गुरुकुल मिटा, साज़िश रची,
संस्कृति की जड़ें हिलाई गईं।
जो भारत सिखाए मर्यादा का पाठ,
उसी में अब चरित्रहीनता छाई गईं।
बॉलीवुड ने चुपके से जाल बुना,
वासना और धोखे का पाठ सुना।
रिश्तों की पवित्रता खो गई,
हर घर में ज़हर सी घुल गई।
सीरियल में दिखे नाजायज़ रिश्ते,
बॉयफ्रेंड संग पत्नी के फितरे।
पति को मारा योजना बनाकर,
प्रेम नहीं, अब हत्या है रिश्तों में उतर।
माँ-बाप की अब इज़्ज़त नहीं,
बेटा-बेटी भी बदल गए यही।
जहाँ संस्कार पूजा जाते थे,
वहाँ अपशब्द गूंज रहे हैं।
गुरुकुल हटा, नेटफ्लिक्स आया,
चरित्र गिरा, मोबाइल छाया।
टीवी में रोमांस, घर में क्लेश,
हर सीन ने मारा सच्चा देश।
अब बेटा माँ से आँख चुराए,
बेटी संस्कार को भुलाए।
शर्म से झुकीं वो दीवारें,
जहाँ गूँजती थीं वेद-वाणियाँ।
मॉडर्न के नाम पर देह दिखाया,
रिश्तों को भी व्यापार बनाया।
माँ की ममता, पिता का सम्मान,
आज बन गया है अपमान।
प्यार के नाम पर झूठी कहानी,
सच में केवल बेईमानी।
बेटी जो थी लक्ष्मी का रूप,
अब बन गई लाइक्स की भूख।
अब भी समय है, चेतो यारो,
संस्कार फिर से लौटाओ।
बेटी को सीता बनाओ फिर,
बेटे को राम की राह दिखाओ।
सिनेमा से पहले संस्कृति रखो,
रिश्तों में फिर सच्चाई रखो।
बॉलीवुड का नक़ाब हटाओ,
भारत को फिर से भारत बनाओ।
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