सोचो ज़रा...
देश विरोधी अगर शक्ति शाली हो,
तो क्या देश सुरक्षित रह पाएगा?
सोचो ज़रा...
अगर चरित्रहीन को मिले कुर्सी,
तो क्या समाज सुरक्षित बच पाएगा?
सोचो ज़रा...
भ्रष्टाचारी अगर कुर्सी पर होगा,
क्या देश भ्रस्टाचार मुक्त हो पाएगा?
सोचो ज़रा...
जो अयोग्य होकर भी कुर्सी पाएगा ,
क्या वह जिम्मेदारी निभाएगा?
सोचो ज़रा...
जो जाति धर्म के नाम पर बाँटेगा,
क्या वह न्याय दिला पाएगा?
सोचो ज़रा...
जो चरित्रहीनता और भ्रस्टाचार में बिक जायेगा,
तो क्या लोकतंत्र बच पाएगा?
सोचो ज़रा...
जहाँ झूठ बोलने पर सज़ा ना मिले,
तो क्या अपराधी सजा पायेगा?
सोचो ज़रा...
अगर जिम्मेदारों को सजा ही ना हो,
तो क्या लोकतंत्र ज़िंदा रह पाएगा?
सोचो ज़रा...
जहाँ नर नारी चरित्रहीन हो जाए,
तो क्या कोई घर बच पाएगा?
अब उठो... पूछो सबसे यही सवाल,
फिर देखना वो भी पूछेंगे उनसे यही सबाल!
तब यही सबाल इंक़लाब लेकर आयेगा,
फिर हर कुर्सी पर योग्य और जिम्मेदार ही आयेगा!
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