कर्म से गहरा नाता

इंसानी जीवन में इच्छाओं को पूरा करना है तो कर्म से गहरा नाता जरूरी है। किंतु कामनापूर्ति होने पर भी जीवन सुखी और शांत रहे, यह जरूरी नहीं। क्योंकि मन का सुकून इस बात पर भी निर्भर करता है कि जरूरतों को पूरा करने के लिए कर्म कैसे किए गए - अच्छे या बुरे। अगर बुरे कर्म किए गए तो वह मन में कलह बनाए रखते हैं। हिन्दू धर्म शास्त्रों में कलहमुक्त जीवन के लिए ही कर्म के साथ धर्म पालन का भी महत्व बताया गया। देव उपासना इसी धार्मिक परंपरा का अहम अंग है। इसी कड़ी में महाशिवरात्रि पर भगवान शिव की उपासना सांसारिक जीवन की सभी कामनाओं को पूरा करने वाली मानी गई है। जिसमें शिव पूजा के साथ व्रत का विधान बहुत ही शुभ है। शास्त्रों के मुताबिक महाशिवरात्रि को व्रत रख शिवालय में शिव आराधना, शिव का गंगा या पवित्र जल से अभिषेक दृश्य और अदृश्य रूप से लौकिक और सांसारिक कामनाओं का पूरा करने वाला है। जानिए, इस बार महाशिवरात्रि-सोमवार के संयोग में शिव पूजा और व्रत कैसे-कैसे सुखद बदलाव लाएगी - - रोजगार और धन के इच्छुक नवयुवक-युवतियां नौकरी के साथ मान-सम्मान, पैसा और प्रतिष्ठा पाएंगे। - अविवाहितों को योग्य जीवनसाथी मिलेगा। - विवाहित स्त्रियां अखंड सौभाग्य यानी पति की लंबी आयु और संतान सुख प्राप्त करेगी। - बुजुर्ग और बड़ी उम्र के पुरुष या महिला वृद्धावस्था के तन, मन के कष्टों और चिंताओं से मुक्त होंगे। धार्मिक दृष्टि से वह पृथ्वीलोक का सुख प्राप्त कर देवलोक पाएंगे। - गृहस्थ पुरुष भरपूर सुख-समृद्धि और पारिवारिक सुख पाएंगे। - व्यवसायी या व्यापारी कारोबार से यश, कीर्ति, अपार धन और लक्ष्मी प्राप्त करेंगे। - छात्र और विद्यार्थी विद्या और बुद्धि के बूते सफलता पाएंगे। - महाशिवरात्रि के साथ आए सोमवार से जुड़ी धार्मिक मान्यता है कि लगातार 14 साल तक सोमवार व्रत कर पारण करने से पुरुष-स्त्री बहुत दाम्पत्य सुख मिलता है।
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