों में कैंसरकारी तत्व होते हैं, जो लंबे समय तक शरीर पर दुष्प्रभाव डालते हैं।
**(ग) प्रदूषण और होलिका दहन का नकारात्मक प्रभाव**
- होलिका दहन के लिए हजारों पेड़ काटे जाते हैं, जिससे पर्यावरण को नुकसान होता है।
- वायु प्रदूषण बढ़ता है और सांस की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
**5. अपराधों में वृद्धि**
- होली के दिन सड़क दुर्घटनाएँ, लड़ाई-झगड़े और हिंसक घटनाएँ बढ़ जाती हैं।
- चोरी, लूटपाट और दंगे जैसी घटनाएँ भी होली के मौके पर बढ़ जाती हैं।
- कुछ असामाजिक तत्व इस मौके का फायदा उठाकर सांप्रदायिक तनाव बढ़ाने की कोशिश करते हैं।
**सच्चे अर्थों में होली कैसे मनाएँ?**
1. **संस्कृति और परंपरा को जीवित रखें** – परिवार और समाज के साथ मिलकर भजन, कीर्तन और सत्संग करें।
2. **नैतिक मूल्यों को बढ़ावा दें** – होली को प्रेम, सम्मान और सद्भावना से मनाएँ, न कि अनुशासनहीनता से।
3. **युवाओं को जागरूक करें** – उन्हें समझाएँ कि त्योहारों का मतलब भक्ति, आनंद और सामाजिक मेलजोल होता है, न कि अश्लीलता और अनैतिकता।
4. **महिलाओं और कमजोर वर्गों का सम्मान करें** – जबरदस्ती रंग लगाने या दुर्व्यवहार करने की बजाय एक स्वस्थ और सुरक्षित माहौल बनाएँ।
5. **प्राकृतिक रंगों और जल संरक्षण का ध्यान रखें** – केमिकल रंगों और पानी की बर्बादी से बचें।
6. **नशे और अपराध से दूर रहें** – होली को एक पवित्र त्योहार की तरह मनाएँ और किसी भी नशे या अनैतिक कार्यों से बचें।
7. **पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनें** – होलिका दहन में अधिक लकड़ी जलाने से बचें और वायु प्रदूषण न बढ़ाएँ।
**निष्कर्ष**
होली केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और परंपराओं का प्रतीक है। इसे सही तरीके से मनाने की ज़रूरत है ताकि समाज में नैतिकता बनी रहे और युवा भोगवाद के बजाय आध्यात्मिकता की ओर प्रेरित हों। अगर हम सही दिशा में प्रयास करें, तो होली पुनः अपने वास्तविक स्वरूप में लौट सकती है – जहाँ प्रेम, भक्ति और सामाजिक समरसता का संदेश होगा, न कि असंयम, अश्लीलता और नैतिक पतन।
**आपको और आपके परिवार को पावन होली की मंगलकामनाएँ!** 🎨🔥🙏
मैं न तो मन हूं, न बुद्धि, न अहंकार,
न ही चित्त हूं, मैं न तो कान हूं, न जीभ, न नासिका,
न ही नेत्र हूं, मैं न तो आकाश हूं, न धरती,
न अग्नि, न ही वायु हूं, मैं तो शुद्ध चेतना हूं,
अनादि, अनंत शिव हूं। जय गौरी शंकर।।
जय महाकाल।।
न मैं शरीर हूं, न मैं प्राण हूं, न मैं संकल्प,
न मैं शब्द हूं, न मैं रूप हूं, न मैं कोई विकार,
न मैं सुख हूं, न मैं दुख हूं, न मैं मोह हूं,
न मैं बंधन हूं, न मैं मुक्ति हूं, मैं तो निराकार,
अनादि, अनंत शिव हूं। जय गौरी शंकर।।
जय महाकाल।।
न मैं स्त्री हूं, न मैं पुरुष हूं, न कोई रूप धरूं,
न मैं लोभ हूं, न मैं क्रोध हूं, न अहंकार को अपनाऊं,
न मैं ध्यान हूं, न मैं भक्ति हूं, न मैं पूजा हूं,
न मैं कोई फल चाहता, न कोई इच्छा संजोऊं,
मैं तो आत्मा हूं, परम शुद्ध ब्रह्म हूं,
अनादि, अनंत शिव हूं। जय गौरी शंकर।।
जय महाकाल।।
न मैं जीवन हूं, न मैं मृत्यु हूं, न कोई बीच की स्थिति,
न मैं भ्रम हूं, न मैं सत्य हूं, न किसी में कोई असंयम,
न मैं किसी काल हूं, न मैं समय हूं, न कोई स्थान हूं,
न मैं मोह-माया का जाल हूं, न ही मैं जन्म-मृत्यु का खेल हूं,
मैं तो ब्रह्म हूं, मैं तो शिव हूं,
अनादि, अनंत शिव हूं। जय गौरी शंकर।।
जय महाकाल।।
नवविवाहित जोड़ा किराए पर मकान देखने के लिए वर्मा जी के घर पहुँचा।
दोनों पति-पत्नी को देखकर वर्मा दंपत्ति खुश हो गए, सोचा—चलो, कुछ रौनक होगी, कितना सुंदर जोड़ा है, इन्हें मकान जरूर देंगे।
"आंटी, अंकल! हमें दो कमरे और एक किचन वाला मकान चाहिए, क्या हम देख सकते हैं?"
घुटनों के दर्द से जूझ रहीं सुनीता जी उठते हुए बोलीं, "हाँ बेटा, क्यों नहीं, देख लो!"
बाजू में एक छोटा पोर्शन किराए के लिए बनवाया था, जिससे आर्थिक सहायता भी हो जाएगी और सूने घर में रौनक भी आ जाएगी।
मकान सुमन और अजय को बहुत पसंद आया। "अंकल, हम कल ही शिफ्ट हो जाएंगे!"
अरुण जी मुस्कुराए, "बिल्कुल बेटा, स्वागत है!"
दूसरे दिन से घर में नई रौनक आ गई।
सारा दिन सामान जमाने के बाद जैसे ही सुमन और अजय थोड़ा आराम करने बैठे, दरवाजे की घंटी बज उठी।
दरवाजा खोला तो सामने अरुण जी खड़े थे। "बेटा, आंटी ने तुम्हें खाने के लिए बुलाया है।"
अजय झिझकते हुए बोला, "अरे, क्यों तकलीफ की आंटी ने? हम तो बाहर से ऑर्डर करने ही वाले थे!"
पोपले मुँह से हँसते हुए अरुण जी बोले, "आज तो थके हुए हो, खा लो, कल से अपने हिसाब से इंतज़ाम कर लेना!"
धीरे-धीरे सुमन और अजय का वर्मा दंपत्ति से एक अनजाना सा लगाव हो गया। जब उन्हें पता चला कि उनके दोनों बेटे विदेश में स्थायी रूप से बस चुके हैं, तो दोनों का मन भर आया।
रात में सुमन ने कहा, "अजय, सारी रात अंकल की खाँसी और कराहने की आवाज़ आ रही थी, देख आओ, कहीं तबियत ज्यादा खराब न हो!"
अजय बोला, "हाँ, मैं देखता हूँ, तुम नाश्ता बना लो, साथ ही अंकल-आंटी के साथ खा लेंगे!"
अजय ऊपर पहुँचा तो सुनीता जी बोलीं, "क्यों तकलीफ की बेटा? बुढ़ापे में तो ये सब लगा ही रहता है... कहीं हमारी वजह से तुम्हारी नींद तो नहीं खराब हुई?"
अजय मुस्कुराकर बोला, "अरे नहीं आंटी! मैं अभी अंकल को डॉक्टर के पास ले चलता हूँ, दवा से तबियत संभल जाएगी!"
सुनीता जी ने बेबसी से उसकी ओर देखा और हल्की आवाज़ में बोलीं, "बेटा, दवा से ज्यादा अपनेपन से भरे मीठे बोल की जरूरत होती है, बस यही कमी थी, जो तुम दोनों ने पूरी कर दी!"
यह कहते हुए उन्होंने अपने आँसू पोंछे, और अरुण जी की आँखें भी छलक पड़ीं...!
पति की ज़रूरत सिर्फ़ संभोग सुख प्राप्त करने के लिए ही है, लेकिन आज के समय में उसके लिए भी उपाय बाज़ार में उपलब्ध है "मैं शादी नहीं करना चाहती। मैं पढ़ी-लिखी हूँ, आत्मनिर्भर हूँ, और मुझे किसी पति की ज़रूरत नहीं है। लेकिन मेरे माता-पिता बार-बार कहते हैं कि मुझे शादी करनी चाहिए। मुझे क्या करना चाहिए?" मैंने मनोचिकत्स्क से ये सवाल पूछा
मनोचिकित्सक ने कहा, "तुम जीवन में बहुत कुछ करोगी। लेकिन कभी-कभी ऐसा भी होगा कि चीजें तुम्हारी सोच के मुताबिक़ नहीं होंगी, या कुछ गलत हो जाएगा। कभी तुम असफल हो जाओगी, या तुम्हारी इच्छाएँ पूरी नहीं होंगी। ऐसे समय में तुम किसे दोष दोगी? क्या तुम खुद को दोषी ठहराओगी?"
महिला ने कहा, "नहीं, कभी नहीं!"
मनोचिकित्सक ने हंसते हुए कहा, "इसीलिए तुम्हें एक पति की ज़रूरत है, ताकि जब भी तुम्हारा मन खराब हो, तुम उस पर सारा दोष डाल सको और खुद को अच्छा महसूस कर सको।"
इस मज़ेदार बातचीत में एक गंभीर बात छिपी है कि पति का जीवन में क्या महत्व होता है। पति और परिवार से जीवन पूरा होता है। शादी के बाद मातृत्व का आनंद मिलता है और परिवार बढ़ता है। बच्चों के साथ अगली पीढ़ी का निर्माण होता है, जो एक पारिवारिक और सामाजिक प्रक्रिया है।
जवानी में तुम्हारे शरीर की चाहत में बहुत से लोग तुम्हारे नख़रे उठा लेंगे, सेवा भी करेंगे लेकिन तब क्या जब तुम 50 साल की हो जाओगी और तुम्हारे आस पास कोई नहीं होगा, ऐसे समय में पति की ज़रूरत पड़ती है,
समय के साथ, सुंदरता और जवानी कम हो जाती है। उस समय तुम्हारा साथ देने वाला तुम्हारा पति और परिवार ही होता है। पति तुम्हारी रक्षा करता है और तुम्हें जीवन में हर सुविधा देता है। माता-पिता के बाद, पति और बच्चे ही वे रिश्ते होते हैं जिन पर तुम पूरी तरह से भरोसा कर सकती हो, इस उम्मीद के साथ की बुढ़ापे में तुम्हारा अपना कोई होगा,
असल में, पति सिर्फ दोष देने के लिए नहीं होता, बल्कि जीवनभर का साथी होता है, जो हमेशा तुम्हारा साथ देता है और तुम्हारी सुरक्षा और देखभाल करता है।
मुझे गहराई से बात समझ में आयी और कुछ समय बाद शादी की,
आप को किसी से प्यार हो या ना हो, लेकिन जब एक ही कमरे में किसी विपरीत लिंग के साथ आप एक बिस्तर पर सोते हैं, एक साथ खाना खाते है और एक घर में रहते हैं, तो आप को उससे प्रेम भी हो जाटा है
और ऐसे पुरुष के साथ संभोग का आनंद दसगुना हो जाता है,क्यों की आप को पता है कि ये वही इंसान है जिसके ऊपर आप कोई भी दोष डाल सकती है, और वो आप को छोड़ के कही नहीं जाएगा, पति पत्नी का रिश्ता ऐसा ही होता है
मेरी मित्रमंडली में कई ऐसी लड़किया थी, जिन्हें मेरी तरह शादी नहीं करनी थी, ऊपर से तो वो खुश और स्वतंत्र लगती है, लेकिन अंदर से उतनी ही दुखी
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मानवता और राष्ट्र रक्षा: प्रेरणादायक कहानी -
छोटे से गाँव सत्यपुर में लोग सादगी और प्रेम से भरा जीवन जीते थे। यह गाँव एकता और सद्भाव का प्रतीक था, जहाँ सभी एक बड़े परिवार की तरह रहते थे। लेकिन एक दिन, गाँव के बाहर कुछ अजनबी लोग आकर बस गए।
वे अजनबी मीठी बातें करते थे और दिखने में मित्रवत लगते थे, लेकिन उनके इरादे खतरनाक थे। उन्होंने धीरे-धीरे गाँव में नफरत, लालच और झूठ का जहर फैलाना शुरू कर दिया। वे धर्म, जाति और भाषा के नाम पर गाँववालों को बाँटने की साजिश रच रहे थे।
गाँव के बुजुर्ग, रामनाथ जी, एक समझदार और अनुभवी व्यक्ति थे। उन्होंने इस खतरे को भाँप लिया और देखा कि यह गाँव की एकता और मानवता को खत्म कर सकता है। उन्होंने गाँव के होशियार और साहसी युवक आर्यन को बुलाया।
रामनाथ जी ने आर्यन से कहा, "बेटा, हमारी सबसे बड़ी ताकत हमारी मानवता और हमारे देश के प्रति प्रेम है। अगर हम समय पर नहीं चेते, तो ये लोग हमारे गाँव को तबाह कर देंगे।"
आर्यन ने गाँव के युवाओं को इकट्ठा किया और कहा, "हमें इन लोगों की साजिशों को नाकाम करना होगा। मानवता और राष्ट्र प्रेम हमारी सबसे बड़ी ताकत है, और हमें इन्हीं के सहारे इन चुनौतियों का सामना करना होगा।"
युवाओं ने गाँव में जागरूकता अभियान चलाया। उन्होंने शिक्षा, सांस्कृतिक कार्यक्रम और सामुदायिक चर्चाओं का आयोजन किया। उन्होंने गाँववालों को समझाया कि बाहरी लोग उन्हें धर्म, जाति और भाषा के नाम पर बाँटने की कोशिश कर रहे हैं।
एक दिन, उन अजनबियों ने गाँव में दंगा भड़काने की कोशिश की। उन्होंने अफवाहें फैलाईं और गाँववालों को आपस में लड़ाने का प्रयास किया। लेकिन आर्यन और गाँववाले तैयार थे। उन्होंने संयम, सहयोग और समझदारी से समस्या का समाधान किया।
उनकी साजिश नाकाम हो गई, और अजनबी गाँव छोड़कर चले गए। सत्यपुर में फिर से शांति और प्रेम का वातावरण बन गया।
रामनाथ जी ने आर्यन और गाँववालों की प्रशंसा करते हुए कहा, "जब तक हमारी मानवता और राष्ट्र के प्रति प्रेम जीवित है, हमें कोई ताकत नहीं हरा सकती। हमारी एकता ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है।"
सत्यपुर की यह कहानी पूरे देश में फैल गई और मानवता तथा एकता का प्रतीक बन गई।
संदेश:
जब भी मानवता और राष्ट्र के प्रति संकट आए, हमें एकजुट होकर खड़ा होना चाहिए। प्रेम, समझदारी और सहयोग से हम किसी भी चुनौती का सामना कर सकते हैं और मानवता तथा राष्ट्र की रक्षा कर सकते हैं।