हर नज़र चरित्र वान नहीं होती

हर नज़र चरित्र वान नहीं होती,

बेशर्म नजरे गन्दी होती हैं,

इसलिए ज़रूरी है –

आज़ादी के साथ समझदारी रख।




तेरे पहनावे का उद्देश्य,

कई बार खतरा बन जाता है।

जो सोच पहले ही गन्दी हो,

वो नजरों से बलात्कार कर देता है।


तू कहती है – "ये मेरा हक़ है",

और वो तुझसे कोई छीन नहीं सकता।

मगर जब समाज चरित्रहीन हो,

तो सुरक्षित रहना भी जरुरी है।



तू जो चाहे वो पहन,

तेरी मर्ज़ी पर किसी का हक़ नहीं।

पर जब भूंखे भेड़िये घूमते हों,

तो मर्यादा ही सबसे बड़ी रक्षक बनती ।


तेरी चाल में हो आत्मसम्मान,

तेरे व्यवहार में हो सादगी।

मर्यादा कमज़ोरी नहीं होती,

ये तो तेरे तेज़ की गहराई है।



नज़रें ग़लत हों तो दंड मिले,

पर नीयत बिगड़ने का मौका क्यों देती हो।

जिस समाज की सोच चरत्रहीन हो,

वहाँ सावधानी ही सबसे बड़ी सुरक्षा है।


तू कम नहीं, तू प्रकाश है,

तू हर बदलाव की आस है।

बस इतना याद रख बहना,

तेरा चरित्र ही तेरी आबरू है।



तू आज़ाद है, ये सच है,

पर तेरी गरिमा सबसे बड़ी पहचान है।

जो खुद में संतुलन रखती है,

वो ही सबसे सशक्त स्त्री कहलाती है।



तेरे शरीर का दिखावा, 

पति केअलावा, गैरों को क्यों।

मर्यादा ओढ़कर जब तू चले,

तो तेरे साथ तेरे, घर की आबरू बचे।


तू वही है जो मिसाल बने,

तेरे कारण समाज संभले।

आज़ादी भी तेरे पास हो,

और सम्मान भी तेरे साथ चले।



"स्वतंत्रता तब सुरक्षित होती है, जब उसमें मर्यादा और समझदारी साथ हो।"

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